मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक पर हुए भूस्खलन के बाद कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। भूस्खलन के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें बड़े-बड़े पत्थर मिसिंग लिंक पर गिरते हुए दिखाई दे रहे थे। इसके चलते रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।

कड़ी मशक्कत के बाद रास्ते को दोबारा खोल दिया गया और अब ट्रैफिक सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। लेकिन इन वायरल वीडियो के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का यह मिसिंग लिंक क्या है? इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? इसके क्या फायदे हैं? इसकी लागत कितनी है?

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जनसत्ता ने आपके लिए एक मोशन इंफोग्राफिक तैयार किया है जिसमें आपको हर जानकारी आसान और सरल भाषा में मिलेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर · मोशन पाथ
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक — खालापुर से कुसगांव तक का नया रास्ता
6 जुलाई 2026 — भूस्खलन के बाद आंशिक रूप से बंद
लोनावला झील खालापुर टोल प्लाजा शुरुआत चौड़ीकरण-1 खोपोली मिसिंग लिंक शुरुआत खंडाला घाट 2 सुरंगें · 2 वायाडक्ट भूस्खलन स्थल — आंशिक बंद वायाडक्ट-1 · वायाडक्ट-2 लोनावला चौड़ीकरण-2 कुसगांव — समाप्ति
शुरुआत / समाप्ति
13.3 किमी नया कॉरिडोर
सुरंग / वायाडक्ट क्षेत्र
भूस्खलन स्थल
मिसिंग लिंक: मुख्य आंकड़े
कुल लंबाई
13.3 किमी
सुरंगें
2 आधुनिक सुरंगें
सुरंग प्रणाली
करीब 10.5 किमी
वायाडक्ट
2 विशाल वायाडक्ट
केबल-स्टे ब्रिज
182–184 मीटर ऊंचा
कुल लागत
6,695 करोड़ रुपये
मानचित्र पर दिखाए गए सुरंग-वायाडक्ट खंड (खंडाला घाट क्षेत्र) की लंबाई करीब 13.4 किलोमीटर बताई गई है, जबकि पूरे नए हाई-स्पीड कॉरिडोर की कुल लंबाई 13.3 किलोमीटर है। यह रास्ता खालापुर टोल प्लाजा से शुरू होकर खोपोली, खंडाला घाट (सुरंगों और वायाडक्ट से होते हुए) और लोनावला से गुजरता हुआ कुसगांव पर समाप्त होता है — यानी खालापुर और कुसगांव, इन दो क्षेत्रों को यह नया कॉरिडोर आपस में जोड़ता है।
पहले की चुनौतियां बनाम मिसिंग लिंक से फायदा
पहले क्या चुनौतियां थीं
  • खंडाला घाट में कई हेयरपिन मोड़ और तीव्र ढलान
  • भारी ट्रकों के कारण अक्सर लंबा ट्रैफिक जाम
  • मानसून में चट्टानें गिरने और भूस्खलन का खतरा
  • दुर्घटना संभावित क्षेत्र, कई दुर्घटनाएं हुईं
  • छुट्टियों-वीकेंड पर कई घंटे वाहन फंसना
मिसिंग लिंक से क्या हुआ
  • मुंबई-पुणे के बीच दूरी लगभग 6 किमी कम हुई
  • यात्रा का समय 20–30 मिनट तक घटा
  • खंडाला घाट के खतरनाक हिस्से से गुजरना लगभग खत्म
  • ट्रैफिक जाम में कमी आने लगी
  • भारी वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हुई
परियोजना की टाइमलाइन
13 जून 2017
महाराष्ट्र कैबिनेट से परियोजना को मंजूरी
30 अगस्त 2018
ठेकेदारों को वर्क ऑर्डर / लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी
2019
मुख्य निर्माण कार्य शुरू
1 मई 2026
परियोजना यातायात के लिए शुरू की गई
6 जुलाई 2026
भूस्खलन के बाद परियोजना आंशिक रूप से बंद
स्रोत: महाराष्ट्र सरकार / राज्य सड़क विकास महामंडल संबंधी उपलब्ध जानकारी के आधार पर। मानचित्र पर दिखाई गई भौगोलिक स्थितियां अनुमानित हैं।

इसे इंजीनियरिंग का चमत्कार क्यों माना गया?

13.3 किलोमीटर में फैले मिसिंग लिंक में 1.6 किलोमीटर और 8.9 किलोमीटर की दो जुड़वां सुरंगें, दो हाई-स्पीड वायडक्ट और टाइगर वैली के ऊपर बना 183 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है जो इसे देश का अपनी तरह का सबसे ऊंचा पुल बनाता है। लोनावला झील के लगभग 180 मीटर नीचे खोदी गई 8.9 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग जिसे ऑस्ट्रिया की नई सुरंग निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है, दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में से एक है।

इसमें इतना समय क्यों लगा?

इंजीनियरों को सह्याद्री पहाड़ियों से होकर अस्थायी मार्ग भी बनाने पड़े। इस क्षेत्र की तेज हवाओं, घने कोहरे और भारी मानसूनी बारिश का सामना करने के लिए डिज़ाइन की गई इस परियोजना को पूरा होने में लगभग तीन दशक लग गए। दुर्घटना-बहुल्य घाट खंड के विकल्प की आवश्यकता को सबसे पहले 1995 में आरआईटीईईएस द्वारा पहचाना गया था, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण से भी पहले।