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सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद को किया आइसोलेट, संक्रमित अधिकारियों के संपर्क में आए थे

इसी बीच, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने स्पुतनिक-V वैक्सीन (रूस में विकसित COVID-19 वैक्सीन) के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी। सरकार ने टीकों की उपलब्धता बढ़ाने के वास्ते अन्य देशों में आपात इस्तेमाल के लिए अधिकृत विदेश निर्मित कोविड टीकों को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज की।

Coronavirus, Mumbai, National Newsकोरोना के बढ़ते मामलों और संभावित लॉकडाउन के डर के बीच लोग अपने गृह राज्यों का फिर से रुख करने लगे हैं। मंगलवार को एक रेलवे स्टेशन पर लगी भारी भीड़। (फोटोः पीटीआई)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद को आइसोलेट कर लिया है। बताया गया कि वह कुछ अधिकारियों के संपर्क में आए थे जो कि कोरोना संक्रमित पाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक योगी स्वस्थ हैं। इन दिनों वह बंगाल के चुनाव में भी काफी सक्रिय थे। बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी कोरोना तेजी से फैल रहा है। पिछले 24 घंटे में 18 हजार से ज्यादा नए मामले रिपोर्ट हुए और 50 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो गई।

कोरोना वायरस का नया वेरिएंट अब साइलेंट किलर बनता जा रहा है। दिल्ली के कई अस्पतालों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां मरीज के शरीर में कोरोना के तमाम लक्षण मौजूद रहने के बावजूद कोविड रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। इतना ही नहीं करीब 2-3 बार टेस्ट किए जाने के बावजूद भी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आ रही है। दिल्ली के एक अस्पताल के डॉक्टर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि उनके पास कई ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनमें कोरोना के सभी लक्षण मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद भी कोविड रिपोर्ट सही नहीं आ रही है। जबकि लेवेज तरीके से टेस्ट किए जाने पर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। लेवेज टेस्ट में नाक और गले की बजाय मरीज के फेफड़े से निकाले गए श्वैब की जांच की जाती है। 

सबसे पहले ब्रिटेन में पाया गया कोरोना वायरस का नया स्वरूप (वेरिएंट) बीमारी के मामले में मूल स्वरूप से अधिक गंभीर नहीं है, लेकिन यह अपेक्षाकृत अधिक संक्रामक है। ‘द लांसेट इन्फेक्शस डिजीजेज’ और ‘द लांसेट पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित अध्ययनों में इस बात का कोई सबूत नहीं पाया गया कि बी.1.1.7. स्वरूप से संक्रमित लोगों में अपेक्षाकृत गंभीर लक्षण हैं या उन पर किसी अन्य स्वरूप से संक्रमित मरीजों की तुलना में अधिक समय तक संक्रमित रहने का खतरा है।

अध्ययन के अनुसार, बी.1.1.7. संबंधी प्रारंभिक आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस वायरस से संक्रमित लोगों में वायरल लोड (शरीर में वायरस की मात्रा) अधिक होने के कारण यह अधिक संक्रामक है। कुछ सबूतों में संकेत मिला है कि वायरल लोड अधिक होने के कारण लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की अधिक आवश्यकता होती है और उनके मरने की अधिक आशंका होती है। बहरहाल, इस स्वरूप की हाल में पहचान हुई है, इसलिए ये अध्ययन उपलब्ध डेटा के आधार पर ही किए गए। सितंबर और दिसंबर 2020 के बीच की अवधि के डेटा संबंधी नए अध्ययन से जन स्वास्थ्य, क्लीनिकल और अनुसंधान के क्षेत्र में मदद मिलेगी।

‘द लांसेंट पब्लिक हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में ‘कोविड सिम्टम स्टडी’ ऐप का इस्तेमाल करने वाले 36,920 लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया है, जो सितंबर और दिसंबर 2020 के बीच संक्रमित पाए गए थे। अध्ययन का सह नेतृत्व करने वाले क्लेयर स्टीव ने कहा, ‘‘हम इसके अधिक संक्रामक होने की पुष्टि करते हैं, लेकिन हमने साथ ही दिखाया कि बी.1.1.7. पर लॉकडाउन का स्पष्ट रूप से असर होता है और यह मूल वायरस से संक्रमित होने के बाद पैदा हुई प्रतिरोधी क्षमता के आगे बेअसर प्रतीत होता है।’’

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