ताज़ा खबर
 

मोदी ‘विरोधी’ पोस्टर केसः अरेस्ट हुए 25 में कई लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी को तरसे; AAP बोली- सुना है, पोस्टर शेयर करने पर सिस्टम कांपने लगता है

एक रिक्शा चलाता है, जबकि एक अन्य बूढ़ा लकड़ी के फ्रेम बनाता है। वहीं, एक युवक की पढ़ाई बीच रास्ते में छूट गई है, किसी भी सियासतदान ने अब तक पोस्टर-बैनर लगवाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं ली।

जांच अधिकारी के मुताबिक अभी तक पोस्टर छापने और चिपकाने वालों की गिरफ्तारियां हुई हैं। जांच चल रही है और उन लोगों का पता किया जा रहा है जो पूरे मामले की जड़ में हैं। उसने कहा कि कम्प्लेंट्स मिलना जारी है। (फाइल फोटोः पीटीआई/टि्वटर-@AAP)

लॉकडाउन में दिहाड़ी से महरूम बेचारे दिल्ली के मजदूर। उनका कुसूर बस इतना-सा था कि उन्होंने चार पैसे की मजदूरी कर ली। उन्हें कतई नहीं पता था कि पोस्टर लगाना इतना बड़ा अपराध बन जाएगा कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने पोस्टरों पर लिखी इबारत शायद पढ़ी भी न हो। शायद पढ़ना आता ही न हो। अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लांछित करने वाले पोस्टर लगाते ही क्यों? पोस्टरों पर सवाल लिखा थाः मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दिया।

आप जानते ही हैं कि इन पोस्टरों को लगाने के आरोप में 25 लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें एक आदमी था 30 साल का रिक्शा ड्राइवर, 61 साल का बूढ़ा जो लकड़ी के फ्रेम बनाता था और तीसरा था 19 साल का लड़का, जिसकी पढ़ाई बीच रास्ते छूटी पड़ी है।

इंडियन एक्सप्रेस ने पड़ताल की कि गिरफ्तार हुए 25 लोगों में कितने दिहाड़ी मजदूर थे और कितने बेरोजगार युवक। एक्सप्रेस की टीम ने कई थानों में जाकर पूछताछ की और गिरफ्तार किए गए दो लोगों घर भी गई।

पूर्वी दिल्ली में मंडावली से गिरफ्तार किए गए राहुल त्यागी (24) को घर वाले जमानत कराके छुड़ा लाए हैं। उसने बताया कि 11 मई को आप के पार्षद धीरेंद्र कुमार के कर्मचारियों ने उसे बीस बैनर दिए थे। कहा था कि इन्हें कल्याणपुरी में लगा दो तो छह सौ रुपए मिलेंगे। पार्षद ने राहुल के आरोप से इनकार कर दिया। बोले, हम तो जनता के लिए काम करते हैं। लेकिन, शनिवार को इसी पार्षद ने वही इबारत ट्वीट कर दी जो पोस्टरों में लिखी हैः मोदी जी ….वैक्सीन…क्यों भेज दिया।

राहुल के साथ कल्यानपुरी से गिरफ्तार तीन अन्य युवकों को भी जमानत मिल गई है। राहुल कहता है कि उसके पिता अब काम नहीं करने देंगे। “ मैं तो दो जून की रोटी के लिए काम करता हूं।” उसने बताया कि उसके साथ राजीव कुमार (19), दिलीप तिवारी (35) और शिवम दुबे (24) भी पकड़े गए थे।

राहुल ने कहा कि उसको पोस्टर लगाने की मजदूरी तो मिली नहीं, पुलिस पोस्टरों के साथ मेरी बाइक भी ले गई जो अब तक थाने में खड़ी है। पुलिस का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान पोस्टर और बैनर नहीं लगाए जा सकते। पड़ोसियों के मुताबिक राहुल पोस्टर और बैनर लगाने का ही काम करता है। उसके पिता ऑटो चलाते हैं लेकिन लॉकडाउन की वजह से कुछ कमाई नहीं कर पा रहे हैं।

