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‘बैठाकर तो कोई खिलाएगा नहीं’, यूपी-एमपी और बिहार से लौटने लगे प्रवासी मजदूर, मुफ्त टिकट दे रहीं कंपनियां

भारती किसान यूनियन के अध्यक्ष जगसीर सिंह सीरा ने बताया कि 'ये कामगार यूपी के पीलीभीत और बिहार के मोतिहारी से यहां पहुंचे हैं। हमने इन्हें लाने के लिए बसों के इंतजाम पर कुल 1.85 लाख रुपए खर्च किए हैं।

migrant workersअनलॉक 1 की शुरुआत के साथ ही मजदूरों का काम पर वापस लौटना शुरू हो गया है।

कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का पलायन हुआ लेकिन अब जैसे जैसे सरकार लॉकडाउन में छूट दे रही है, वैसे ही कृषि, इंडस्ट्री में फिर से कामगारों की मांग बढ़ रही है। जिसके चलते तीन राज्यों में मजदूरों की वापसी हो रही है।

पंजाबः पंजाब में कृषि मजदूरों का लौटना शुरू हो गया है। वहीं इंडस्ट्रीज कामगारों को वापस लाने के लिए उन्हें मुफ्त टिकट का इंतजाम कर रहे हैं। पंजाब के बरनाला जिले में भारती किसान यूनियन (लाखोवाल) ने तो मजदूरों की वापसी के लिए दो बसों का इंतजाम किया है, जिसमें 40 मजदूर काम पर वापस लौटे हैं। मजदूरों के वापस लौटने पर किसानों ने मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।

भारती किसान यूनियन के अध्यक्ष जगसीर सिंह सीरा ने बताया कि ‘ये कामगार यूपी के पीलीभीत और बिहार के मोतिहारी से यहां पहुंचे हैं। हमने इन्हें लाने के लिए बसों के इंतजाम पर कुल 1.85 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसमें से आधे कामगारों द्वारा वहन किए जाएंगे।’ उन्होंने बताया कि ‘मजदूरों को वापस लाने के लिए पहले हमने जिलाधिकारी से इसकी इजाजत ली। इनके अलावा मजदूरों को लाने के लिए यूपी बिहार, 75 और बसें भेजी जाएंगी।’

मजदूरों को वापस लाकर उन्हें नियमों के मुताबिक क्वारंटीन किया गया है और उनका कोरोना टेस्ट भी कराया जाएगा। इसी तरह बाहादुरके डाईंग एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण बावा जैन ने बताया कि ‘हमारे यहां विभिन्न यूनिट्स में 40 हजार लोग काम करते हैं लेकिन अभी हमारे पास 10 हजार लोग भी नहीं हैं। हमने ठेकेदारों को कहा है कि अगर मजदूर आना चाहते हैं तो हम उनके वापस आने का इंतजाम कर देंगे।’ उन्होंने कहा कि मजदूर भी वापस आना चाहते हैं और हमें उम्मीद है कि अगले 10 दिनों में वे काम पर वापस लौट आएंगे।

मध्य प्रदेशः मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के करीब 4500 मजदूर गुजरात के 14 अलग अलग जिलों में काम करते हैं। बीते कुछ दिनों में झाबुआ से मजदूर वापस गुजरात पहुंच रहे हैं। कई नियोक्ताओं ने मजदूरों की वापसी की टिकट का इंतजाम किया है।

झाबुआ के जिलाधिकारी का कहना है कि जो मजदूर गुजरात लौटे हैं, वो स्किल्ड कामगार हैं और वह मनरेगा से ज्यादा वहां कमाते हैं। जिले में करीब एक लाख लोगों को मनरेगा के तहत काम मुहैया कराया गया था लेकिन कई ये काम नहीं करना चाहते। मध्य प्रदेश के कई जिलों की तरह झाबुआ के मजदूरों की गुजरात में निर्माण कार्यों में अच्छी खासी मांग है, जहां उन्हें पैसे भी ठीक ठाक मिलते हैं।

बिहारः बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से करीब 100 मजदूर पंजाब और मथुरा के स्टील प्लांट में काम करने के लिए लौट गए हैं। राकेश यादव नामक कामगार, जो कि लुधियाना में काम करता है, उसने बताया कि अब धान बुवाई का समय है। बिहार में हमें ज्यादा लंबे समय तक काम नहीं मिल सकता। स्थानीय लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स भी बड़ी संख्या में बसों में मजदूरों को देश के अन्य स्थानों पर काम के लिए लेकर जा रहे हैं।

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