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चीन ने LAC के पास निर्माण किया, लद्दाख के नेता ने बताया- अब पास से भी नजर आता है सबकुछ

उन्होंने कहा कि साउथ पैंगोंग के ब्लैक टॉप के पास साल 2018 तक चीन की तरफ से सिर्फ एक कैमरा लगाया गया था। आज हम वहां अक्सर चीनी गाड़ियों और टेंटों को देखते हैं।

INDIA, CHINA, LADAKHतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। फोटो सोर्स – AP

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। ईस्टर्न लद्दाख के काउंसलर Konchok Stanzin ने कहा है कि चीन LAC के पास निर्माण कर रहा है। Konchok Stanzin ने कहा है कि चीन जिस सरंचना का निर्माण कर रहा था वो पहले बॉर्डर पर स्थित गांवों से नजर नहीं आता था लेकिन अब यह निर्माण साफ-साफ नजर आता है। भारत जिसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल मानता है वहां चीन धीरे-धीरे पैर जमा रहा है। बता दें कि Autonomous Hill Development Council (LAHDC) में Konchok Stanzin ने निर्दलीय जीत हासिल की थी।

Konchok Stanzin ने ‘The Hindu’ से साक्षात्कार के दौरान यह बात कही। उन्होंने आगे बताया कि प्रत्यक्षदर्शी इस बात के गवाह है कि वहां कईं चीनी टेंट, बंकर और चीनी गाड़ियां भी नजर आती हैं। Konchok Stanzin ने कहा कि भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती होने की वजह से पैंगॉन्ग झील के नजदीक गांव में रहने खानाबदोश सर्दी के मौसम में यहां के जमीन पर उगने वाले चारे का इस्तेमाल अपने पशुओं के लिए नहीं कर पाए। Konchok Stanzin उस डेलिगेशन के भी हिस्सा हैं जो पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में है और केंद्र सरकार से मिलकर अपनी कई मांगों को रखना चाहता है। इस प्रतिनिधिन मंडल ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

उन्होंने कहा कि साउथ पैंगॉन्ग के ब्लैक टॉप के पास साल 2018 तक चीन की तरफ से सिर्फ एक कैमरा लगाया गया था। आज हम वहां अक्सर चीनी गाड़ियों और टेंटों को देखते हैं। जबकि कुछ ऐसे भी ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं जहां वो अपनी गाड़ियों से आते-जाते हैं और उन क्षेत्रों में हम घोड़ों या अन्य साधनों से भी नहीं पहुंच पाते। फिंगर एरिया में ऐसे कई क्षेत्र हैं जिसपर चीन ने कब्जा कर लिया है। काउंसलर ने बताया कि साल 2018 से ही चीन इस इलाकों में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है। एक रणनीति के तहत चीन इलाके के खानाबदोशों को उकसाता है, उन्हें सुविधाएं मुहैया कराता है और यह लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ कर उस स्पॉट पर डेरा जमा लेते हैं और उसे अपना बताने लगते हैं।

Konchok Stanzin के मुताबिक भारत की तरफ से इन खानाबदोशों पर कई प्रतिबंध भी है। इन्हें आईकार्ड दिखाना पड़ता है और अन्य जरुरी परिचय देने पड़ते हैं। काउंसलर ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री से अपील की है कि वो इन खानाबदोशों को फिंगर एरिया में जाकर अपने पशुओं को चारा खिलाने की इजाजत दें।

 

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