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‘कोरोना पर हालात दुखद’, सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी पर बोला SC; दिल्ली समेत 5 राज्य सरकारों को थमाया नोटिस

टॉप कोर्ट ने इसके अलावा दिल्ली स्थित Lok Nayak Jai Prakash Hospital को नोटिस जारी किया, जहां से कोरोना मरीजों के शवों को बुरी तरह लाने-ले-जाने से जुड़े विजुअल्स हाल में सामने आए थे।

COVID-19, Coronavirus, SC, Supreme Courtनई दिल्ली में कोरोना से मौत के बाद मृतक का शव पीपीई किट पहनकर स्वास्थ्यकर्मचारियों के साथ दफनाते परिजन। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना वायरस के फैलाव को काबू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तहत दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु की सरकारों को नोटिस जारी किए। बेंच ने कहा- “मीडिया रिपोर्टों ने दिल्ली और कुछ अन्य राज्यों में कोरोना रोगियों की देखभाल के मामलों में खेदजनक स्थिति दिखाई है।”

कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन राज्यों के चीफ सेक्रेट्री सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की देखभाल और हालत को लेकर तत्काल संज्ञान लें। कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इस बाबत अपनी रिपोर्ट सौंपे। अब मामले पर अगली सुनवाई 17 जून को होगी।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह वाली तीन सदस्यीय बेंच ने “In Re Proper Treatment Of COVID-19 Patients And Dignified Handling Of Dead Bodies In The Hospitals, Etc.” पर यह फैसला लिया। टॉप कोर्ट ने इसके अलावा दिल्ली स्थित Lok Nayak Jai Prakash Hospital को नोटिस जारी किया, जहां से कोरोना मरीजों के शवों को बुरी तरह लाने-ले-जाने से जुड़े विजुअल्स हाल में सामने आए थे।

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सुनवाई के दौरान बेंच ने आगे दिल्ली में कोरोना की कम जांच को लेकर चिंता जाहिर की। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा- मई के मुकाबले राजधानी में कोरोना की कम जांच हुई है। दिन-ब-दिन कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं, जबकि जांच कम हो गई है। ऐसे में हमारी दिल्ली से अपील है कि वह टेस्टिंग की संख्या बढ़ाए और जिन्हें कोरोना जांच की जरूरत है, उससे उन्हें मना न किया जाए।

बेंच ने कोरोना संक्रमण से मरने वालों की लाशों के साथ किए गए ‘भयावह व्यवहार’ पर कहा- इंडिया टीवी ने 19 जून को एक रिपोर्ट दिखाई थी, जिसमें कोरोना मरीजों की बदहाल स्थिति को वीडियो में दर्शाया गया था। क्लिप में अस्पताल की लॉबी, वेटिंग एरिया और वॉर्ड्स में लाशें पड़ी थीं…ये सरकारी अस्पताल का हाल है।

कोर्ट के अनुसार, दिल्ली में हालत बेहद लोमहर्षक और दयनीय है। न्यायालय ने दिल्ली की स्थिति पर विचार करते हुये कहा कि सरकारी ऐप के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 5,814 बिस्तर हैं जिनमें से 2,620 बिस्तरों पर मरीज हैं।

बकौल बेंच ,‘‘रिपोर्ट से पता चलता है कि कोविड-19 से संक्रमित मरीज अस्पतालों में भर्ती होने के लिये यहां से वहां चक्कर लगा रहे हैं जबकि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में बिस्तर खाली हैं। सरकारी कोविड अस्पतालों में बड़ी संख्या में बिस्तर खाली हैं जबकि कोविड-19 के संदिग्ध मरीजे किसी भी अस्पताल में भर्ती होने के लिये यहां वहां दौड़ रहे हैं। यह दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के कुप्रबंध को दर्शाता है।’’

आदेश में आगे कहा गया है, ‘‘मरीजों की दयनीय स्थिति और उनकी कथित देखभाल तथा इलाज को देखकर न्यायालय को बहुत दुख हुआ है। सरकार, जिस पर अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की देखभाल का दायित्व है वह, अपनी जिम्मेदारी से यह कह कर नहीं बच सकती कि सरकारी अस्पतालों सहित सारे अस्पतालों को कोविड-19 के मरीजों को देखना होगा।’’

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