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COVID-19 पीड़ितों के मददगार बने IYC के श्रीनिवास के कंट्रोल रूम में हमेशा रहते हैं 100 कार्यकर्ता, जानें- कैसे पहुंचाते हैं मदद?

आश्ना भूटानी की रिपोर्ट। कोरोना संकट की दूसरी लहर के बीच देश भर से कोरोना मरीज और उनके परिजन ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैशटैग #SOSIYC और @srinivasiyc लिखकर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

Edited By अजय शुक्ला नई दिल्ली | Updated: May 8, 2021 1:36 PM
श्रीनिवास कंट्रोल रूम से बिल्कुल लगे हुए कमरे में रह कर काम करते हैं। उन्हें जैसे ही रिक्वेस्ट्स मिलती हैं, वह दिल्ली में तैनात काम करने वाले वालंटियर्स से जुड़ जाते हैं। (सभी तस्वीरेंः पीटीआई)

क्या आप जानते हैं कि ट्विटर पर बीते डेढ़-दो महीने में सबसे ज्याद बार कौन सा शब्द लिखा गया है?

नहीं? चलिए बता देते हैं, वह शब्द है @srinivasiyc, जो कि ट्विटर हैंडिल है य़ूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास का। श्रीनिवास दो महीने से कोरोना पीड़ितों को अस्पताल, बेड, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं जुटाने में लगे रहते हैं। पूरे देश में। यह कैसे होता है। आइए दिल्ली का काम देखते हैं। यूथ कांग्रेस के रायसीना हिल स्थित ऑफिस में टेलीफोनों की घंटियां बंद होने का नाम नही लेती। दस वालंटियर जुटे हैं काम में। हर एक की जिम्मेदारी तय है। कुछ ट्विटर में #SOSIYC हैशटैग के साथ टैग किया गया@srinivasiyc खोजते हैं। इन दो शब्दों का मतलब हुआ कि कहीं किसी कोरोना मरीज या तीमारदार को मदद की ज़रूरत है। SOS यानी त्राहिमाम और IYC मायने इंडियन यूथ कांग्रेस।

ट्विटर पर लगे ये लोग बड़ी जल्दी से ट्वीट्स यानी लोगों को जरूरतों के मुताबिक छांटते हैं। किसको दवा चाहिए किसको बेड और किसको ऑक्सीजन। छंटाई के बाद इन मदद की इन रिक्वेस्ट्स को वे अपने सीनियर्स के पास भेज देते हैं। उधर, दूसरी ओर एक समूह डेल्ही कोरोना ऐप को रीफ्रेश करके अस्पतालों में खाली बेड्स की स्थिति पता करते रहते हैं।

कंट्रोल रूम में जुटे सभी वालंटियर या तो कंप्यूटर पर कुछ करने में लगे हैं या फोन पर। कई वालंटियर तो दोनों पर एक साथ काम कर रहे हैं। समय कम है। मदद के अनुरोध बहुत ज्यादा। सब की मदद नहीं हो सकती। सो, ये वालंटियर संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर उन लोगों को चुनते हैं जिनकी स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर होती है। इतना करके चुनी हुई रिक्वेस्ट्स को श्रीनिवास और यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय कनवीर मनु जैन को फारवर्ड कर देते हैं।

श्रीनिवास कंट्रोल रूम के बगल वाले कमरे में ही रह कर काम करते हैं। उन्हें जैसे ही रिक्वेस्ट्स मिलती हैं वे दिल्ली में फैले जमीन पर काम करने वाले वालंटियर्स से जुड़ जाते हैं। दिल्ली में ऐसे सौ वालंटियर हैं। हर वालंटियर के जिम्मे दिल्ली का एक जिला है। इधर, कंट्रोल रूम सक्रिय है…27 साल के करुण पासवान दिल्ली के अस्पतालों के बेड पर नजर है। वे एक जिले के जमीनी वालंटियर से बात करते हैं और चेक करते हैं कि सरकारी वेबसाइट में खाली दिख रहा बेड सचमुच खाली है या नहीं। उधर, प्रियंका सरसार ट्विटर को स्क्रॉल कने में लगी हैं। वे चेक कर रही हैं कि लगातार आ रही बेड की कितनी रिक्वेस्ट्स को पूरा किया जा सकता है।

जैसा कि ऊपर बताया है ये वालंटियर मदद की गुहार को कई हिस्सों मसलन, आइसीयू बेड, ऑक्सीजन बेड, सिलिंडर, प्लाज्मा, दवा, डाक्टर और अंत्येष्टि आदि कोटियों में बांट देते हैं।

प्रियंका को अचानक एक ट्वीट दिखती है जिसमें निम्न आय वर्ग के दो लोगों को मदद मांग रहे हैं। एक अस्पताल का बिल भरने में असमर्थ है तो दूसरे के पास अपने संबंधी के अंतिम संस्कार के लिए कोई भी मौजूद नहीं। इन दोनों की रिक्वेस्ट्स के स्क्रीनशॉट्स लिए जाते हैं और श्रीनिवास, मनु और जमीन पर काम कर रहे वालंटियर्स के पास भेज दिए जाते हैं।

वालंटियर्स की सेवा भावना स्पर्हनीय हैय़ प्रियंका खुद कोविड से बीमार रही हैं और ठीक होने पर फिर सेवा में जुट गई हैं। श्रीनिवास और जैन के मुताबिक इन दिनों अंत्येष्टि में मदद की अपील ज्यादा आने लगी हैं। ऐसी मौते भी हैं जिसमें फैमिली के बाकी सभी लोग बीमार हैं। ऐसे लोगों के लिए हमे या वालंटियर्स को घाट पर जाकर सारा प्रबंध करना पड़ता है। ऐसी ही एक अपील बेंगलुरू से एक आदमी ने की थी। उसकी मा की दिल्ली में मौत हो गई थी और पिता कोविड से बीमार होकर आइसीयू में पड़ा था।

श्रीनिवास बताते हैं कि हम चाह कर भी हर आदमी की मदद नहीं कर पाते। कई बार हम मदद करते हैं लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी होती है कि मरीज दम तोड़ चुका होता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के अलावा भी उनकी टीम पूरे देश में काम कर रही है। दिल्ली से बाहर सेवा के काम में जुटे वालंटियर्स की संख्या एक हजार है।

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