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Coronavirus संकटः राशन-पैसों के पड़े लाले तो बेबस मजदूरों ने लंबी दूरी पार करने को खटारा स्कूटर से तैयार कर लिया ‘जुगाड़’, ठाना- 3 दिन में पहुंचेंगे बिहार

मजदूरों ने बताया कि वह मंगलवार को दिल्ली से निकले थे। दरअसल लॉकडाउन के बाद उनके पास खाने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। जिसके बाद इन लोगों ने अपने 'जुगाड़' से ही दिल्ली से बिहार तक का रास्ता तय करने का फैसला किया और निकल पड़े।

Coronavirus Lockdownकोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते देश सके विभिन्न इलाकों से मजदूर अपने अपने घरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। (वीडियो ग्रैब इमेज/ट्विटर)

कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। बसें, रेल समेत यातायात के सभी साधन बंद हैं। ऐसे में देश के विभिन्न इलाकों से मजदूरों के पैदल ही अपने घर जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। इस सब के बीच बिहार के तीन मजदूरों की एक मजेदार कहानी सामने आयी है। दरअसल इन मजदूरों को जब अपने घर लौटने का कोई साधन नहीं मिला तो इन्होंने एक पुराने स्कूटर के इंजन को ठेले में जोड़कर अपना अलग ‘जुगाड़’ बना लिया और उसी पर बैठकर 1200 किलोमीटर की अपनी यात्रा पर निकल पड़े हैं।

बिहार की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के जिले चंदौली में जब गुरूवार की रात पुलिस ने इन मजदूरों को रोका, तब इस बात का पता चला। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, इन मजदूरों की पहचान लालू महतो, गोरे लाल महतो और एक रिश्तेदार के रूप में हुई है।

पुलिस ने इन लोगों को खाने के पैकेट दिए गए और उन्हें आराम करने के लिए भी कहा गया लेकिन इन लोगों ने बस उन्हें जाने देने का निवेदन किया। मजदूरों ने बताया कि वह मंगलवार को दिल्ली से निकले थे। दरअसल लॉकडाउन के बाद उनके पास खाने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। जिसके बाद इन लोगों ने अपने ‘जुगाड़’ से ही दिल्ली से बिहार तक का रास्ता तय करने का फैसला किया और निकल पड़े।

पुलिस द्वारा जब इन लोगों को रोका गया, तब का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी उन्हें आराम करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मजदूरों ने हाथ जोड़कर विनती की कि उन्हें थकान नहीं है और बस उन्हें जाने दिया जाए। मजदूरों ने ये भी बताया कि उन्हें लगा था कि वह तीन दिन में या फिर शायद चार दिन में घर पहुंच जाएंगे।

वहीं केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्य सरकारों से कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान वे प्रवासी कृषि मजदूरों, उद्योगों में लगे कामगारों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का उनके कार्यस्थल से घरों की ओर हो रहे बड़े पैमाने पर पलायन को रोकें। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजे गए परामर्श मे गृह मंत्रालय ने कहा कि वे छात्रावासों और कामकाजी महिला छात्रावासों में आवश्यक वस्तुओं की अबाध आपूर्ति सुनिश्चित करें ताकि ऐसे लोग जहां हैं, वहीं बने रहें।

मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया, ‘‘गृह मंत्रालय ने राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है कि वे प्रवासी कृषि मजदूरों, उद्योगों में लगे कामगारों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को रोकें, ताकि कोरोना वायरस से संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।’’ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह भी परामर्श दिया गया है कि वे इस वंचित तबके को सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दें, उन्हें बताएं कि सरकार राशन की दुकानों पर नि:शुल्क गेहूं/चावल और दाल उपलब्ध करा रही है।

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