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यहां मरे, तो लाश भी नहीं पहुंच पाएगी अपने घर- पैदल पलायन की मजबूरी बयान कर रहे मजदूर

एक मजदूर ने बताया कि 'मुझे हरदोई जाना है। हम यहां सुबह 6 बजे से बैठे हैं, यदि पर्याप्त बसें नहीं हैं तो हमें पैदल ही घर जाने दिया जाए।'

migrant workersदेश में प्रवासी मजदूरों का पलायन लगातार जारी हैं। (एएनआई इमेज)

आज से देश में लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया है, जो कि 31 मई तक लागू रहेगा। वहीं दूसरी तरफ देशभर में प्रवासी मजदूरों का पलायन बदस्तूर जारी है। केन्द्र और राज्य सरकारें लोगों से अपील कर रही हैं कि वह अपने घरों से बाहर ना निकलें और प्रवासी मजदूरों के घर जाने के लिए विशेष ट्रेन चलायी जा रही हैं, लेकिन पिछले 50 से भी ज्यादा दिनों से देश में लॉकडाउन चल रहा है और ऐसे में जब प्रवासी मजदूरों के काम धंधे, कमाई के साधन बंद हैं तो उनके भूखे मरने की नौबत आ गई है। यही वजह है कि कोरोना का खतरनाक संक्रमण और केन्द्र और राज्य सरकारों की अपील भी प्रवासी मजदूरों को रोक पाने में नाकाफी साबित हो रहे हैं।

गाजीपुर में दिल्ली यूपी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर इकट्ठा हो गए हैं और बसों के इंतजार में घंटों तक बैठे हैं। एक मजदूर राजकुमारी ने बताया कि वह सीतापुर की रहने वाली हैं। उसने कहा कि ‘जब लॉकडाउन खत्म नहीं हो रहा है और सरकार हमारे घर पहुंचाने का इंतजाम नहीं कर पा रही है तो हमारे पास पैदल घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। अगर हम यहां मर गए तो हमारी लाश भी घर नहीं पहुंच पाएंगी।’

बता दें कि बसों द्वारा इन प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाया जा रहा है। एक मजदूर ने बताया कि ‘मुझे हरदोई जाना है। हम यहां सुबह 6 बजे से बैठे हैं, यदि पर्याप्त बसें नहीं हैं तो हमें पैदल ही घर जाने दिया जाए।’

प्रवासी मजदूरों के दो ग्रुप आज कोलकाता और पुरुलिया से कूच बिहार जाते दिखाई दिए। इनमें से एक ग्रुप पैदल और दूसरा साइकिल पर अपने घरों को लौट रहा था। जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि ‘बिना पैसे के वह कब तक घर से बाहर रह सकते हैं? राज्य सरकार कह रही है कि वह बसों का इंतजाम करेंगे। हमने शुरू में इसका इंतजार किया लेकिन अब हम खुद ही चल पड़े हैं।’

देशभर से प्रवासी मजदूरों की भावुक करने देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां मजदूर पलायन का दंश झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने घरों को निकले कई मजदूर सड़कों हादसों का शिकार होकर हमेशा के लिए अपनों से दूर चले गए हैं। शनिवार को उत्तर प्रदेश के औरेया में हुए सड़क हादसे में 26 मजदूरों की मौत हो गई थी।

इस हादसे में कई बुजुर्ग मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा छिन गया। ऐसे ही बुजुर्गों में से एक हैं सुदामा यादव। जो कि झारखंड के पलामू के निवासी हैं। सुदामा का बेटा नीतीश जयपुर के एक मार्बल फैक्ट्री में करता था और लॉकडाउन के चलते अपने घर लौट रहा था। सुदामा की शुक्रवार को आखिरी बार अपने बेटे से मोबाइल पर बात हुई थी। उसने बताया था कि ट्रक मिल गया है, जो कि उसे बिहार के गया में छोड़ेगा और वहां से वह अगले दिन घर पहुंच जाएगा। लेकिन शनिवार को उसकी मौत की खबर आ गई।

दर्दनाक बात ये है कि अपने बेटे के शव को लेने के लिए सुदामा यादव को मुश्किल समय में 19 हजार रुपए खर्च करने पड़े। दरअसल पलामू से औरेया आने में गाड़ी वाले ने 19 हजार रुपए लिए। अपने जवान बेटे के शव को घर ले जाते हुए सुदामा यादव के दुख का शायद अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

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