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देश में 43 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची बेरोजगारी दर, विकास दर भी 2008 के बाद सबसे धीमी

Coronavirus in India: मार्च महीने में बेरोजगारी दर (या अर्थव्यवस्था में बेरोजगार लोगों की हिस्सेदारी) 8.7 फीसदी थी, जो सितंबर 2016 के बाद से सबसे अधिक थी।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

Coronavirus in India: देश में कोरोनो वायरस महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए लॉकडाउन से पहले ही मार्च महीने में बेरोजगारी 43 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। मंगलवार (7 अप्रैल, 2020) को मुंबई स्थित सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने यह जानकारी दी। मार्च महीने में बेरोजगारी दर (या अर्थव्यवस्था में बेरोजगार लोगों की हिस्सेदारी) 8.7 फीसदी थी, जो सितंबर 2016 के बाद से सबसे अधिक थी। इस साल जनवरी में यह दर 7.16 फीसदी थी। बेरोजगारी से जुड़ी ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत में 21 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन लागू है।

सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक श्रम भागीदारी (LPR) पहली बार 42 फीसदी अंक से नीचे गिरा है। एलपीआर सक्रिय कार्यबल का एक गेज है। मार्च में श्रम भागीदारी दर 41.9 फीसदी थी और रोजगार दर 38.2 फीसदी थी। दोनों अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर हैं। थिंक टैंक के प्रमुक महेश व्यास ने बताया कि एलपीआर पिछले दो वर्षो में स्थिर रहने के लिए संघर्ष करने के बाद मार्च में इसमें गिरावट होने लगी।

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सीएमआईई के मुताबिक जनवरी और मार्च के बीच श्रम भागीदारी दर में एक फीसदी की गिरावट आई। ये जनवरी में 42.96 फीसदी थी जो मार्च में लुढ़कर 41.90 फीसदी हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कार्यरत लोगों की संख्या 41.1 करोड़ से घटकर 39.6 करोड़ हो गई जबकि बेरोजगारों की संख्या 3.2 करोड़ से बढ़कर 3.8 करोड़ हो गई।

एनडीटीवी में छपी खबर के मुताबिक व्यास कहते हैं कि मार्च 2010 के श्रम आंकड़े बहुत चिंताजनक हैं और पिछले दो हफ्ते के लिए ये बहुत बदतर है। उन्होंने कहा कि कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण हमें श्रमिक भागीदारी दर में गिरावट की आशंका थी। लेकिन यह गिरावट लॉकडाउन से पहले भी हुई थी। जब हम लॉकडाउन में चले जाते हैं ये और भी बुरा हो जाता है।

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उल्लेखनीय है कि देश में लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुआ मगर इससे पहले ही देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2019-20 में धीमी गति के विकास की लंबी अवधि से ग्रस्त थी। आधिकारिक अनुमान है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वार्षिक विकास दर 5 फीसदी है, जो 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे धीमी है।

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