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दो महीनों में 20% गिरी आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की भर्ती, खौफ में अस्पताल और रोगी

जब से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं, आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने का आंकड़ा 20 फीसदी गिर चुका है। इस अवधि में इन पैकेजों में शामिल रोगियों के उपचार की संख्या 1,93,679 से घटकर 1,51,672 रह गई है।

Author नई दिल्ली | Updated: May 6, 2020 9:05 AM
आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 825 तरह की गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है। योजना के मुताबिक देशभर के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में रोगियों का इलाज होता है। (फाइल फोटो)

आशीष आर्यन, प्रभा राघवन

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से देशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों की देखभाल पर बुरा असर पड़ा है। यहां तक ​​कि आयुष्मान भारत-प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले गंभीर रोगियों के अस्पतालों में भर्ती किए जाने वाले आंकड़ों पर भी बुरा असर पड़ा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के आंकड़ों के मुताबिक इस योजना के तहत कुल 825 तरह की गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है। योजना के मुताबिक देशभर के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में रोगियों का इलाज होता है लेकिन पिछले तीन महीनों (फरवरी से अप्रैल) में, जब से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं, आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने का आंकड़ा 20 फीसदी गिर चुका है। इस अवधि में इन पैकेजों में शामिल रोगियों के उपचार की संख्या 1,93,679 से घटकर 1,51,672 रह गई है।

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आंकड़े बताते हैं कि फरवरी और अप्रैल के बीच कैंसर से संबंधित प्रक्रियाओं में लगभग 57 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि कार्डियोलॉजी में 76 प्रतिशत और प्रसूति और स्त्री रोग सं संबंधित मामलों में लगभग 26 प्रतिशत मरीजों की भर्ती में कमी आई।इमरजेंसी केसेज (पैकेज) में मरीजों को 12 घंटे कम से कम हॉस्पिटल में रहना पड़ता है। फरवरी और अप्रैल के बीच इस पैकेज में भी लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट आई है। इन प्रक्रियाओं को 21 श्रेणियों में बांटा गया है और इस सूची में अन्य प्रक्रियाओं में सामान्य सर्जरी और चिकित्सा, मूत्रविज्ञान और न्यूरोसर्जरी शामिल हैं।

एनएचए के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस से मिलते-जुलते सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में भी दोनों तरह (सरकारी और प्राइवेट) अस्पतालों में योजना के तहत मरीजों की भर्ती के आंकड़ों में 80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

बता दें कि देश में 21,300 से अधिक प्राइवेट अस्पताल एबी-पीएमजेएवाई के तहत सूचीबद्ध हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश में अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज और एचसीजी, महाराष्ट्र में एचसीजी और वॉकहार्ट हॉस्पिटल, बिहार में पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दिल्ली में सर गंगा राम और दिल्ली-एनसीआर में मेदांता द मेडिसिटी शामिल हैं। इन असपतालों में AB-PMJAY के कुल उपचार का  हिस्सा करीब 51 प्रतिशत हैं लेकिन कोरोना काल में यह आंकड़ा तेजी से गिरा है। इसके पीछे कोरोना संक्रमण का खौफ है।

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