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कोरोना का कहर: 24 साल में पहली बार मंदी की गिरफ्त में भारत, पर उम्मीद की एक किरण भी

इसी बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियम ने कहा कि अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनरूद्धार हो रहा है उससे लगता है कि चालू वित्त वर्ष में इसका प्रदर्शन अब तक के अनुमानों से बेहतर रहेगा। उन्होंने यह बात दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में संकुचन अनुमान के विपरीत कम रहने के बीच कही।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: November 28, 2020 10:26 AM
Coronavirus, Economy, Indiaतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

Coronavirus Crisis का कहर न केवल हेल्थ सेक्टर पर बरपा, बल्कि इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया। इस वैश्विक महामारी के चलते 24 साल में पहली बार देश मंदी की गिरफ्त में आ गया। पर ताजा आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि उम्मीद की एक किरण अभी भी है। कोरोना संकट से पनपा संकुचन (कॉट्रैक्शन) कम हो रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर गति पकड़ रहा है।

दरअसल, अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दूसरी तिमाही में केवल 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि इससे बड़े संकुचन की आशंका थी। आने वाले समय में बेहतर उपभोक्ता मांग से इसमें और सुधार की उम्मीद जतायी जा रही है।

कोरोना वायरस महामारी फैलने से रोकने के लिए लागू सख्त सार्वजनिक पाबंदियों के बीच चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई थी। कारण- कोरोना और उसके रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ था, जिससे आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गयी थी। लगातार दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में संकुचन से भारत तकनीकी रूप से मंदी में आ गया है।

सांख्यिकी मंत्रालय के शुक्रवार को जारी आंकड़े के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत का संकुचन हुआ। एक साल पहले 2019-20 की इसी तिमाही में इसमें 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जून से ‘लॉकडाउन’ से जुड़ी पाबंदियों में ढील दिये जाने के बाद से अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर हो रही है। जुलाई-सितंबर तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि इससे पूर्व तिमाही में इसमें 39 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

कृषि क्षेत्र का पदर्शन बेहतर बना हुआ है और इसमें दूसरी तिमाही में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, बिजली और गैस क्षेत्र में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय और रीयल एस्टेट सेवा में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत की गिरावट आई। व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आई। अर्थव्यवस्था दूसरा सर्वाधिक रोजगार देने वाला निर्माण क्षेत्र में दूसरी तिमाही में केवल 8.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पहली तिमाही में इसमें 50 प्रतिशत का संकुचन हुआ था।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम के अनुसार, महामारी और पिछली तिमाही में बड़ी गिरावट को देखते हुए जीडीपी का आंकड़ा उत्साहजक है। उन्होंने निकट भविष्य के लिये परिदृश्य के बारे में कहा, ‘‘हमें सतर्क रहते हुए उम्मीद करनी चाहिए और कोरोना महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।’’

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में देखा जाए तो भारत के जीडीपी में संकुचन 15.7 प्रतिशत रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में इसमें 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। हालांकि, 1996 के रिकार्ड के आधार पर जुलाई-सितंबर तिमाही में गिरावट के साथ भारत तकनीकी रूप से मंदी में आ गया है लेकिन अनुमान के विपरीत बेहतर सुधार से चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति कुछ सुधने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने अनुमान जताया कि है कि पुनरूद्धार तेजी से (V आकार) होगा।

बता दें कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.9 प्रतिशत रही। अप्रैल-जून तिमाही में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं, भारत में कोराना वायरस संक्रमितों की संख्या 93 लाख को पार कर गयी है और इस मामले में दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। वहीं 1.35 लाख लोगों की मौत हुई है। अर्थव्यवस्था में सुधार की खबर आरबीआई की अगले सप्ताह पेश होने वाली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले आयी है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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