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बंद हुआ रोजगार, खाने को पड़ गए लाले, आठ महीने की गर्भवती पैदल ही चल पड़ी गांव, रोज चली 70 किमी

सीमा और उसका पति कौशल सिंह पिछले 3 सालों से महाराष्ट्र के औरंगाबाद में चटाई बनाने की फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्ट्री बंद हो गई और रोजगार छिन गया।

लॉकडाउन के चलते देशभर में मजदूरों का पलायन जारी है। (REUTERS)

लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा देश के मजदूर वर्ग पर पड़ा है। इनमें से प्रवासी मजदूर इस माहमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी छिनी तो खाने के लाले पड़ गए और इसके साथ ही पलायन शुरू हो गया। बसें, ट्रेन बंद होने से लोगों ने पैदल ही अपने अपने घरों का रुख कर लिया। इन्हीं के बीच आठ माह की गर्भवती महिला के महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश के खंडवा तक पैदल आ जाने का मामला सामने आया है।

खबर के अनुसार, गर्भवती महिला और उसका पति हर रोज करीब 70 किलोमीटर तक पैदल चले और भूख प्यास से जूझते हुए चार दिन में खंडवा पहुंचे हैं। दरअसल सीमा और उसका पति कौशल सिंह पिछले 3 सालों से महाराष्ट्र के औरंगाबाद में चटाई बनाने की फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्ट्री बंद हो गई और रोजगार छिन गया। जैसे ही आमदनी बंद हुई धीरे धीरे जमापूंजी भी खर्च हो गई। खाने-पीने की समस्या हो गई।

वहीं प्रसव कराने के लिए एक निजी अस्पताल ने 50 हजार रुपए का खर्च बता दिया। ऐसे में दंपत्ति के सामने अपने घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। घर जाने के लिए परिवहन की कोई व्यवस्था ना होने के चलते दंपत्ति पैदल ही घर के लिए निकल गया और हर दिन करीब 70-80 किलोमीटर पैदल चलकर चार दिन बाद मध्य प्रदेश के खंडवा पहुंच गया। जब दंपत्ति खंडवा पहुंचे तो उनके पैरों में छाले पड़ चुके थे और शरीर थककर चूर हो गया था।

गर्भवती महिला के इतना पैदल चलने से उसकी और उसके बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता था, लेकिन महिला ने हार नहीं मानी और आखिरकार दंपत्ति अपने घर पहुंच गए।

लॉकडाउन में मजदूरों के पलायन के ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ओडिशा का है, जहां के मजदूर बीते दिनों साइकिल से ही चेन्नई से अपने घर पहुंच गए। इस दौरान मजदूरों ने करीब 1100 किलोमीटर की दूरी साइकिल पर पार की। गौरतलब है कि इन मजदूरों के साथ उनकी पत्नियां भी थीं। ऐसे में पहाड़ी इलाकों से गुजरते हुए इतनी दूर साइकिल से पहुंचने से मजदूरों के गांव के लोग भी हैरान हैं।

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