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गांवों पर आफत बनकर टूटा कोरोना! जानें- संक्रमण से कैसे निपटने को क्या कहती हैं केंद्र की गाइडलाइंस

गाइडलाइंस में बताया गया है कि संदिग्ध और संक्रमित व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए। इन मामलों के लिए गांव की स्वास्थ्य स्वच्छता समिति की मदद से निगरानी की जाएगी।

असम के माजुली में कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लेता एक स्वास्थ्यकर्मी (फोटो- PTI)

भारत में कोरोना का कहर लगातार बढ़ रहा है। दूसरी लहर में गांव में भी इसका असर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से रविवार को ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुए गाइडलाइंस जारी की गयी है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि अब धीरे-धीरे पेरी -अर्बन, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी कोरोना का फैलाव देखा जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि उप केंद्रों या स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रैपिड एंटीजन जांच किट्स उपलब्ध होनी चाहिए। सरकार की तरफ से जारी एसओपी में कहा गया है कि कोविड देखभाल केंद्र किसी संदिग्ध या संक्रमित व्यक्ति को भर्ती कर सकते हैं लेकिन उनके लिए अलग जगह और साथ ही उनके प्रवेश तथा निकासी के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

गाइडलाइंस में बताया गया है कि संदिग्ध और संक्रमित व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए। इन मामलों के लिए गांव की स्वास्थ्य स्वच्छता समिति की मदद से निगरानी की जाएगी। जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि कोविड-19 के 80-85 प्रतिशत मामले हल्के लक्षण वाले होते हैं। इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत नहीं होती है। इनका घर पर या कोविड देखभाल केंद्रों में ही इलाज किया जा सकता है।

आशा, आंगनवाड़ी कर्मियों तथा गांव के स्वयंसेवकों की मदद से संक्रमित लोगों को प्लस ऑक्सीमीटर तथा थर्मामीटर मुहैया कराने की बात कही गयी है। सरकार ने आदिवासी इलाकों में लोगों के दूर-दूर रहने और चिकित्सा व अन्य सुविधाओं की उपलब्धता की कमी को देखते हुए मोबाइल कोविड वाहन चलाने का निर्देश दिया है। ऐसे वाहनों में कोरोना जांच से लेकर शुरुआती इलाज के लिए जरूरी दवाओं की किट भी होगी। टेस्ट में संक्रमित पाए जाने पर लोगों को दवाओं की किट दी जाएगी।

मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों से जुड़े इलाकों, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में तीन स्तरीय व्यवस्था होनी चाहिए यानी हल्के या बिना लक्षण वाले मरीजों से निपटने के लिए कोविड देखभाल केंद्र, मध्यम लक्षण वाले मामलों के लिए कोविड स्वास्थ्य केंद्र तथा गंभीर मामलों से निपटने के लिए कोविड अस्पताल की व्यवस्था होनी चाहिए।

एसओपी में कहा गया है कि कोविड देखभाल केंद्रों के पास बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस होनी चाहिए जिसमें चौबीसों घंटे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध हो। मामले बढ़ने पर हर जिले में विस्तरों की संख्या बढ़ाने की व्यवस्था रहनी चाहिए।

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