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केंद्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते पर रोक लगाने का पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने किया विरोध, बोले- ‘सख्त होने का ये समय नहीं’

केंद्र सरकार ने हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्तों और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत पर जुलाई 2021 तक रोक लगाई है। सरकार के इस निर्णय पर पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए असहमति जताई है।

केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर सरकार ने रोक लगाई, मनमोहन बोले- इसकी जरुरत नहीं। (indian express)

जहां पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है वहीं सरकार ने केंद्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते पर रोक लगाने का मन बनाया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्तों और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत पर जुलाई 2021 तक रोक लगाई है। सरकार के इस निर्णय पर पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए असहमति जताई है। डॉक्टर मनमोहन सिंह के कहा है कि ऐसा करने का यह सही समय नहीं है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है। कांग्रेस की ओर से जारी पार्टी के सलाहकार समूह की बैठक के वीडियो के मुताबिक सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस वक्त इन सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के साथ खड़े रहना है। सिंह हाल ही में गठित कांग्रेस सलाहकार समूह के अध्यक्ष हैं।

इस समूह की बैठक एक दिन के अंतराल पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होती है। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें उन लोगों के साथ खड़े होना है जिनके भत्ते काटे जा रहे हैं। मेरा मानना है कि इस वक्त सरकारी कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के लोगों के लिए मुश्किल पैदा करने की जरूरत नहीं थी।’’

बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ तो सेंट्रेल विस्टा परियोजना पर पैसे खर्च हो रहे हैं और दूसरी तरफ मध्य वर्ग से पैसे लिए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह पैसा गरीबों को दिया जा रहा है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि सरकार को कर्मचारियों को भत्ते कम करने के बजाय सरकार को सेंट्रल विस्टा परियोजना और दूसरे गैरजरूरी खर्च रोकने चाहिए।

इसके अलावा सरकार ने गुरुवार को भी मंत्रालयों और विभागों में होने वाले कई तरह के सरकारी खर्च पर भी पाबंदी लगाई थी। इसका असर करीब 1.13 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। सरकार का यह फैसला कोरोना वायरस महामारी के चलते लिया गया है, जिसकी वजह से सरकारी राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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सरकार के फैसले के मुताबिक केंद्रीय कर्मियों को पहली तिमाही में वेतन तो मिलेगा, लेकिन एलटीए, पदोन्नति की बकाया राशि्, अग्रिम भुगतान, छुट्टियों का भुगतान एवं दूसरे भत्ते आदि पर रोक रहेगी। कार्यालय के खर्च के लिए भी कोई बजट नहीं मिलेगा। नॉन हेड सेलरी में ओटीए, एफटीई, विभाग के छोटे काम और आईटी से जुड़े किसी भी काम के लिए कुछ खर्च करना है, तो उसके लिए मुख्यालय से इजाजत लेनी पड़ेगी। पहली तिमाही के दौरान कोई भी पुराना बिल पास नहीं होगा। साथ ही नए बिलों पर भी रोक रहेगी। घरेलू यात्रा खर्च आदि पर भी पाबंदी लगाई गई है।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया है, ”कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते में एक जनवरी 2020 से मिलने वाली किस्त को रोकने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही एक जुलाई 2020 से और एक जनवरी 2021 में दी जाने वाली महंगाई भत्ते की अगली किस्त के भुगतान पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

इससे पहले भारत सरकार ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सांसद, मंत्रियों की सैलरी में तीस फीसदी तक की कटौती का ऐलान किया था। इतना ही नहीं, सांसद निधि फंड को भी दो साल के लिए निरस्त कर दिया गया था।

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