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कोरोनाः तीसरी लहर से पहले तैयार हो सकते हैं 1 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स, PM ने लॉन्च किए छह क्रैश कोर्स

पीएम ने बताया कि विशेषज्ञों ने ‘क्रैश कोर्स’ तैयार किया है, यह दो-तीन महीनों में पूरा हो जाएगा और कोविड-19 से लड़ने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करेगा।

जम्मू में गुरुवार को एक बाजार में कोरोना टेस्ट के लिए महिला का नेजल सैंपल लेते हुए हेल्थ वर्कर। (फोटोः पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाख से अधिक ‘कोविड योद्धाओं’ के लिए विशेष रूप से तैयार एक ‘क्रैश कोर्स’ कार्यक्रम की शुरुआत की। शुक्रवार को “Skill India” मुहिम के तहत कुल छह क्रैश कोर्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉन्च किए गए।

पीएम ने कहा, “हम एक लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स को तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वायरस हमारे बीच अभी भी है और इसके मयूटेट (रूप बदलने) होने की आशंका है। इसलिए हर इलाज और सावधानी के साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ देश में एक लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर तैयार करने का महाअभियान शुरू हो रहा है।”

पीएम ने बताया कि विशेषज्ञों ने ‘क्रैश कोर्स’ तैयार किया है, यह दो-तीन महीनों में पूरा हो जाएगा और कोविड-19 से लड़ने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करेगा। जीवनदायिनी ऑक्सीजन को लेकर उन्होंने आगे कहा, “इसके 1,500 से अधिक संयंत्र तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, हर जिले में संयंत्र स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।” पीएम के अनुसार, केंद्र सरकार प्रत्येक व्यक्ति को कोविड-19 रोधी टीका नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

छह पाठ्यक्रमों में क्या-क्या है?: 1- बेसिक केयर सहायक। 2- एडवांस केयर सहायक। 3- होम केयर सहायक। 4- आपातकालीन केयर सहायक। 5- सैंपल कलेक्शन सहायक और 6- चिकित्सा उपकरण सहायक का कोर्स। इस शुभारंभ के साथ 26 राज्यों के 111 प्रशिक्षण केन्द्रों में इस कार्यक्रम की शुरूआत हो गई।

कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में कोविड दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का लिया संज्ञानः दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को शहर के बाजारों में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का संज्ञान लिया और पाया कि ऐसे उल्लंघन से संक्रमण की तीसरी लहर को बढ़ावा मिलेगा। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को सख्त कदम उठाने, दुकानदारों को जागरूक करने और बाजार एवं विक्रेता संघ के साथ इस संबंध में बैठकें करने को भी कहा। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति आशा मेनन की अवकाशकालीन पीठ ने एम्स के एक डॉक्टर द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भेजी तस्वीरों का संज्ञान लिया। तस्वीरों में बाजारों में रेड़ी-पटरी वाले कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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