ताज़ा खबर
 

अदालती सुर्खियों में रहे मनमोहन, सोनिया और राहुल

इस साल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से संबंधित अदालती मामले सुर्खियों में रहे। सोनिया और राहुल को नेशनल हेरल्ड मामले में अदालत में पेश होना पड़ा..

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 5:13 AM
राहुल गांधी और सोनिया गांधी। (पीटीआई फाइल फोटो)

इस साल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से संबंधित अदालती मामले सुर्खियों में रहे। सोनिया और राहुल को नेशनल हेरल्ड मामले में अदालत में पेश होना पड़ा। मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। अदालत ने एक अप्रैल को विशेष सीबीआइ अदालत के 11 मार्च के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें मनमोहन को कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाला मामले में आरोपी के रूप में पेश होने को कहा गया था। दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सोनिया और राहुल पटियाला हाउस अदालत में पेश हुए। दोनों नेताओं को अन्य के साथ मामले में 19 दिसंबर को जमानत मिल गई। उन पर 90.25 करोड़ रुपए की हेरफेर करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, कांग्रेस ने इस मौके को शक्ति प्रदर्शन के रूप में तब्दील कर फायदा उठाने की कोशिश की।

सोनिया और राहुल के अलावा कांग्रेस नेता मोती लाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस और सुमन दुबे भी आरोपी के रूप में अदालत में पेश हुए। छठे आरोपी सैम पित्रोदा को व्यक्तिगत पेशी से छूट मिल गई और सुनवाई की अगली तारीख 20 फरवरी को अन्य के साथ पेश होने का निर्देश दिया गया।

इसी तरह का दृश्य दो दिन बाद 21 दिसंबर को दिखा जब वित्त मंत्री अरुण जेटली डीडीसीए में कथित गड़बड़ियों के संबंध में कथित मानहानि वाले बयानों को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दायर करने पटियाला हाउस अदालत पहुंचे।

कोयला घोटाले के भूत ने मनमोहन सिंह का पीछा नहीं छोड़ा और इस या उस मामले में उन्हें या तो आरोपी के रूप में या गवाह के रूप में बुलाए जाने की मांग उठती रही। मामलों में से एक में आरोपी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने इस संबंध में एक विफल प्रयास किया।

इस साल पूर्व सांसद एवं उद्योपति नवीन जिंदल, पूर्व कोयला राज्य मंत्रियों दसारी नारायण राव और संतोष बागरोडिया और राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा सहित कई मंत्रियों को कोयला घोटाला मामलों की गरमी का सामना करना पड़ा।

पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन और अन्य से जुड़े एयरसेल-मैक्सिस सौदा मामले में कार्यवाही विशेष अदालत में काफी धीमी गति से चली और सीबीआइ अब भी मलेशिया आधारित चार आरोपियों के खिलाफ जारी समन को तामील करने की प्रक्रिया में उलझी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून के लंबे हाथ और न्यायपालिका के रूख की झलक तब मिली जब 17 साल पुराने एक मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन जो अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, को अन्य के साथ साढ़े चार साल कैद की सजा सुनाई गई।

अदालत ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ कथित धोखाधड़ी के एक मामले में आरोप तय किए, जबकि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं पीएमके नेता अंबुमणि रामदास के खिलाफ भ्रष्टाचर के दो मामलों में मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया।

राष्ट्रमंडल से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में इस साल पहली दोषसिद्धि हुई जिसमें छह लोगों को अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई। अदालत ने सीबीआइ के 1987 के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में भी फैसला दिया जिसमें पीएसी के 16 आरोपी कर्मियों को बरी कर दिया गया। इस घटना में 42 मुसलमानों की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी जिन्हें मेरठ में एक गांव से पकड़ा गया था। अदालतों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और दिल्ली के पूर्व कानून मंत्रियों जितेंद्र सिंह व सोमनाथ भारती सहित अन्य नेताओं के खिलाफ दायर मामलों को भी सुना।

सीबीआइ को तब काफी आलोचना का सामना करना पड़ा जब एक विशेष अदालत ने 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाला मामले में न सिर्फ सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया, बल्कि यह भी कहा कि उसका आरोपपत्र ‘पूरी तरह विकृत और गढ़े गए तथ्यों पर आधारित’ है। अदालत ने सीबीआइ निदेशक को मामले में गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का भी निर्देश दिया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App