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10 दिनों में 96 प्रवासियों की दर्दनाक मौत, रोजाना दो हादसे, पर सियासत का खेल जारी, राज्यों पर डाली जा रही जिम्मेदारी

इस बात को लेकर नाराजगी है कि केन्द्र सरकार प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को राज्य सरकारों के माथे मढ़ना चाहती है, खासकर उनके जहां विपक्षी पार्टियों की सरकार है।

पिछले 10 दिनों में विभिन्न सड़क हादसों में 96 प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है। (एक्सप्रेस इमेज)

मोदी सरकार के सत्ता में आने की शनिवार को छठी सालगिरह थी। हालांकि इस दौरान सेलिब्रेशन की तस्वीरों के बजाय औरेया और देश के अलग अलग हिस्सों से मातम की तस्वीरें दिखाई दीं। लॉकडाउन के चलते शहरों में आर्थिक गतिविधियों पर रोक के बाद प्रवासी मजदूर अपने अपने घरों को लौट रहे हैं और अनगिनत तादाद में सड़कों पर पैदल या साइकिल पर जाते दिखाई दे रहे हैं।

मोदी सरकार की छठी सालगिरह के उपलक्ष्य में भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो ‘6 साल बेमिसाल’ शीर्षक से पोस्ट किया गया है, जिसमें मोदी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की गई है। हालांकि इस दौरान पार्टी का एक धड़ा कोरोना वायरस माहमारी से निपटने के अपनी ही सरकार और प्रदेश सरकारों के प्रयासों से नाखुश भी है।

इस बात को लेकर नाराजगी है कि केन्द्र सरकार प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को राज्य सरकारों के माथे मढ़ना चाहती है, खासकर उनके जहां विपक्षी पार्टियों की सरकार है। केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को अपने राज्य में आने की इजाजत नहीं दे रहे हैं।

केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी अपने एक ट्वीट में कहा है कि सभी राज्य सरकारों को लॉकडाउन से प्रभावित लोगों और प्रवासी मजदूरों के लिए हवाई, रोड और रेल यातायात में कुछ छूट देनी चाहिए।

लॉकडाउन के पहले चरण में केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि करीब 14.3 लाख लोगों को 37,978 रिलीफ कैंप में ठहराया गया है। वहीं 26,225 फूड कैंप के जरिए करीब 1.3 करोड़ लोगों को खाना मुहैया कराया जा रहा है। करीब 16.5 लाख कामगारों को सरकार ने आश्रय और खाना दिया है।

 

हालांकि सरकार के ये प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल, साइकिल पर या ट्रक वगैरह में सवार होकर अपने अपने घरों को निकल गए हैं।

बता दें कि बीते 54 दिनों में देश में विभिन्न हादसों में 134 प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है। खास बात ये है कि लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रवासी मजदूरों की मौत की घटनाओं में तेजी आयी है। 6 मई के बाद से यानि कि बीते 10 दिनों में देश में 96 प्रवासी मजदूर 19 विभिन्न हादसों में मौत का शिकार बन चुके हैं।

सरकार ने एक मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायी थी। जिसके बाद गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों को सड़कों पर पैदल ना चलने देने की अपील की थी और उन्हें श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर पहुंचाने की बात कही थी। हालांकि शुक्रवार तक देश में 1000 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायी जा चुकी हैं और इनमें करीब 10 लाख प्रवासी अपने घर पहुंच चुके हैं। हालांकि यह सागर में एक बूंद के समान ही है क्योंकि इकोनोमिक सर्वे 2016-17 के अनुसार, देश में प्रवासी मजदूरों की संख्या करीब 10 करोड़ है।

कांग्रेस पार्टी भाजपा पर निशाना साध ही रही है। कई भाजपा नेता भी प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर अपनी सरकार को चेता चुके हैं। बिहार में जहां चुनाव होने हैं, वहां इस मुद्दे को लेकर ज्यादा चिंता है। पार्टी नेताओं को लगता है कि उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भाजपा की तरफ से प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी कार्यकर्ताओं से मजदूरों की मदद करने की अपील की है।

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