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पेट्रोलियम जासूसी मामला: हवालात भेजे गए तेल कंपनियों के अफसर

पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार उद्योग जगत के पांच अफसरों को शनिवार को एक स्थानीय अदालत ने पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि कि आरोपियों से बरामद दस्तावेजों से जाहिर होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया […]

Author February 22, 2015 09:38 am
पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी कराने के मामले में अब तक 12 गिरफ्तार (फोटो: भाषा)

पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार उद्योग जगत के पांच अफसरों को शनिवार को एक स्थानीय अदालत ने पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि कि आरोपियों से बरामद दस्तावेजों से जाहिर होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया गया है।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संजय खनगवाल ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को उनसे 24 फरवरी तक हिरासत में पूछताछ की इजाजत दे दी। वहीं पुलिस ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया गया।

आरोपियों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। इसे देखते हुए सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आरोप लग सकते हैं। पुलिस ने कहा कि अगर आरोपियों को इस चरण में रिहा कर दिया गया तो वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। साथ ही, उसे आरोपियों के पास से जो दस्तावेज मिले हैं, उनके संबंध में उसे संबंधित मंत्रालयों से संपर्क करना होगा और हिरासत में पूछताछ के दौरान उनका इन दस्तावेजों से आमना-सामना कराने की जरूरत है।

पुलिस ने कहा कि ये पांचों आरोपी अपने जिन वरिष्ठ अफसरों के इशारे पर इन संवेदनशील दस्तावेजों को खरीद रहे थे, उनसे भी पूछताछ हो सकती है। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों के खुलासों के आधार पर इन्हें गिरफ्तार किया गया। जांच अधिकारी (आइओ) ने कहा कि हमें तीन दिनों की पुलिस हिरासत की जरूरत है क्योंकि हमें बरामदगी करनी है और लाभार्थियों से पूछताछ करनी है। उन्होंने कहा कि जांच शुरुआती चरण में है और पेट्रोलियम व अन्य मंत्रालयों के अधिकारी जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों पर गौर करेंगे।

इस बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कारपोरेट जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए दिल्ली पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि अब उसे उन ‘शीर्ष व्यक्तियों’ को निशाना बनाना चाहिए जिन्हें बजट संबंधी गोपनीय दस्तावेज कथित तौर पर लीक होने से फायदा होता।

दस्तावेजों की चोरी के इस मामले में शनिवार तक गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर 12 तक पहुंच गई है। इससे पहले पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में गिरफ्तार ऊर्जा सलाहकार प्रयास जैन के कार्यालय की तलाशी लेने के बाद नोएडा-दिल्ली में पेट्रोलियम कंपनी के कार्यालयों पर छापा मारा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जूबिलंट एनर्जी के वरिष्ठ कार्यकारी सुभाष चंद्रा को सुबह जैन के कार्यालय ले जाया गया। जैन के कार्यालय की तलाशी के बाद पुलिस टीम उसे जूबिलंट एनर्जी के नोएडा कार्यालय ले गई। पुलिस ने चुराए हुए दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए उसके कार्यालय और अन्य कमरों की तलाशी ली।

जिन पांच आरोपियों को पुलिस ने शनिवार को अदालत में पेश किया, उनमें आरआइएल के शैलेश सक्सेना, एस्सार के विनय कुमार, केयर्न इंडिया के केके नाइक, जुबिलेंट एनर्जी के सुभाष चंद्रा और रिलायंस एडीएजी के ऋषि आनंद शामिल हैं। सक्सेना रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) में कारपोरेट मामलों के प्रबंधक हैं, जबकि चंद्रा जुबिलैंट एनर्जी के वरिष्ठ कार्यकारी हैं। आनंद रिलायंस एडीएजी में उप महाप्रबंधक हैं। विनय एस्सार के उप महाप्रबंधक जबकि नायक केयर्न इंडिया में महाप्रबंधक हैं।

इन पांच आरोपियों के वकीलों ने उनके मुवक्किलों को पांच दिन के लिए हिरासत में देने की पुलिस की मांग का जोरदार विरोध किया और कहा कि उनके मुवक्किल 18-19 फरवरी को ही अवैध तरीके से हिरासत में ले लिए गए। बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किलों से कुछ नहीं मिला और पुलिस ने अदालत को यह भी नहीं बताया कि आरोपियों के खिलाफ कौन कौन से आरोप हैं।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जब निजी कंपनियों के अधिकारियों की गिरफ्तारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस स्वतंत्र जांच कर रही है और जांच के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा। कानून अपना काम करेगा, चाहे जो कोई भी हो।

इन पांचों की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तारियों की संख्या 12 हो गयी है। कल सात अन्य लोग अदालत में पेश किए गए थे जिनमें से चार को 23 फरवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था तथा तीन दो सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए थे।

इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि हमने उन स्थानों की तलाशी ली, जो जांच के सिलसिले में जरूरी है। हम आगे भी कई स्थानों पर छापा मार सकते हैं क्योंकि हमारा लक्ष्य पूरे मामले की तह तक पहुंचना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमें यह जानने की जरूरत है कि यह कब से चल रहा था और किन लोगों को इससे लाभ पहुंचा।

इन सभी सभी अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 411 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में दर्ज प्राथमिकी को शुक्रवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया था। इसमें कहा गया है कि नेशनल गैस ग्रिड के बारे में वित्त मंत्री के 2015-16 के बजट भाषण में शामिल किए जाने के लिए दी गई जानकारी भी उन कई ‘गोपनीय ’ दस्तावेजों का हिस्सा है जिन्हें आरोपियों से बरामद किया गया।

 

 

 

 

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