ताज़ा खबर
 

‘बाहर कोरोना वायरस है, मत जाओ पापा’, पुलिसकर्मी पिता के पैरों में लिपट गई बेटी, वीडियो वायरल

देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू होने के बाद देश भर से पुलिस की बर्बरता की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस वाले लगातार काम, बढ़ाए गए ड्यूटी घंटों और लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे लोगों से परेशान हैं। इन पुलिस वालों के पास एक मास्क और लाठी के अलावा सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है।

इस वायरल वीडियो को देखने के बाद कई पुलिसकर्मी भावुक हो गए।(express photo)

तेलंगाना के पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप में बुधवार को एक बच्चे का छोटा सा वायरल वीडियो आया। इस वीडियो को देखने के बाद कई पुलिसकर्मी भावुक हो गए। वायरल हुए इस वीडियो में एक बच्चा अपने पुलिसकर्मी पिता के पैरों में लिपटा हुआ है और कोरोनवायरस के कारण उन्हें बाहर जाने से मना कर रहा है। जहां पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू होने के बाद देश भर से पुलिस की बर्बरता की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस वाले लगातार काम, बढ़ाए गए ड्यूटी घंटों और लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे लोगों से परेशान हैं। इन पुलिस वालों के पास एक मास्क और लाठी के अलावा सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है।

यह कहते हुए कि वह समझ सकता है कि वीडियो को देखने के बाद पुलिसकर्मी क्यों भावुक हो गए, राचकोंडा के पुलिस आयुक्त महेश भागवत ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह पुलिसकर्मी खासकर जो सड़कों पर तैनात हैं वे काफी परेशान हैं। भागवत ने कहा “लोग पुलिसकर्मियों को गाली दे रहे हैं और उनसे बहस भी कर रहे हैं। पुलिस वालों को भी संक्रमित होने का खतरा है। उनसे भी यह वायरस किसी और को ट्रांसफर हो सकता है।”

पुलिस का काम है कि वह कानून और व्यवस्था को बनाए रखे और लॉकडाउन के वक़्त लोगों को बाहर आने से रोके। उन्हें ब्लैक-मार्केटिंग की जांच करने, आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के लिए जारी पास कि जांच करने और अगर कोई एम्बुलेंस अनुपलब्ध है तो नागरिकों को चिकित्सा संकट में मदद करने के लिए तैनात किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि जहां लोगों ने रविवार को जनता कर्फ्यू का कड़ाई से पालन किया, वहीं सोमवार और मंगलवार को पुलिस को उन्हें घरों में रहने के लिए मजबूर करना पड़ा। पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने की कई घटनाओं के बारे में, साइबराबाद पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “सोमवार दोपहर तक, राज्य सरकार ने पुलिस से सड़कों को खाली कराने के लिए कहा। लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं थे। हर दूसरे व्यक्ति ने तर्क दिया कि उन्हें सड़क पर रहने का अधिकार है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के लिए एक समस्या खड़ी हो गई। एक पुलिसकर्मी कितने लोगों को धैर्य से समझा सकता है? हर कोई सोचता है कि उसका काम सबसे महत्वपूर्ण है।”

Next Stories
1 देशबंदी होने के बाद मेनका गांधी ने सभी मुख्यमंत्रियों को घुमा दिया फोन, बोलीं- पशुओं की चिंता भी कीजिए, फटाफट जारी हुए ऑर्डर
2 कुछ द‍िन रुक जाइए, फ‍िर देख‍िएगा…कोरोना के खौफ पर वर‍िष्‍ठ डॉक्‍टर ने चेताया
3 Aaj Ki Baat- 27 march |कोरोना ने किया अमेरिका का बुरा हाल, आईसीसी ने 30 जून तक सभी क्वालिफाइंग टूर्नामेंट टाले
ये पढ़ा क्या?
X