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कोरोनाः कमजोर जन विश्वास के बीच मोदी सरकार के 8वें साल का आगाज; बोले रवीश- 1 साल में सरकारों ने जितना झूठ बोला होगा, उतना धरती पर कभी न बोला गया

उधर, शिवसेना ने मोदी सरकार को आत्ममंथन करने की सलाह दी, जबकि कांग्रेस बोली कि मोदी सरकार देश के लिए हानिकारक है, क्योंकि वह हर मोर्चे पर विफल हुई है और इसने लोगों के भरोसे को तोड़ा है।

पीएम के मन की बात में और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा की ओर से हाल ही में जो उपलब्धियां गिनाई गईं, उसके बाद बुद्धिजीवी वर्ग और विपक्षी दलों ने बीजेपी को निशाने पर लिया। (फाइल फोटोः एजेंसियां)

देश में दो-दो महामारियों (1- Coronavirus, 2- Black Fungus) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के सात साल पूरे हुए हैं। सरकार की वर्षगांठ (केंद्र में कुल सात साल, जबकि मोदी 2.0 का दूसरा साल) पर पीएम ने दावा किया कि भारत ने बीते सात साल में राष्ट्रीय गौरव के कई लमहों का अनुभव किया है।

रेडियो कार्यक्रम ‘‘मन की बात’’ में उन्होंने अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का ब्योरा साझा किया। ‘‘विकास यात्रा’’ नाम से जारी इस ब्योरे में कहा गया कि केंद्रके लिए गए हर कदम में ‘‘सेवा की भावना’’ प्रमुख रही है। पर जमीनी स्तर पर यह सेवा भाव जनता पर छाप छोड़ता कम ही नजर आया। ऐसा इसलिए, क्योंकि मोदी सरकार के आठवें साल का आगाज दो बड़ी चुनौतियों के साथ हुआ है। पहला- कोरोना की दूसरी लहर (जिसे ‘सुनामी’ तक करार दिया गया), जिससे सरकार के प्रति जनता के विश्वास में कमी आई, जबकि दूसरा है- पार्टी अंदखाने में ही कई मुद्दों को लेकर आवाजें उठीं। मानो कि अपने ही लोगों में गुस्सा और नाराजगी हो।

हमारे सहयोगी अखबार ‘The Indian Express’ को प्रमुख राज्यों के प्रभारी और वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, “हमारे 2014 में प्रभार संभालने के बाद से यह अब तक का सबसे खराब समय है।” इनके जैसे अन्य पार्टी नेता भी कबूलते हैं कि नोटबंदी, NRC, जम्मू और कश्मीर, चीन और जीडीपी जैसे मसलों पर भाजपा की आलोचना के बाद पार्टी लाइन के तहत आने वाले हर घर में बेचैनी का माहौल है।

बकौल बीजेपी नेता, “हमारे ईमानदार समर्थक तो हमारे साथ हैं, पर 2014 के बाद पहली बार हम अपने समर्थकों आदि से भी केंद्र के नेतृत्व और क्षमता को लेकर बातें सुननी पड़ रही हैं।” उन्होंने आगे बताया, “पर यह चीज सुधारी नहीं जा सकती है। नेतृत्व भी जमीनी स्तर पर पनपे गुस्से और नाराजगी से वाकिफ है। हम आगे की तैयारी इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए कर रहे हैं।” एक अन्य नेता का कहना था कि अप्रैल और मई, 2021 “असामान्य” रहे और “ऐसे संकट/आफत में जनाक्रोश” देखने को मिला, जो कि फिलहाल बना हुआ है।

ये हैं मोदी सरकार की बड़ी चुनौतियां: कोरोना वायरस संकट से सही से निपटना। साथ ही समय रहते देश की आबादी का टीकाकरण कराना। स्वास्थ्य सेवाएं और आधारभूत ढांचे को और सुदृढ़ बनाना। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ रोजगार सृजन पर ठोस काम करना। हाशिए के लोगों को सीधी मदद, जिनमें प्रवासी मजदूर आदि शामिल हों। महामारी के दौर में तूफान और प्राकृतिक आपदाओं से सही से निपटना। तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन को शांत कराना। यही नहीं, चीन के साथ एलएसी विवाद और पाक के मोर्चे पर आतंकवाद के मुद्दे से निपटना भी बड़े मुद्दे हैं।

वैसे, मोदी सरकार ने इस बार अपने सात साल पूरे होने पर जश्न न मनाने का फैसला लिया है, पर पीएम के मन की बात में और बीजेपी चीफ जेपी नड्डा की ओर से हाल ही में जो उपलब्धियां गिनाई गईं, उसके बाद बुद्धिजीवी वर्ग और विपक्षी दलों ने बीजेपी को निशाने पर लिया। NDTV के पत्रकार रवीश कुमार ने 30 मई को फेसबुक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया, “बीते एक साल में सरकारों ने जितना झूठ बोला होगा, उतना इस धरती के इतिहास में न बोला गया होगा।” यह बात उन्होंने कोरोना के लिए किए जाने वाले एंटीजेन टेस्ट को लेकर खबर को साझा करते हुए की थी।

उधर, शिवसेना ने मोदी सरकार को आत्ममंथन करने की सलाह दी। शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि भारत जवाहरलाल नेहरू के समय से लेकर मनमोहन सिंह की सरकारों के अच्छे कामों के कारण अस्तित्व में है और मौजूदा मोदी सरकार को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि क्या वह लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा कर पायी है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार की सातवीं वर्षगांठ को ‘‘काला दिवस’’ के रूप में मनाया और केंद्र पर देश को कोविड-19 संकट की ओर ‘‘धकेलने’’ का आरोप लगाया।

वहीं, कांग्रेस बोली कि मोदी सरकार देश के लिए हानिकारक है, क्योंकि वह हर मोर्चे पर विफल हुई है और इसने लोगों के भरोसे को तोड़ा है। पार्टी ने कहा, “सच तो यह है कि मोदी सरकार के सात साल, 140 करोड़ लोगों के देश के लिए अथाह पीड़ा, अथाह तबाही और अथाह कष्ट की कहानी है।” विपक्षी पार्टी ने इस मौके पर सरकार की ओर से की गई सात “बड़ी भूलों” का एक आरोप-पत्र जारी किया है जिसमें मोदी सरकार द्वारा लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने का आरोप लगाया गया है।

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