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राजस्थान में अंधेरगर्दी! श्रमिकों से लॉकडाउन के बीच गहलोत सरकार के तय किए किराए से 3 गुणा अधिक किराया वसूल रहीं निजी बसें

महबूब के अनुसार 'सरकारी अधिकारियों न हमें बताया था कि 2400 रुपए से ज्यादा किराया मत देना लेकिन जैसे ही हम हाइवे पर पहुंचे, ड्राइवर ने बस एक पेट्रोल पंप पर रोक दी और कहा कि या तो 4000-4500 रुपए देने होंगे या फिर बस नहीं चलेगी।'

राजस्थान में प्राइवेट बस संचालकों द्वारा मजदूरों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लॉकडाउन के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को अपने घर जाने की इजाजत दे दी है और इसके लिए सरकार की तरफ से इंतजाम भी किए जा रहे हैं। हालांकि राजस्थान में प्रवासी मजदूरों से प्राइवेट बस संचालकों द्वारा सरकार द्वारा तय किराए की तुलना में तीन गुना ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। बिहार के सुपौल जिले का निवासी महबूब जयपुर की एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता है, उसने बताया कि उसे अपना सेलफोन बेचकर बस के किराए का जुगाड़ करना पड़ा है।

महबूब ने बताया कि ‘प्राइवेट बस वाले उनसे 4500 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से चार्ज कर रहे हैं। जयपुर छोड़ने से पहले सरकारी अधिकारियों न हमें बताया था कि 2400 रुपए से ज्यादा किराया मत देना लेकिन जैसे ही हम हाइवे पर पहुंचे, ड्राइवर ने बस एक पेट्रोल पंप पर रोक दी और कहा कि या तो 4000-4500 रुपए देने होंगे या फिर बस नहीं चलेगी।’

बस में करीब 30 यात्री थे, जो शनिवार की रात राजस्थान से चले थे और सोमवार की सुबह बिहार पहुंचे। महबूब ने बताया कि डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक जयपुर में फंसे रहने के बाद मेरे पास इतने पैसे भी नहीं बचे हैं कि मैं बस का किराया ले सकूं। इसलिए मुझे अपना सेलफोन 5000 रुपए में बेचना पड़ा, जबकि मैंने इसे 12000 रुपए में खरीदा था।

वहीं राजस्थान ट्रांसपोर्ट विभाग के कमिश्नर और सचिव रवि जैन ने बताया कि हमने नॉन एसी बसों में 32 रुपए प्रति किलोमीटर और एसी बसों में 40 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से किराया तय किया था। यह किराया पूरी बस के लिए था। एक बस में जिसकी क्षमता 50 सीटों की है, वहां सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए सिर्फ 30 लोगों को बैठने की इजाजत दी गई। हम फिलहाल प्रत्येक यात्री के लिए किराया फिक्स करने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार द्वारा तय किराए के मुताबिक सुपौल, जो कि राजस्थान से 1275 किलोमीटर है, तो बस में एक व्यक्ति का किराया करीब 1360 रुपए होना चाहिए था और पूरी बस का किराया करीब 40,800 रुपए होना चाहिए था। इस तरह राजस्थान के प्राइवेट बस संचालकों द्वारा प्रवासी मजदूरों से कई गुना ज्यादा किराया वसूला जा रहा है।

राजस्थान सरकार द्वारा मजदूरों को मुफ्त में बस में सफर कराया जा रहा है लेकिन राजस्थान ट्रांसपोर्ट की बसें सिर्फ राज्य के अंदर ही परिचालन कर रही हैं। ऐसे में राज्य से बाहर जाने के लिए मजदूरों को प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक अन्य मजदूर ने बताया कि बस चालकों ने उन्हें बताया कि उन्हें बस का वापसी का भी किराया देना पड़ेगा। फिलहाल शिकायत मिलने के बाद ट्रांसपोर्ट विभाग प्राइवेट बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहा है।

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