पुलिस ने ये तमाम गिरफ्तारियां अपने कर्मचारियों की कम्प्लेंट्स पर की है। एफआइआर आइपीसी की धारा 188 और 269 के तहत लिखी गई हैं। 188 मायने होता हैः सरकारी अफसर द्वारा जारी आदेश को न मानना और 269 मायने ऐसा काम करना कि महामारी फैले।

जांच अधिकारी के मुताबिक अभी तक पोस्टर छापने और चिपकाने वालों की गिरफ्तारियां हुई हैं। जांच चल रही है और उन लोगों का पता किया जा रहा है जो पूरे मामले की जड़ में हैं। उसने कहा कि कम्प्लेंट्स मिलना जारी है।

उधर, पश्चिम दिल्ली के कीर्ति नगर से गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम देविंदर कुमार (51), तिलक राज छाबड़ा (45), अनिल गुलाटी (61), मुरारी (61) और राकेश कुमार (42) है।

पुलिस का कहना है कि इनमें देविंदर कुमार ठेकेदार है। उसने पूरे काम का जिम्मा 15 हजार रुपए में लिया था। उसी ने राज छाबड़ा से संपर्क किया था। छाबड़ा प्रिंटिंग प्रेस चलाता है। इन लोगों ने फिर लकड़ी का काम करने वाले अनिल गुलाटी, आटो चालक मुरारी और राकेश से संपर्क किया। राकेश और मुरारी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर धरे गए, जिसमें वे कथित रूप से पोस्टर चिपकाते दिख रहे हैं।

मंगोलपुरी से गिरफ्तार राहुल, राजेश और अनिल की उम्र क्रमशः 26, 38, 30 साल है। पुलिस के मुताबिक राहुल सेल्स एजेंट है। उसको पोस्टर छापने का काम मिला था। छापने का काम राजेश ने अपने प्रिटिंग प्रेस में किया। ईरिक्शा चालक अनिल का कुसूर यह था कि इन लोगों ने उसे भाड़े पर लगा लिया था।

द्वारका में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद सुहैल (26), मोहम्मद अख्तर (24) को एक आदमी ने पोस्टर लगाने के लिए तीन सौ रुपए देने का वादा किया था। दोनों पोस्टर लगाते पकड़े गए थे। तिमारपुर में पकड़ा गया 24 साल तारकेश्वर जायसवाल ने लॉकडाउन में नौकरी खो दी थी। वह घंटाघर में बैठा था कि किसी ने आकर पोस्टर लगाने के बदले 500 रुपए का ऑफर दिया।

भजनपुरा, खजूरी खास और दयालपुर में तीन एफआइआर हुई हैं। तीनों के सिलसिले में संजय को पकड़ा गया है। संजय सिर्फ 19 साल का है। वह चार सौ रुपए के लिए यह काम कर रहा था।

बहरहाल, इतनी गिरफ्तारियों के बाद भी किसी भी पार्टी का नेता यह कहते हुए आगे नहीं आया है कि ये पोस्टर उसने लगवाए हैं, जबकि यह बात तो सब लोग जानते हैं कि इन मजदूर टाइप लोगों के दिमाग में मोदी या किसी के खिलाफ भी पोस्टर लगाने की बात सपने में भी नहीं आ सकती।

उधर, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP के टि्वटर हैंडल से वैक्सीन से जुड़े तीन पोस्टर के फोटो शेयर किए गए। साथ ही लिखा गया, ”
सुना है ये पोस्टर शेयर करने से पूरा सिस्टम कांपने लगता है…।”

Next Stories
1 कृषि कानूनः अगले मिशन पर बोले BKU के राकेश टिकैत- सरकार ने न सुनी बात तो UP चुनाव में भी BJP को हराएंगे
2 कोरोनाः जिसने खोजा उसका नाम-चेहरा तक पता नहीं, पर ‘वैक्सीन गुरु’ बताए जा रहे मोदी- टीके के टोटे के बीच रवीश कुमार का PM पर तंज
3 कोरोना टीकाः अदार के पिता साइरस पूनावाला भी पहुंचे लंदन, बोले- हम हर साल मई में गर्मी छुट्टी मनाने आते हैं
यह पढ़ा क्या?
X