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लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों को कहीं मिल रही चिकेन बिरयानी, कहीं पूड़ी-सब्जी और फल, जानें- शेल्टर होम में किस राज्य में थाली में क्या परोसा जा रहा?

Coronavirus in India: रोजगार ना होने के लिए चलते लाखों-करोड़ों मजदूरों को आजिविका चलाने के लिए खासी मुश्किलों को सामना करना पड़ा है। ऐसे में विभिन्न राज्य सरकारों ने प्रवासियों मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था की है ताकि कोई भूखा ना रहे हैं।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | Published on: April 26, 2020 8:27 AM
लॉकडाउन के चलते अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजूदरों को सरकार द्वारा अलग-अलग आहार दिया जा रहा है।

Coronavirus in India: देश में घातक कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लोगों से अपील करते हुए कहा है कि सभी अपने घरों में ही रहें और बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें। हाालंकि लॉकडाउन के बीच प्रवासियों मजदूरों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रोजगार ना होने के लिए चलते लाखों-करोड़ों मजदूरों को आजिविका चलाने के लिए खासी मुश्किलों को सामना करना पड़ा है। ऐसे में विभिन्न राज्य सरकारों ने प्रवासियों मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था की है ताकि कोई भूखा ना रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में गरीब, मजदूरों और प्रवासियों को अलग-अलग तरह के भोजन की व्यवस्था की गई है। ऐसे में हम आपकों देश में उन राज्यों के बारे में जानकारी देंगे कि किस राज्य में लोगों के लिए क्या परोसा जा रहा है।

कोच्चि, केरल
प्रदेश सरकार लगातार कोशिश में जुटी है कोई भूखा ना रहे। लॉकडाउन के चलते बिहार के मधुबनी से आए पिंटू कुमार ठाकुर (36) यहीं रुके हुए हैं। कोच्चि के सरकारी उच्चतर माध्यमिक बालिका विद्यालय में बनाया शेल्टर होम फिलहाल उनका आशियाना है। सैकड़ों प्रवासी मजदूर भी स्कूल में उन्हीं के साथ ठहरे हैं। यहां पहुंचे द इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार विष्णु वर्मा के मुताबिक 21 अप्रैल की सुबह साढ़े सात बजे लोगों को एक कप ब्लैक टी दी गई। नौ बजे चना-मूंग वाली खिचड़ी दी गई।

दोपहर एक बजे सांबर और बीन्स के साथ चावल दिया गया। शाम चार बजे भी एक कप ब्लैक टी और साथ में दो बिस्किट। शाम 7 बजे सांबर और सब्जियों के साथ चावल। इसी बीच दो बच्चों के एक पिता ने बताया कि त्योहारों पर मेन्यू बदल जाता है। विशु (14 अप्रैल, 2020, केरल में मनाया जाने वाला त्योहार) को मजदूरों के लिए शाकाहारी दावत का विशेष इंतजाम किया गया। इसी तरह ईस्टर पर चिकेन बिरयानी परोसी गई।

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पुलवामा, जम्मू-कश्मीर
बिहार के सीवान से आए प्रवासी मजूदर शेख इमाम हुसैन (43) कहते हैं, ‘मैं साल में ज्यादातर कश्मीर में रहता हूं, मुझे यहां मटन करी बहुत पसंद है। इन दिनों में इस तरह को भोजन को बहुत मिस कर रहा हूं।’ हुसैन काकापोरा में स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल में ठहरे हैं। पत्रकार आदिल अखजर (ADIL AKHZER) बताते हैं कि यहां ठहरे लोगों को 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे एक कप चाय दो बिस्किट दिए गए। सुबह साढ़े ग्यारह बजे चावल और सोया चंक्स करी दी गई। शाम को फिर एक कप चाय और दो बिस्किट दिए गए। रात के खाने में चिकेन करी और चावल दिया गया।

पंचकुला, हरियाणा
पंचकुला के सेक्टर 20 में सरकारी स्कूल में बनाए शेल्टर होम के बारे में पत्रकार पल्लवी सिंघल बताती हैं कि 22 अप्रैल सुबह साढ़े छह बजे लोगों को एक कप चाय और दाल-चावल दिए गए। इसके बाद शाम को साढ़े छह बजे रोटी-आलू और टमाटर की रस वाली सब्जी दी गई।

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दिल्ली
पत्रकार अंकिता द्विवेदी जोहरी के मुताबिक प्रवासी मजदूरों के लिए नई दिल्ली के यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बनाए शेल्टर में सुबह सात बजे चाय के साथ दो बिस्किट और पापे दिए गए। सुबह आठ बजे दो फल और दोपहर को दाल-चावल रोटी दी गई। शाम को सात बजे पूरी और आलू की रस वाली सब्जी दी गई।

मुंबई, महाराष्ट्र
पत्रकार इरम सिद्दीकी गिरगांव चौपाटी में बनाए एक शेल्टर होम के बारे में बताती है कि 22 अप्रैल की सुबह 11 बजे लोगों को एक ब्लैक टी और एक बिस्किट का पैकेट दिया गया। इसके बाद शाम को सात बजे चना दाल और सब्जी व दाल खिचड़ दी गई।

सूरत, गुजरात
कमाल सैयद सूरत बताते हैं कि प्रदेश में प्रवासी मजदूर शहर में सुमन हाई स्कूल में बनाए शेल्टर होम में ठहरे हैं। 22 अप्रैल को सुबह नौ बजे यहां ठहरे लोगों को एक कप चाय के साथ दो बिस्किट दिए गए। दोपहर को आलू की सब्जी, चार पूरी और एक चपाती दी गई। शाम सात बजे मसाला खिचड़ी दी गई।

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