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Corona संक्रमण के बीच सुर्खियों में आए तबलीगी जमात और मरकज की कैसे हुई शुरुआत, जान‍िए

Corona virus Outbreak, Tablighi Jamaat: तबलीगी का मतलब होता है अल्लाह की कही हुई बातों का प्रचार-प्रसार करना लोगों को इसके बारे में बताना। जमात का मतलब होता है लोग, समूह।

Nizamuddin,Corona Virus, Tablighi jamat,कुछ दिनों पहले ही दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात का कार्यक्रम आयोजित हुआ था। (फोटो-PTI)

Corona virus Outbreak, Tablighi Jamaat: कोरोना  वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन के बीच संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीच सोमवार को तेलंगाना से एक ऐसी खबर आई जिससे लोगों  में दहशत फैल गई। दरअसल, तेलंगाना में कोरोना वायरस के चलते छह लोगों की मौत हो गई। कहा जा रहा है कि ये लोग दिल्ली में आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इनकी मौत के बाद तबलीगी जमात और मरकज जैसे शब्द काफी चर्चा में हैं। हम बता रहे हैं  आपको कि क्या है तबलीगी जमात और मरकज कैसे इसकी शुरुआत हुई और ये होता क्या है…

क्या होती है तबलीगी जमात: तबलीगी का  मतलब होता है अल्लाह की कही हुई बातों का प्रचार-प्रसार करना लोगों को इसके बारे में बताना। जमात का मतलब होता है लोग, समूह। मरकज का मतलब होता है मीटिंग या बैठक की जगह। तबलीगी जमात से जुड़े लोग पारंपरिक इस्लाम का अनुमोदन करते हैं और इस्लाम की बातों का प्रसार करते हैं।ये एक सुन्नी इस्लामी मिशनरी मूवमेंट है। इसका उद्देश्य आम मुसलमानों तक पहुंचना और उनका इस्लाम के प्रति विश्वास बढ़ाना और साथ ही खान-पान, पहनावा और इस्लामिक तौर तरीकों के बारे में बताना है।

इसकी जड़ें हनफी स्कूल ऑफ ज्यूरिसुडेंस के देवबंदी संस्करण में हैं। इसकी शुरुआत देवबंद के मौलवी और प्रमुख इस्लामी विद्वान मौलाना मुहम्मद इलियास खंडालाव ने 1927 में मेवात में की थी। दिलचस्प यह है कि  इसकी शुरुआत हिंदू अभियोग आंदोलनों के दौरान हुई थी।

सहारनपुर में 1920 के दौरान मुहम्मद इलियास  जब कुछ आर्थिक शैक्षिक रूप से पिछड़े लोगों को पढ़ाने जाते थे उस समय वहां कुछ मेओ किसान थे जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे। वह लोग हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे थे। मौलाना इलियाज़ ने मेओ मुसलमानों को पारंपरिक इस्लाम की तह में वापस लाना शुरू किया। उन्होंने देवबंद और सहारनपुर के कई युवकों को प्रशिक्षित किया और उन्हें मेवात भेजा, जहां तब्लीगी जमात ने मदरसों और मस्जिद का एक नेटवर्क स्थापित किया।इसके बाद साल 1941 में तबलीगी की पहली कॉन्फ्रेंस हुई और उत्तर भारत से कम से कम 25000 लोग इस आयोजन में शामिल हुए थे।तबलीगी जमात  पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन तक फैला हुआ है। इन देशो में भी इनका आयोजन होता रहता है।

कैसे करते हैं इस्लाम का प्रचार: तबलीगी छह सिद्धांतों पर काम करता है। (कलिमा, सलात, इल्म धिक्र, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-नियत, दावत-ओ-तबलीग) हैं। कलिमा के अल्लाह के अलावा और उनके पैगंबर के अलावा कोई नहीं है। सलात के मुताबिक पांच वक्त रोज नमाज अदा करनी चाहिए। इल्म धिक्र के मुताबिक अल्लाह की इबातदत की जाती है और मौलाना और वहां मौजूद अन्य लोग अल्लाह से जुड़ी बातें बताते हैं। इस दौरान कुरान और हदीस पढ़ी जाती है। इक्राम-ए-मुस्लिम मुस्लिम के मुताबिक मुस्लिमों को सम्मान दिया जाना चाहिए और एक दूसरे की मदद करनी  चाहिए।इख्लास-ए-निय्यत कहता है कि नियत साफ होनी चाहिए और मुसलमान को ईमानदार होना चाहिए। और इसके अलावा छठा दावत-ओ-तबलीग होता है।

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कैसे निकलती हैं जमातें: तबलीगी जमात के मरकज से ही अलग-अलग हिस्सों के लिए तमाम जमातें निकलती है। इनमें कम से कम तीन दिन, पांच दिन, दस दिन, 40 दिन और चार महीने तक की जमातें निकाली जाती हैं।
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