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Coronavirus Lockdown: बिस्किट, चीनी, पानी पर सात दिन 1400 किमी साइकल चला गाँव पहुंचा, कहा- अब कभी नहीं लौटूँगा

Coronavirus Lockdown: 6 बहनों के इकलौते भाई विक्रम ने बताया कि 'शहरों में बहुत चकाचौंध है लेकिन आखिरकार मुश्किल वक्त में हम जैसे लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।'

Author नई दिल्ली | Updated: May 3, 2020 1:28 PM
यूपी के 6 मजदूरों ने साइकिल पर 1400 किलोमीटर की दूरी नाप दी। (एक्सप्रेस फोटो)

Coronavirus Lockdown Migrant Workers situation: करीब 7 दिनों तक साइकिल चलाकर और 1400 किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद विक्रम राय नामक प्रवासी मजदूर आखिरकार अपने घर पहुंच गया है लेकिन बुरी तरह थक गया है। विक्रम और उसके पांच अन्य साथियों ने 25 अप्रैल को दोपहर 2 बजे गुजरात के सूरत से अपना सफर तय किया था और शनिवार को उत्तर प्रदेश स्थित अपने गांव पहुंचे हैं। लॉकडाउन के चलते ये मजदूर सूरत में ही फंस गए थे। विक्रम और उसके साथी आसपास के गांवों में ही रहते हैं।

घर पहुंचते तक विक्रम इतना थक गया था कि उसने आते ही अपने पैर बाल्टी के नमक मिले गर्म पानी में डाल दिए। विक्रम ने बताया कि जब सूरत से चला था तो बस घर पहुंचने का जुनून सवार था। मुझे देखकर मेरे मां-बाप बहुत खुश हुए लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के चलते मैं उनके पैर भी हीं छू पाया। विक्रम ने बताया कि रास्ते में उन्हे ठीक से खाना भी नहीं मिला और सिर्फ चीनी, बिस्किट और पानी पीकर ही उन्होंने गुजारा किया। अब घर पहुंचने पर विक्रम की मां ने बेटे की पसंदीदा भिंडी की सब्जी दाल और रोटियां बनायीं।

विक्रम की बहनें भी भाई के घर पहुंचने पर खुश हैं। विक्रम ने बताया कि उन्हें मेरे सही सलामत घर पहुंचने से राहत मिली है वरना वह डरी हुई थीं। विक्रम ने बताया कि आज उसे पता चला कि एक मजदूर जो साइकिल से दिल्ली से बिहार जा रहा था उसने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया लेकिन भगवान ने हम सभी पर कृपा की और हम सही सलामत अपने घर पहुंच गए।

विक्रम के अनुसार, वह शहरों के अंदर से होते हुए यहां पहुंचे। इस दौरान लोगों ने उनकी मदद की और कहीं उन्हें सोने की जगह मिली तो कहीं लोगों ने खाना दे दिया। घर पहुंचने के बाद विक्रम और उसके दोस्त स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र गए, जहां उन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं।

करीब आठ साल पहले हाईस्कूल पास कर चुके विक्रम ने अब अपने गांव में ही रहने का फैसला किया है। 6 बहनों के इकलौते भाई विक्रम ने बताया कि ‘शहरों में बहुत चकाचौंध है लेकिन आखिरकार मुश्किल वक्त में हम जैसे लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।’ विक्रम ने कहा कि ‘अभी उसने आगे के बारे में नहीं सोचा है और जब पैरों का दर्द ठीक हो जाएगा उसके बाद ही वह इस बारे में कुछ सोचेगा।’

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