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Coronavirus: अपनों और पड़ोसियों को लाएगा ‘ग्लोबमास्टर’

विदेश मंत्रालय ने इस अभियान को लेकर कहा, चीन में कोविड-19 की महामारी के मद्देनजर वहां से चिकित्सकीय सहायता मांगी गई थी। उसके तहत विमान भेजा गया है, जो वहां फंसे कुछ भारतीयों को लाएगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ फरवरी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर मदद की पेशकश की थी। विश्व बैंक ने इस संक्रमण को चिकित्सकीय आपातकाल घोषित किया है। इसके मद्देनजर भारत ने चिकित्सा मदद भेजी है।

सी-17 ग्लोबमास्टर विमान

कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित चीन के शहर वुहान के लिए बुधवार को भारतीय वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान नई दिल्ली से रवाना हुआ। यह विमान कुल 120 लोगों को वहां से निकालकर लाएगा, जिनमें 40 विदेशी नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विमान में 15 टन चिकित्सा सामग्री हैं, जिनमें मास्क, ग्लब्स और चिकित्सा से जुड़े अन्य सामान शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि चीन में कोरोना वायरस के प्रसार के मद्देनजर मदद भेजी गई है और मास्क तथा चिकित्सा उपकरण जैसी आपूर्ति के लिए अनुरोध मिला था। इससे पहले एअर इंडिया की दो उड़ानों से 647 भारतीयों और सात मालदीवियाई नागरिकों को निकाला जा चुका है।

चीन से हरी झंडी मिलने के बाद यह विमान वुहान रवाना किया गया। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने वुहान में फंसे भारतीयों को विशेष संदेश जारी कर उन्हें निकाले जाने की सूचना दे दी थी। वुहान के विभिन्न इलाकों से भारतीयों को निकालकर वहां के हवाई अड्डे ले जाया गया, जहां से वे लोग सी-17 ग्लोबमास्टर विमान में सवार होंगे। चीन स्थित भारतीय राजनयिक मिशन ने भारतीयों को निकालने के लिए वाहनों का इंतजाम किया। दिल्ली से विमान रवाना होने के पहले सी-17 विमान के कप्तान ग्रुप कैप्टन एके पटनायक ने कहा कि यह विमान वुहान के लिए मेडिकल मिशन पर है। हम अपने साथ चिकित्सा उपकरण, कई तरह की सामग्री और दवाएं ले जा रहे हैं। वापसी में हम 80 भारतीयों और 40 विदेशी नागरिकों को ले आएंगे।

विदेश मंत्रालय ने इस अभियान को लेकर कहा, चीन में कोविड-19 की महामारी के मद्देनजर वहां से चिकित्सकीय सहायता मांगी गई थी। उसके तहत विमान भेजा गया है, जो वहां फंसे कुछ भारतीयों को लाएगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ फरवरी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर मदद की पेशकश की थी। विश्व बैंक ने इस संक्रमण को चिकित्सकीय आपातकाल घोषित किया है। इसके मद्देनजर भारत ने चिकित्सा मदद भेजी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बीते बाकी पेज 8 पर दिनों बेजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने हॉटलाइन +8618610952903 और +8618612083629 जारी करते हुए वापस आने के लिए इच्छुक भारतीयों को इस पर संपर्क करने को कहा था। एक अनुमान के मुताबिक, वुहान और ह्युवेई प्रांत के इलाकों में अब भी 80 से 100 भारतीय फंसे हुए हैं। इनमें से कई ने भारत सरकार से खुद को निकालने की गुहार लगाई थी। गुहार लगाने वालों में वे 10 भारतीय भी शामिल थे, जो तेज बुखार के कारण पिछली दो उड़ानों में भारत नहीं लौट पाए थे। अब उनकी सेहत में सुधार आया है जिससे उनके तीसरी उड़ान से लौटने की उम्मीदें की जा रही हैं।

श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश अपने-अपने नागरिकों को चीन से निकाल चुके हैं। पाकिस्तान अपने नागरिकों को नहीं निकाल सका है। आठ सौ से 1000 पाकिस्तानी अब भी ह्युवेई में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार को भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने फंसे भारतीयों के वाट्सएप ग्रुप पर संदेश भेजा था, जिसमें बुधवार को विमान के भारत के लिए उड़ान भरने की उम्मीद जताई थी।

विदेश मंत्रालय ने कहा चीन में कोविड-19 की महामारी के मद्देनजर वहां से चिकित्सकीय सहायता मांगी गई थी। उसके तहत विमान भेजा गया है, जो वहां फंसे कुछ भारतीयों को लाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ फरवरी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर मदद की पेशकश की थी। विश्व बैंक ने इस संक्रमण को चिकित्सकीय आपातकाल घोषित किया है। इसके मद्देनजर भारत ने चिकित्सा मदद भेजी है।

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