ताज़ा खबर
 

खतरे में देश के 74% ATM! हैकर्स कभी भी लगा सकते हैं चूना

देश के अधिकतर एटीएम सार्वजनिक बैंकों द्वारा ऑपरेट किए जाते हैं। आंकड़ों की बात करें तो देश के 89 प्रतिशत एटीएम सरकारी बैंकों के हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी बैंकों के एटीएम ही रिस्क पर हैं।

देश के 74 प्रतिशत एटीएम आउटडेटेड सॉफ्टवेयर पर चल रहे हैं। (express photo)

सरकार ने शुक्रवार को इशारा किया है कि देश के 25 प्रतिशत सरकारी बैंकों के करीब 74 प्रतिशत एटीएम (ऑटोमैटिक टेलर मशीन) आउटडेटेड हो चुके हैं, जिससे उनके हैक होने का खतरा काफी बढ़ गया है। गौर करने वाली बात ये है कि एक सवाल के जवाब में सरकार ने संसद में इस बात की जानकारी दी है। सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि अधिकतर एटीएम मशीनें अनसपोर्टेड सॉफ्टवेयर पर चल रहे हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में ज्यादा डिटेल्स देने से इंकार कर दिया है।

बता दें कि देश के अधिकतर एटीएम सार्वजनिक बैंकों द्वारा ऑपरेट किए जाते हैं। आंकड़ों की बात करें तो देश के 89 प्रतिशत एटीएम सरकारी बैंकों के हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी बैंकों के एटीएम ही रिस्क पर हैं, प्राइवेट सेक्टर के बैंक एटीएम भी फ्रॉड के रिस्क पर हैं, क्योंकि देश का अधिकतर बैंकिंग सिस्टम अभी भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ही कंट्रोल किया जाता है। उल्लेखनीय है कि यह जानकारी ऐसे समय में सामने आयी है, जब देश में एटीएम फ्रॉड के मामलों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। कई लोगों ने हाल-फिलहाल एटीएम इस्तेमाल के दौरान फ्रॉड की शिकायतें दर्ज करायी हैं। सरकार ने संसद में दिए अपने जवाब में कहा है कि जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के बीच में डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड धांधली से जुड़े 25000 मामले सामने आए हैं।

एटीएम हैकिंग में जहां बैंकों का सॉफ्टवेयर आउटडेटेड हैं, वहीं हैकर्स हर दिन अपनी तकनीक को अपग्रेड कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी सरकारी बैंकों को कई बार अपने सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने की सलाह दे चुका है। लेकिन इसके बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई खास काम नहीं हो सका है। यहां तक कि पिछले माह ही रिजर्व बैंक ने एक बार फिर बैंको से उनकी कैश निकासी व्यवस्था को अपग्रेड करने का निर्देश दिया है। बहरहाल एक तरफ सरकार लोगों को कैशलैस ट्रांजेक्शन के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के सॉफ्टवेयर आउटडेटेड होने की खबर काफी चिंता बढ़ाने वाली है। जब तक एटीएम सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं हो जाते, तब तक बैंक अपने ग्राहकों को शिक्षित करके और अपने आंतरिक सिस्टम में सुधार करके ऑनलाइन फ्रॉड पर कुछ हद तक लगाम लगा सकती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App