कोरोनाः 24 घंटे में 40 हजार के पार नए केस; UK के एक्सपर्ट्स ने चेताया- हर तीन में से एक की जान तक ले सकता है नया स्ट्रेन

दस्तावेज के मुताबिक, डेल्टा स्वरूप, ऐसे वायरस की तुलना में अधिक फैलता है जो मर्स, सार्स, इबोला, सामान्य सर्दी, मौसमी फ्लू और बड़ी माता का कारण बनता है, और यह चेचक की तरह ही संक्रामक है। दस्तावेज की एक प्रति ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी हासिल की है।

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कोरोना वायरस के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दीवार पर वैश्विक महामारी से संबंधित बना म्यूरल और वहां से गुजरती महिला। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः अमित चक्रवर्ती)

भारत में बीते एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल नए मामले 40 हजार के पार चले गए। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार (31 जुलाई, 2021) सुबह नौ बजे जारी किए गए आंकड़ों में दी गई।

इस डेटा के अनुसार, 24 घंटे में देश में संक्रमण के कुल 41,649 नए मामले आए। हालांकि, 37,291 लोग ठीक भी हुए, जबकि 593 लोगों की मौत हो गई। यह भी बताया कि फिलहाल देश में कोरोना के कुल केस 3,16,13,993 हैं। इनमें 4,08,920 एक्टिव केस हैं, जबकि 3,07,81,263 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, कोरोना से अब तक मरने वालों की संख्या 4,23,810 है। बता दें कि देश में 46,15,18,479 लोगों का टीकाकरण हो चुका है।

उधर, ब्रिटिश सरकार के शीर्ष वैज्ञानिकों की ओर से आगाह किया गया है कि वैश्विक महामारी का आने वाला नया वेरियंट हर तीन में एक व्यक्ति की जान तक ले सकता है। साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर इमरजेंसीज (SAGE) द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में आगाह किया गया है कि यह MERS जितना घातक भी हो सकता है, जिसमें 35 फीसदी तक मृत्यु दर होती है। साइंटिस्ट्स ने सुझाव दिया है कि वहां सर्दियों में बूस्टर वैक्सीन की डोज लाई जानी चाहिए, ताकि आने वाले म्यूटेंट स्ट्रेन्स से बचा जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले स्ट्रेन पर टीका बेअसर साबित हो सकता है।

इसी बीच, अमेरिकी स्वास्थ्य प्राधिकार के एक आंतरिक दस्तावेज का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कोरोना का डेल्टा स्वरूप, वायरस के बाकी सभी ज्ञात स्वरूपों के मुकाबले अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं, यह चेचक की तरह आसानी से फैल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के दस्तावेज में अप्रकाशित आंकड़ों के आधार पर दिखाया गया है कि टीके की सभी खुराकें ले चुके लोग भी बिना टीकाकरण वाले लोगों जितना ही डेल्टा स्वरूप को फैला सकते हैं। सबसे पहले भारत में डेल्टा स्वरूप की पहचान की गई थी।

सबसे पहले ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस डॉक्यूमेंट के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की। सीडीसी की निदेशक डॉ. रोशेल पी वालेंस्की ने मंगलवार को माना कि टीका ले चुके लोगों की नाक और गले में वायरस की मौजूदगी उसी तरह रहती है जैसे कि टीका नहीं लेने वालों में। आंतरिक दस्तावेज में वायरस के इस स्वरूप के कुछ और गंभीर लक्षणों की ओर इशारा किया गया है।

दस्तावेज के मुताबिक, डेल्टा स्वरूप, ऐसे वायरस की तुलना में अधिक फैलता है जो मर्स, सार्स, इबोला, सामान्य सर्दी, मौसमी फ्लू और बड़ी माता का कारण बनता है, और यह चेचक की तरह ही संक्रामक है। दस्तावेज की एक प्रति ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी हासिल की है।

दस्तावेज के मुताबिक बी.1.617.2 यानी डेल्टा स्वरूप और गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने एक संघीय अधिकारी का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज के निष्कर्ष ने डेल्टा स्वरूप को लेकर सीडीसी के वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘सीडीसी डेल्टा स्वरूप को लेकर आंकड़ों से बहुत चिंतित है। यह स्वरूप गंभीर खतरे का कारण बन सकता है, जिसके लिए अभी कदम उठाने की आवश्यकता है।’’

सीडीसी द्वारा 24 जुलाई तक एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 16.2 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है और हर सप्ताह लक्षण वाले करीब 35,000 मामले आ रहे हैं। लेकिन एजेंसी मामूली या बिना लक्षण वाले मामलों की निगरानी नहीं करती है, इसलिए वास्तविक मामले अधिक हो सकते हैं।

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