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COVID-19: भारत में केस 2 करोड़ के पार, 24 घंटे में 3400 मौतें, बोले राहुल- लॉकडाउन ही 1 मात्र विकल्प; फाउची की सलाह- सेना की लें मदद

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के मुताबिक, तीन मई तक 29,33,10,779 नमूनों की जांच की गई जिनमें से 16,63,742 नमूनों की जांच सोमवार को की गई।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: May 4, 2021 11:52 AM
Coronavirus, COVID-19 Deaths, National Newsनई दिल्ली स्थित क्रिश्चियन सिमेट्री में सोमवार को कोरोना से मरने वाले अपने परिजन की अंत्येष्टि के दौरान लोग। (फोटोः पीटीआई)

भारत में कोविड-19 के मामले दो करोड़ का आंकड़ा पार कर गए हैं और महज 15 दिनों में संक्रमण के 50 लाख से अधिक मामले आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस के एक दिन में 3,57,229 नए मामले आने से संक्रमण के मामले बढ़कर 2,02,82,833 पर पहुंच गए जबकि 3,449 और लोगों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या 2,22,408 पर पहुंच गई है।

भारत में कोविड-19 के मामले 19 दिसंबर को एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गए थे जिसके 107 दिन बाद पांच अप्रैल को संक्रमण के मामले 1.25 करोड़ पर पहुंच गए। हालांकि महामारी के मामलों को 1.50 करोड़ का आंकड़ा पार करने में महज 15 दिन लगे। सुबह आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 34,47,133 हो गई है जो संक्रमण के कुल मामलों का 17 प्रतिशत है। कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की दर 81.91 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमारी से उबरने वाले मरीजों की संख्या 1,66,13,292 पर पहुंच गई है जबकि मृत्यु दर 1.10 प्रतिशत है। भारत में कोविड-19 के मामले सात अगस्त को 20 लाख का आंकड़ा पार कर गए थे। इसके बाद संक्रमण के मामले 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के पार चले गए थे।

वैश्विक महामारी के मामले 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख और 19 दिसंबर को एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गए थे। भारत में महामारी के मामले 19 अप्रैल को 1.50 करोड़ के पार चले गए थे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के मुताबिक, तीन मई तक 29,33,10,779 नमूनों की जांच की गई जिनमें से 16,63,742 नमूनों की जांच सोमवार को की गई। कोरोना वायरस से जिन 3,449 और लोगों ने जान गंवाई है उनमें से 567 लोगों की मौत महाराष्ट्र में, 448 की दिल्ली, 285 की उत्तर प्रदेश, 266 की छत्तीसगढ़, 239 की कर्नाटक, 155 की पंजाब और 154 लोगों की मौत राजस्थान में हुई। गुजरात और हरियाणा में 140-140 लोगों की मौत हुई, झारखंड में 129, उत्तराखंड में 128 और तमिलनाडु में 122 लोगों की मौत हुई।

देश में अभी तक इस संक्रामक रोग से 2,22,408 लोगों की मौत हुई है। इनमें से महाराष्ट्र में 70,851, दिल्ली में 17,414, कर्नाटक में 16,250, तमिलनाडु में 14,468, उत्तर प्रदेश में 13,447, पश्चिम बंगाल में 11,637, पंजाब में 9,472 और छत्तीसगढ़ में 9,275 लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से 70 प्रतिशत से अधिक लोगों को पहले से अन्य बीमारियां भी थीं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमारे आंकड़ों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के आंकड़ों से मिलान किया जा रहा है।’’

उधर, अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ और व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने भारत में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताते हुए सलाह दी कि भारत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू किया जाना चाहिए, व्यापक स्तर पर टीकाकरण मुहिम चलाई जानी चाहिए और बड़ी संख्या में अस्थायी अस्पताल बनाए जाने चाहिए। दुनिया में संक्रामक रोग के शीर्ष विशेषज्ञों में से एक माने जाने वाले डॉ. फाउची ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार के दौरान भारत को महामारी से निपटने में सैन्य बलों की मदद लेने की भी सलाह दी। उन्होंने सलाह दी कि तत्काल अस्थायी अस्पताल बनाने के लिए सशस्त्र बलों की सहायता ली जा सकती है।

डॉ. फाउची ने कहा, ‘‘चीन में जब पिछले साल गंभीर समस्या थी, तो उसने अपनी संसाधनों को बहुत तेजी से नए अस्पताल बनाने में जुटा दिया था, ताकि वह उन सभी लोगों को अस्पताल मुहैया करा सके, जिन्हें भर्ती किए जाने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अस्पताल में बिस्तरों की गंभीर कमी है और अस्थायी व्यवस्थाओं में लोगों की देखभाल की जा रही है। डॉ. फाउची ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी सेना की मदद से उसी तरह फील्ड अस्पताल बनाने चाहिए, जैसे कि युद्ध के दौरान बनाए जाते हैं, ताकि उन लोगों को अस्पताल में बिस्तर मिल सके, जो बीमार हैं और जिन्हें भर्ती किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार संभवत: यह पहले ही कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह साफ है कि भारत में हालात बेहद गंभीर हैं।’’ डॉ. फाउची ने कहा, ‘‘जब लोग इतनी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे हों, हर किसी की पर्याप्त देखभाल न हो पा रही हो, अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सामान की कमी हो, तो यह बेहद निराशाजनक स्थिति बन जाती है। इसे देखते हुए हमें लगता है कि पूरी दुनिया को हरंसभव तरीके से मदद करनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी चीजें है जो भारत तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घ अवधि में कर सकता है। डॉ. फाउची ने कहा, ‘‘सबसे पहले अभी उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाना शुरू करना चाहिए, चाहे वे उनके द्वारा विकसित टीके हों या रूस और अमेरिका जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे गए टीके हों ।’’

उन्होंने कहा कि हालांकि अभी टीका लगाने से आज पैदा हुई समस्या खत्म नहीं होगी। इससे कई हफ्तों में समस्या को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने तत्काल उठाए जा सकने वाले कदमों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मुझे पता है कि भारत पहले ही कई कदम उठा रहा है, तो मैं आपको ऐसा कुछ नहीं बता रहा हूं, जो आप पहले से नहीं कर रहे। कुछ दिनों पहले मैंने सुझाव दिया था कि देश में लॉकडाउन लागू करना चाहिए और भारत के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन लागू किया गया है।’’ डॉ. फाउची ने कहा, ‘‘चीन ने पिछले साल ऐसा किया था, ऑस्ट्रेलिया में जब संक्रमण फैला था, उसने ऐसा किया था, न्यूजीलैंड ने यह किया था, अन्य कई देशों ने एक सीमित अवधि के लिए पूर्ण लॉकडाउन लागू किया था। आपको छह महीने के लॉकडाउन की आवश्यकता नहीं है। आप कुछ सप्ताह के लिए लॉकडाउन लागू कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अन्य देशों में लॉकडाउन लागू करने के अनुभवों से यह स्पष्ट है कि लॉकडाउन से संक्रमण की दर कम होती है और संक्रमण की निरंतरता टूटती है।’’

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