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दक्षिण भारत में बढ़ रही हिंदी भाषियों की तादाद, मातृभाषा को लेकर जारी आंकड़ों से खुलासा

देश में अब रिवर्स पलायन का चलन बढ़ा है। कुछ दशक पहले तक दक्षिण भारत के इन दोनों राज्यों से बड़ी आबादी उत्तर भारत की ओर पलायन किया करती थी। लेकिन अब इन राज्यों के लोग उत्तर भारत के बजाय दक्षिण भारत के ही एक अन्य राज्य कर्नाटक में जा रहे हैं।

Hindi Diwas Speech: इस चित्र का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है।

ऐसे वक्त में जब उत्तर भारत के राज्यों में तमिल और मलयालम बोलने वाले लोगों की तादाद घट रही है। ठीक उसी वक्त तमिलनाडु और केरल में हिंदी, बंगाली, असमी, उड़िया भाषा बोलने वालों की तादाद बढ़ रही है। ये आंकड़े हाल ही में जारी की गई 2011 की जनगणना में मातृभाषा के आंकड़ों पर आधारित हैं। इन आंकड़ों से ये साफ समझा जा सकता है कि देश में अब रिवर्स पलायन का चलन बढ़ा है। कुछ दशक पहले तक दक्षिण भारत के इन दोनों राज्यों से बड़ी आबादी उत्तर भारत की ओर पलायन किया करती थी। लेकिन अब इन राज्यों के लोग उत्तर भारत के बजाय दक्षिण भारत के ही एक अन्य राज्य कर्नाटक में जा रहे हैं। दिल्ली में रहने वाले ​तमिल और मलयाली लोगों की संख्या का अंतर 2001 और 2011 की जनगणना में साफ समझा जा सकता है।

कभी महाराष्ट्र को दक्षिण भारतीयों का पसंदीदा स्थान माना जाता था। इसके पीछे बड़ा कारण देश की आर्थिक राजधानी मुंबई भी थी। लेकिन अब मुंबई में भी कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम बोलने वालों की संख्या में गिरावट आ रही है। वहीं उत्तर भारत में मलयाली लोगों की आबादी 2001 से 2011 के बीच सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में बढ़ी है। शायद इसका कारण नोएडा हो सकता है। वहीं हरियाणा में तमिल आबादी में काफी बढ़त दर्ज की गई है, जिसका कारण गुड़गांव हो सकता है।

लेकिन उत्तर भारत की ओर पलायन करके आने वालों की संख्या उन लोगों से काफी कम है जो मलयाली और तमिल दक्षिण भारत के ही दूसरे राज्यों में पलायन कर गए हैं। हालांकि तमिलनाडु और केरल में किसी भी अन्य राज्य से अधिक हिंदी भाषी बढ़े हैं। दक्षिण भारत के लगभग सभी राज्यों में हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में है। वहीं केरल में भी असमी और बंगाली बोलने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। लेकिन ये आंकड़ा इतना बड़ा नहीं है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक का मुकाबला कर सके। दक्षिण भारत में नेपाली बोलने वालों की तादाद में भी इजाफा हो रहा है। दोनों ही मामलों में इन राज्यों में करीब 24 फीसदी का आबादी में इजाफा भी दर्ज किया गया है।

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