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दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में अदालत ने दिया पहला फैसला, दुकान लूटने के आरोपी को किया बरी

दिल्ली की एक अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने इस मामले के आरोपी सुरेश को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उसकी ठीक से पहचान नहीं हो सकी और गवाहों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं।

पिछले साल फरवरी महीने में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी। (एक्सप्रेस फोटो)

पिछले साल फ़रवरी के महीने मे उत्तर -पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में अदालत ने अपना पहला फैसला सुनाया है। अदालत ने एक व्यक्ति को भीड़ का हिस्सा होने और दुकान की डकैती करने के आरोप से बरी कर दिया है। 

मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने इस मामले के आरोपी सुरेश को यह कहते हुए बरी कर दिया कि आरोपी की पहचान नहीं हो सकी है और गवाहों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। रावत ने यह भी कहा कि यह बरी करने का स्पष्ट मामला था। 

लूटपाट के इस मामले में आसिफ नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि 25 फरवरी, 2020 की शाम बाबरपुर रोड पर स्थित उसकी दुकान पर लोहे की रॉड और लाठियां लेकर आई लोगों की भारी भीड़ ने हमला कर दिया था और दुकान का ताला तोड़ दिया था। जिसके बाद उसकी दुकान लूट ली गई थी।  

यह दुकान मूल रूप से भगत सिंह नाम के व्यक्ति की थी। भगत सिंह ने दुकान को आसिफ को किराये पर दिया हुआ था। भगत सिंह ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि भीड़ ने उसके दुकान को इसलिए लूट लिया था क्योंकि उन्हें लगा कि यह एक मुस्लिम व्यक्ति की दुकान है। इस दौरान भीड़ के साथ उसकी बहस भी हुई लेकिन भीड़ ने उसे खदेड़ दिया। बाद में स्थानीय पुलिस अधिकारी ने आरोपी सुरेश की पहचान दुकान लूटने वाले वाले शख्स के रूप में की थी।

पुलिस ने इस मामले में सुरेश को सात अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया था. वह गांधीनगर में कपड़े की दुकान पर काम करता था। हालांकि सुरेश ने इन आरोपों से इंकार किया था। पुलिस ने इस मामले में सुरेश के खिलाफ धारा 454, 149 और 394 के तहत मामला दर्ज किया था।

दिल्ली दंगे से जुड़ा यह पहला मामला है जिसमें अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों में अदालत में सुनवाई जारी है। पिछले साल फरवरी महीने में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी। इस दंगे में 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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