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नवंबर तक बाजार में आ सकती है इस बड़ी कंपनी की कोरोना वैक्सीन, रेस में पीछे हुई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, भारतीय कंपनियों का ये है हाल

कोरोना के खिलाफ सबसे असरदार और अहम मानी जा रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका की संभावित वैक्सीन बाजार में आने में कुछ देरी लग सकती है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली/वॉशिंगटन/मॉस्को | Updated: September 22, 2020 5:36 PM
coronavirus vaccine russia corona vaccineकई देशों में कोरोना वायरस की वैक्सीन के ट्रायल अंतिम चरण में हैं। (एपी फोटो)

दुनियाभर में कोरोनावायरस के बढ़ते असर के बीच बड़ी फार्मा कंपनियों ने वैक्सीन बनाने की कवायद भी तेज कर दी है। कई कंपनियां इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक वैक्सीन बाजार में उतारने का दावा कर रही हैं। हालांकि, अब तक इस रेस में सबसे आगे मानी जा रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका कंपनी की वैक्सीन पिछड़ गई है। अमेरिकी कंपनी Pfizer-बायोएनटेक साझा तौर पर अब वैक्सीन बनाने की दौड़ में सबसे आगे हैं। माना जा रहा है कि यह दोनों कंपनियां अक्टूबर तक वैक्सीन के प्रभावों का पता लगा लेंगी। इसके बाद अगर इसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाती, तो Pfizer की कोरोना वैक्सीन नवंबर या दिसंबर तक अमेरिका के बाजारों में उतर सकती है।

कोरोना वैक्सीन की रेस में अब दूसरे नंबर पर भी अमेरिकी कंपनी ही है। मॉडर्ना इस वक्त अपनी संभावित वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल में जुटी है। कंपनी को इसके प्रभाव के बारे में दिसंबर तक पता चलने की उम्मीद है। आपात मंजूरी के बाद यह वैक्सीन दिसंबर के अंत या जनवरी 2021 की शुरुआत तक मार्केट में आ सकती है।

क्यों पिछड़ी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन: इससे पहले कोरोना के खिलाफ सबसे असरदार और अहम मानी जा रही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका की संभावित वैक्सीन बाजार में आने में कुछ देरी लग सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ब्रिटेन में वैक्सीन लेने वाले एक व्यक्ति में कुछ बीमारी के लक्षण देखे गए थे, जिसके चलते ट्रायल्स को रोक दिया गया था। अब तक यह तो नहीं सिद्ध हुआ है कि वह लक्षण वैक्सीन की वजह से हुए थे या नहीं, पर इंग्लैंड और भारत में वैक्सीन के ट्रायल्स को जारी रखने की मंजूरी दे दी गई। माना जा रहा है कि इसी देरी की वजह से कोरोना वैक्सीन अगले साल की शुरुआत में ही बाजार में उतरेगी।

रूस और चीन की वैक्सीनों का हाल: बता दें कि रूस ने पिछले महीने ही अपनी वैक्सीन- स्पूतनिक-V का ऐलान कर पूरी दुनिया को चौंका चुका है। वहीं, चीन भी अपनी तीन वैक्सीन को देशवासियों को दे रहा है। हालांकि, जो जानकारी अब तक सामने आई है, उसके मुताबिक, दोनों ही देशों की वैक्सीन अब तक फेज-3 ट्रायल पूरा नहीं कर पाई हैं। चीन की सिर्फ एक वैक्सीन को यूएई में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा दुनियाभर में अभी 25 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल की स्टेज में हैं।

वैक्सीन की रेस में कहां है भारत?: भारत में इस वक्त सेरम इंस्टीट्यूट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन के ट्रायल कर रहा है। इसके अलावा सेरम इंस्टीट्यूट ही अमेरिकी फार्मा कंपनी नोवावैक्स के फेज-3 के ट्रायल भी कराएगी। दूसरी तरफ डॉक्टर रेड्डीज लैब को रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-V के ट्रायल की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, अब तक ट्रायल की तारीखें तय नहीं हुई हैं। दूसरी तरफ भारतीय कंपनियों में हैदराबाद की भारत बायोटेक ट्रायल में सबसे आगे हैं। इसके अलावा जायडस कैडिला भी फेज-2 के ट्रायल पूरे करने में जुटी है।

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