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अयोध्या केस: कोर्टरूम में बोले मुस्लिम पक्ष के वकील- मी लॉर्ड! ऑर्डर में ना लिखें मेरा नाम

बेंच को मामले से जुड़े कुल 120 मुकदमों, 88 गवाहों, 13 हजार 886 पन्नों के साक्ष्य, 257 अन्य कागजात समेत इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले से जुड़े 4303 प्रिंटेड पेज और 8,533 टाइप्ड पेज को देखने हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (10 जनवरी) को राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद केस में सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने खंडपीठ के सदस्य जस्टिस यूयू ललित के बाबरी विध्वंस से जुड़े एक केस में पैरवी करने का मसला उठाया तो इसके बाद खंडपीठ के सभी पांचों जजों ने आपसी मंत्रणा की। मंत्रणा के बाद सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित कने खुद को इस सुनवाई से अलग कर लिया है। इस दौरान जब सीजेआई गोगोई कोर्ट ऑर्डर लिखने लगे तब मुस्लिम पक्ष के वकील ने अदालत से अनुरोध किया, “मी लॉर्ड! कोर्ट ऑर्डर से मेरा नाम अलग रखा जाय, उसमें नहीं लिखा जाय।” धवन की गुजारिश पर सीजेआई ने कहा, “हमें ऐसा क्यों करना चाहिए? आखिर आप देश के नामचीन लोगों में एक बड़ा नाम हैं।” तब धवन ने कहा, लेकिन हुजूर अभी भी मुझे आरके धवन (दिवंगत कांग्रेसी नेता) के पत्र मिलते हैं।

बता दें कि मामले की अब अगली सुनवाई 29 जनवरी को नई बेंच करेगी। बेंच को मामले से जुड़े कुल 120 मुकदमों, 88 गवाहों, 13 हजार 886 पन्नों के साक्ष्य, 257 अन्य कागजात समेत इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले से जुड़े 4303 प्रिंटेड पेज और 8,533 टाइप्ड पेज को देखने हैं। इस मामले से जुड़े वास्तविक कागजात 15 बड़े बक्सों में लॉक रूम में रखे गए हैं। इसके अलावा दोनों पक्षों की तरफ से पैरवी करने वाले वकीलों की दलीलें भी सुननी है। सीजेआई ने कहा कि कुछ दस्तावेज हिंदी, अरबी, गुरुमुखी और उर्दू में हैं और अभी यह निश्चित नहीं है कि सभी का अनुवाद हो चुका है या नहीं।

मामले में मुस्लिम पक्ष ने कुल पांच वकील उतारे हैं जिनमें राजीव धवन, राजू रामचंद्रन, दुष्यंत दवे, शेखर नफाडे और मीनाक्षी अरोड़ा शामिल हैं। उधर हिन्दू पक्ष की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, हरीश साल्वे, सीएस वैद्यनाथन और पीएस नरसिम्हा मामले की पैरवी कर रहे हैं। पांच जजों की खंडपीठ में CJI रंजन गोगोई, के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

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