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लॉकडाउन की मार! इन इंडस्ट्रीज में बड़ी संख्या में जाएंगी नौकरियां; 12 करोड़ कर्मचारियों की नहीं मिली सैलरी

लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां भी जाएंगी। हालांकि आगामी फेस्टिव सीजन से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह भी इस बात पर निर्भर करेगा कि कोरोना का संक्रमण देश में कितना लंबा खिंचता है।

लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली जाएंगी। (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जारी लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। इस नुकसान की मार बड़े उद्योगपतियों से लेकर मजदूर वर्ग सभी झेल रहे हैं। विभिन्न स्टाफ एजेंसियों और उद्योगपतियों की मानें तो संगठित और असंगठित क्षेत्र के 10 से 12 करोड़ कर्मचारियों की पिछले माह सैलरी नहीं पायी है। यह हाल देश की 70 से 80 फीसदी इंडस्ट्री के कर्मचारियों का है।

लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां भी जाएंगी। हालांकि आगामी फेस्टिव सीजन से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह भी इस बात पर निर्भर करेगा कि कोरोना का संक्रमण देश में कितना लंबा खिंचता है।

कंपनियों को स्किल और नॉन स्किल कर्मचारी मुहैया कराने वाली एजेंसी बेटरप्लेस के सहसंस्थापक प्रवीन अग्रवाल ने इकॉनोमिक टाइम्स को बताया कि मार्च के मध्य से स्लोडाउन के हालात बनने शुरू हुए थे, आज स्थिति ये है कि सिर्फ 2 से 3 करोड़ की नौकरियां ही बची हुई हैं।

ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, एविएशन, रिटेल, आउटडोर एंटरटेनमेंट, फूड एंड बेवरेजेज और रियल एस्टेट सेक्टर इस लॉकडाउन के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनके साथ ही ऑटोमेटिव, गैर जरूरी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स, पॉल्ट्री, डेयरी, शिपिंग और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री को भी लॉकडाउन से झटका लगा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद असली चुनौती का सामना करना पड़ेगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले अधिकतर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ हाल कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का भी होने वाला है, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ सकता है।

वहीं देश के कई बड़े पूंजीपतियों के 68,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बट्टे खाते में डाले जाने से जुड़ी खबर को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कुछ सप्ताह पहले संसद में उनके प्रश्न का उत्तर नहीं देकर, इसी सच को छिपाया गया था। कांग्रेस का दावा है कि ‘24 अप्रैल को आरटीआई के जवाब में रिजÞर्व बैंक ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए 50 सबसे बड़े बैंक घोटालेबाजों का 68,607 करोड़ रुपया ‘माफ करने’ की बात स्वीकार की। इनमें भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के नाम भी शामिल हैं।’

इसी को लेकर गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘संसद में मैंने एक सीधा सा प्रश्न पूछा था- मुझे देश के 50 सबसे बड़े बैंक चोरों के नाम बताइए। वित्त मंत्री ने जवाब नहीं दिया।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘ अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी सहित भाजपा के ‘मित्रों’ के नाम बैंक चोरों की लिस्ट में डाले हैं। इसीलिए संसद में इस सच को छिपाया गया।’’

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