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क्या आ चुका है कोरोना की दूसरी लहर का पीक? केस कम हुए लेकिन जल्द नहीं खत्म होगा संकट

पिछले महीने में तेजी से बढ़ते कोरोना मामलो के बीच पिछले एक सप्ताह में नए मामलों की दैनिक गिनती में गिरावट आई है। हालांकि दूसरी लहर को खत्म होने में समय लग सकता है ।

देश में कोरोना की दूसरी लहर को थमने में समय लग सकता है। (एक्सप्रेस फोटो)।

पिछले दो हफ्तों में भारत में कोरोना वायरस मामले यह संकेत दे रहे हैं कि संक्रमण की दूसरी लहर पीक पर पहुंच गई है, या अगले कुछ दिनों में पीक पर पहुंच जाएगी। हालांकि दूसरी लहर को खत्म होने में समय लग सकता है । पिछले गुरुवार को 4.14 लाख मामले सामने आये थे ,जबकि पिछले एक सप्ताह में कोरोना के दैनिक मामलों में कमी देखी गयी है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। 30 अप्रैल को पहली बार चार लाख का आंकड़ा पार करने के बाद, मामलों में कमी आई थी। बाद में फिर से मामलों में उछाल देखा गया । लेकिन नई बात यह है कि रोज उतार-चढ़ाव के हिसाब से देखा जाए तो पिछले सात दिन का औसत पहली बार दूसरी लहर के दौरान घटा है। सात दिन का औसत 8 मई को 3.91 लाख पर पहुंच गया, और उसके बाद गिरावट शुरू हो गई है। बुधवार को यह औसत घटकर 3.75 लाख पर आ गया था।

अधिक कोरोना मामले आने वाले राज्यों में दिख रही है गिरावट: महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहाँ शुरुआत से ही लगातार सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। एक समय में महाराष्ट्र से 60% से अधिक मामले आ रहे थे, अब उसमें गिरावट दर्ज है। अब तीन सप्ताह से अधिक समय हो गया है जब राज्य से 68,631 से अधिक मामले नहीं आए हैं । राज्य की दैनिक मामलों की संख्या घटकर 40,000 हो गई है। वहीं कर्नाटक और केरल में अधिक मामले दर्ज किये गए।

उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी उम्मीद की किरण नज़र आ रही है। जहां जनसँख्या अधिक होने के कारण महाराष्ट्र से भी अधिक मामले दर्ज करने की संभावना है और पिछले महीने के अंत में इसकी दैनिक मामले की संख्या में तेजी भी दर्ज गई थी। हालाँकि एक सप्ताह से अधिक समय से, अब राज्य की दैनिक संख्या 30,000 से नीचे बनी हुई है, और गिरावट के संकेत दे रही है।

महाराष्ट्र की तरह, दिल्ली भी पीक पर पहुंच गई है, और वहाँ भी मामले कम आ रहे हैं। पिछले कुछ समय से दिल्ली में 20,000 से अधिक मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 12,000 से भी कम हो गयी है। हालांकि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। तमिलनाडु में मामले 30,000 पार कर गए है, जबकि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल से 20,000 से अधिक मामले सामने आए हैं।

देश भर में एक्टिव मामलों की संख्या: दो महीने में पहली बार एक्टिव मामलों की संख्या में सोमवार और मंगलवार को गिरावट देखी गई। अप्रैल के अंत तक एक्टिव मामले हर दिन लगभग एक लाख बढ़ रहे थे। पिछले कुछ दिनों में एक्टिव मामलों में एक दिन में 10,000 से भी कम की वृद्धि हुई है। अब जबकि पिछले दो सप्ताह से रोज आने वाली मामलों की संख्या कमोबेश स्थिर बनी हुई है। वही ठीक होने वालों की संख्या मामले की संख्या के समान स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार तक देश में 37.1 लाख एक्टिव केस थे ।

संक्रमण की दर: दूसरी लहर में ये देखा गया है कि इसमें संक्रमण की दर बहुत तेज है । जिन लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है , उनमें से लोग पहली लहर की तुलना में अधिक संक्रमित हो रहे हैं। पहली लहर के दौरान भारत में संक्रमण की दर 5% से 6% के बीच थी, जबकि दूसरी लहर में संक्रमण की दर 20% से अधिक हो गई है।
कुछ राज्यों में यह 40% से भी आगे निकल गया। तेजी से बढ़ते संक्रमण दर के कई कारक हो सकते है, जैसे नए म्यूटेंट तेजी से संक्रमित हो रहे हैं, या शारीरिक दूरी के नियमों को छोड़ दिया गया है, जिससे वायरस तेजी से अपनी गिरफ़्त बना रहा है।

मृत्यु दर: पिछले 45 दिनों में मौतों की दैनिक संख्या में दस गुना वृद्धि हुई है। लेकिन जैसा कि पिछले दो हफ्तों में केस स्थिर हुए है लेकिन मौतों की संख्या में और वृद्धि हो रही है। संकेत है कि मामलों में गिरावट आने से पहले मौतें कुछ दिनों तक बढ़ सकती हैं। अब तक, हर दिन लगभग 4,000 मौतें हो रही हैं।

लेकिन जल्द नहीं खत्म होगा संकट: इन आकंड़ों से केवल आशा की एक किरण देखी जा सकती है, महामारी की इस दूसरी लहर से उबरने में अभी वक़्त लगेगा। पहली लहर के दौरान मामलों को 98,000 प्रति दिन से कम करके लगभग 10,000 प्रति दिन होने में पांच महीने का समय लगा था। प्रतिदिन बढ़ते – घटते मामलों के बीच यह भी पता नहीं है कि भारत में मामले पीक पर पहुंच गए हैं या नहीं।

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