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कोविड-19 पर बोले पद्म भूषण विजेता- पैनिक की जरूरत नहीं, भारत आसानी से जीतेगा जंग; बताए ये दो कारण

coronavirus in india: डॉक्टर रेड्डी के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि ये वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैला, मगर चमगादड़ से सीधे इंसानों में पहुंचा, ऐसा यकीन से नहीं कर सकते हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब यह वायरस इटली, अमेरिका या भारत में फैला, तो इस वायरस के जीनोटाइप अलग हो गए।

coronavirusभारत में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

Coronavirus in india: देशभर में कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने की अफवाहों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात मेडिकल एक्सपर्ट डॉक्टर डी नागेश्वर रेड्डी ने अच्छी खबर दी है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से हम आसानी से जीत सकते हैं। उनके मुताबिक, ‘लॉकडाउन 3-4 सप्ताह से अधिक लंबा नहीं होना चाहिए।’ साल 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित डॉक्टर रेड्डी वर्तमान में एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चेयरमैन हैं।

डॉक्टर रेड्डी ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दो जरुरी कारण बताए जिससे कोरोना वायरस के संदर्भ में स्थिति भारत के पक्ष में नजर आती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति और इसके फैलने के तरीके के अध्ययन से पता चलता है कि इस वायरस की उत्पत्ति दिसंबर में चीन के वुहान शहर में हुई, जहां से इटली, अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों में फैला। दो या तीन सप्ताह के बाद यह वायरस इन क्षेत्रों से भारत में आया। उन्होंने कहा कि कोरोना एक आरएनए (RNA) वायरस है।

ऐसा माना जाता है कि ये वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैला, मगर चमगादड़ से सीधे इंसानों में पहुंचा, ऐसा यकीन से नहीं कर सकते हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब यह वायरस इटली, अमेरिका या भारत में फैला, तो इस वायरस के जीनोटाइप अलग हो गए। पूरे वायरस की सीक्वेंसिंग चार देशों में की गई है- पहला अमेरिका, दूसरा इटली, तीसरा चीन और चौथा भारत।

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डॉक्टर डी नागेश्वर रेड्डी के मुताबिक अब यह पता चला है कि इस वायरस की इटली के मुकाबले भारत में एक अलग जीनोम है। इसका बहुत अधिक महत्व है क्योंकि भारतीय वायरस में जीनोम के स्पाइक प्रोटीन में एक एकल उत्परिवर्तन होता है। स्पाइक प्रोटीन वह क्षेत्र है जो मानव कोशिका से जुड़ता है। इसलिए यह भारत में हमारे लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन जाएगा।

उन्होंने कहा कि इटली में फैले वायरस में तीन उत्परिवर्तन हुए हैं, जिससे यह इन लोगों के लिए अधिक घातक है। इटली में इसके घातक होने के कई अन्य कारण भी हैं जिनमें कई रोगियों की उम्र 70-80 साल से ऊपर है, धूम्रपान, शराब, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसे कारक शामिल हैं। इसलिए यहां मृत्यु दर का स्तर 10 फीसदी के साथ सामान्य से अधिक है। जबकि भारत, अमेरिका में, चीन में मृत्यु दर केवल 2 फीसदी है। वायरस के जीनोम के आधार पर मृत्यु दर और संक्रमण दर में भिन्नता है। इम्युनिटी सिस्टम भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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उल्लेखनीय है कि वायरस के फैलने से देशभर में दहशत का माहौल बना है। इस पर डॉक्टर रेड्डी कहते हैं कि कई अध्ययनों में दावा किया गया है कि दस साल तक बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित नहीं होते, दूसरा जवान व्यक्ति भी इससे कम प्रभावित होते हैं। आम तौर पर, 70 साल की उम्र से अधिक ऐसे व्यक्ति जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी समस्या है, तो उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।

बता दें कि भारत में सोमवार को कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 1,017 पर पहुंच गई जबकि बीमारी से मरने वालों की संख्या 29 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में अब भी 942 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं जबकि 99 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है और एक व्यक्ति यहां से चला गया है। मंत्रालय के सुबह साढ़े 10 बजे ये आंकड़े जारी किए।

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