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‘हवा से फैल रहा है’ कोरोना तो क्या बालकनी में खड़े होने और पार्क में अकेले घूमने पर भी हो सकते हैं संक्रमण के शिकार? जानें

वैज्ञानिकों का कहना था कि बचाव के लिए घर के अंदर भी एन-95 मास्क पहनने की जरूरत है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने WHO से कोरोना वायरस पर अपने गाइडलाइन में बदलाव करने का भी आग्रह किया था।

corona in india, corona cases, airborne infection, WHOसोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने से कोरोना संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि यह वायरस रोगी के सांस से भी फैल सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या कोरोना वायरस बालकनी में खड़े होने या पार्क में घूमने जाने पर भी हो सकता है।

जानकारों का मानना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित रोगी के खांसने या छींकने के दौरान नाक या मुंह से निकलने वाल ड्रॉपलेट तेजी से बाहर निकलते हैं। ऐसे में यदि आप कोरोना संक्रमित से कम से कम 6 फुट की दूरी या मास्क पहने रहते हैं तो आपके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है। तमाम दिशानिर्देशों के बावजूद लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं।

चीन में एक रेस्टोरेंट में अलग-अलग टेबल्स पर डिनर के दौरान भी कोरोना संक्रमित होने की खबर सामने आई थी। संक्रमण की वजह एसी वेंट से निकलने वाली हवा को बताया गया। वहीं,अमेरिका में हॉल में एक साथ काम करने के वजह से 52 लोगों की कोविड-19 से संक्रमित होने की खबर सामने आई थी। दुनिया के अलग-अलग देशों में इस तरह से लोगों के संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं।

पिछले महीने 239 वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स ने डब्ल्यूएचओ को खुला पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि कोरोना वायरस हवा से भी फैलता है। अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना था कि बचाव के लिए घर के अंदर भी एन-95 मास्क पहनने की जरूरत है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने WHO से कोरोना वायरस पर अपने गाइडलाइन में बदलाव करने का भी आग्रह किया था।

इस बारे में डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जेसरेविक ने कहा था कि हम लेटर और रिपोर्ट से वाकिफ हैं। टेक्निकल एक्सपर्ट्स के साथ उसकी समीक्षा कर रहे हैं। हवा में मौजूद कणों (एयरोसॉल) से कोरोनावायरस कितनी तेजी से फैलता यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। हम संक्रमण के रास्ते यानी एयरोसॉल रूट को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अभी हम आश्वस्त नहीं हैं कि गाइडलाइन में बदलाव होना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ का कहना था कि कुछ खास स्थितियों में हवा से कोरोना का संक्रमण फैलता है। जैसे मरीज को ऑक्सीजन के लिए ट्यूब लगाते समय यह फैल सकता है। WHO ने 29 जून को स्वास्थ्य कर्मियों के लिए गाइडलाइन जारी की थी। जिसमें कहा गया था कि कोरोना नाक और मुंह से निकले ड्रॉप्लेट्स से फैलता है।

सतह पर मौजूद वायरस से भी संक्रमण हो सकता है। इस संबंध में एमआईटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि खांसी या छींक में 20 फीट तक की बूंदें गिर सकती हैं, जबकि सामान्य बातचीत के दौरान महीन बूंदें निकलती हैं जो 10 मिनट या उससे अधिक समय तक हवा में रह सकती हैं।

हैवी ड्रॉपलेट के माध्यम से फैलने वाली बीमारियां – जैसे फ्लू, सामान्य सर्दी और काली खांसी। ये बहुत कम संक्रामक होते हैं क्योंकि ये बहुत निकट संपर्क में आने से होती हैं। कोरोनावायरस काफी हद तक लैटर कीटाणुओं की तरह व्यवहार करता है। इसलिए इसे हवा से फैलने के रूप में चिह्नित करना मुश्किल पैदा कर सकता है।

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