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विशेष: अनहद का बाजा बाजता

एक ऐसे समय में जब दुनियाभर में कोरोना महामारी से बचाव के लिए पूर्णबंदी को एक सुरक्षात्मक विकल्प के तौर पर आजमाया जा रहा है और लोग घरों में रहते हुए कई तरह की निराशा व तनाव से घिर रहे हैं, ऐसे में संगीत जैसे प्रसंगों की चर्चा कई वजहों से जरूरी है।

कोरोना संकट के दौरान संगीत की धुन शांति दे रहा है।

कबीर गायकी के लिए देश-दुनिया में जाने जानेवाले प्रह्लाद सिंह टिपानिया जब अपने खास निरगुनिया अंदाज में गाते हैं ‘अनहद का बाजा बाजता’, तो लोगों के दिलोदिमाग में जीवन की क्षणिकता के साथ जुड़े कई बिंब उभरने लगते हैं। कोरोना संकट को अगर लोग नए सभ्यता विमर्श से जोड़कर देख रहे हैं तो उसके पीछे भी दृष्टि यही है कि जीवन की सार्थकता उसके बचे रहने से ज्यादा उसकी उस लयबद्धता में है, जो उसे कभी भी हारने नहीं देती, उत्साह की पटरी से उतरने नहीं देती। यही कारण है कि एक तरफ तो कोरोना महामारी से बचाव के लिए पूरी दुनिया में लोग जब पूर्णबंदी जैसी असामान्य स्थिति में रहने को मजबूर हैं, तो वहीं दूसरी तरफ इस परिस्थिति को हताशा-विरोधी सिद्ध करने के लिए कई तरह के सांगीतिक अभिक्रम सामने आए हैं। कोरोनाकाल में जिंदगी से भरी इन्हीं टेरों की चर्चा कर रहे हैं प्रेम प्रकाश।

प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता एन सुब्बाराव 91 वर्ष के हो चुके हैं। वे इस उम्र में भी युवाओं के बीच अहिंसक मूल्यों और रचनात्मक कार्यक्रमों को लेकर लगातार सक्रिय हैं। पूर्णबंदी के दौरान भी उनकी यह सक्रियता स्थगित नहीं हुई है। सोशल मीडिया के विविध माध्यमों से वे लगातार युवाओं से बात कर रहे हैं, उन्हें प्रेरक गीत और प्रार्थनाएं सुना रहे हैं। सुब्बाराव की इस विलक्षण कार्य पद्धति की ही ताकत रही कि वे चंबल के बीहड़ में भी सक्रिय रहे। विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण के मार्गदर्शन में डाकुओं का आत्मसमर्पण कराने के कारण तो उनकी चर्चा आज भी देश-विदेश में होती है।

महात्मा, गुरुदेव और संगीत
हाल की एक बातचीत में सुब्बाराव ने एक दिलचस्प जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार किसी ने गांधीजी से पूछा कि स्कूलों में कौन सा एक विषय अनिवार्य होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि संगीत। गौरतलब है कि गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के संबंधों की चर्चा के क्रम में अकसर लोग इस नतीजे पर पहुंच जाते हैं कि महात्मा को गुरुदेव की सांगीतिक-सांस्कृतिक अभिरुचियों में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। यह गलत निष्कर्ष है और इससे हम इन दोनों विभूतियों को समझने में भूल करते हैं।

गांधीजी आस्थावान थे और मुश्किल से मुश्किल क्षणों में उन्होंने ध्यान और प्रार्थना के अपने अभ्यास को नहीं छोड़ा। प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक डीवी पलुस्कर और एमएस सुब्बुलक्ष्मी के साथ उनकी अनन्यता के तो कई किस्से मशहूर हैं। पलुस्कर के बारे में तो यहां तक कहा जाता है कि उनके गाए रामधुन से अगर किसी कार्यक्रम की शुरुआत होती थी तो गांधीजी काफी प्रसन्न होते थे। एक ऐसे समय में जब दुनियाभर में कोरोना महामारी से बचाव के लिए पूर्णबंदी को एक सुरक्षात्मक विकल्प के तौर पर आजमाया जा रहा है और लोग घरों में रहते हुए कई तरह की निराशा व तनाव से घिर रहे हैं, ऐसे प्रसंगों की चर्चा कई वजहों से जरूरी है।

पहली बात तो समझने की यह है कि संगीत एक तरह से आत्मा की लय है और इन कठिन दिनों में यह लयबद्धता नहीं टूटनी चाहिए। इस तरह संगीत को हम एकांत के आलाप के तौर पर भी देख सकते हैं। संगीत की यह ताकत है कि वह हमें कभी भी अकेला पड़ने नहीं देता है और न ही अंदर से टूटने-बिखरने देता है। आज जिस तरह के हालात हैं उसमें संगीत की इस खासियत के साथ लोगों को निराशा से बचाने, उन्हें आस्था व उम्मीद से जीने के लिए प्रेरित करने के लिए कई रचनात्मक पहल सामने आए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की हिदायत
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) कह चुका है कि पूर्णबंदी या पृथकवास के जरिए हम कोरोना संक्रमण से बच तो सकते हैं पर ये ऐसे तरीके नहीं हैं जो हर लिहाज से फायदेमंद ही हों। लंबे समय तक घरों में कैद रहना, लोगों से मिलना-जुलना नहीं, घर से बाहर की पूरी दुनिया से एक तरह से कट जाना… ये सब मानवीय स्वभाव के सर्वथा प्रतिकूल हैं। लिहाजा ऐसे में मनोवैज्ञानिक स्तर पर हम कई तरह की परेशानियों के शिकार भी हो सकते हैं।

ऐसे हालात में लंबे समय तक रहने वाला व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है, उसे निराशा घेर सकती है। यहां तक कि वह हिंसक और पागल भी हो सकता है। डब्लूएचओ ने हिदायत दी है कि अगर पूर्णबंदी के दौरान लोगों को सकारत्मक बनाए रखने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो अगले कुछ महीनों में हम कोरोना महामारी के साथ कई गंभीर मानसिक व्याधियों से जूझने की नौबत तक पहुंच जाएंगे।

दिग्गज गायकों की पहल

अपनी इन्हीं चिंताओं को दूर करने की पहल करते हुए डब्लूएचओ लेडी गागा और गैर-लाभकारी संगठन ‘ग्लोबल सिटीजन’ की मदद से एक अहम आयोजन भी कर चुका है। इस आयोजन का नाम ‘वन वर्ल्ड : टुगेदर एट होम’ था। इस आयोजन में कई दिग्गज गायकों ने हिस्सा लिया। सबने कोरोना संक्रमण की मार झेल रहे और पूर्णबंदी के बीच काम कर रहे लोगों के लिए अपनी सांगीतिक प्रस्तुतियां दीं। यह अपनी तरह का एक बड़ा और अभिनव आयोजन था। इसमें लेडी गागा, द रोलिंग स्टोन्स, जॉन लीजेंड, बिली ईलिश, एल्टन जॉन और कई बड़े गायकों-संगीतकारों ने दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए अपने घरों से ही सांगीतिक प्रस्तुतियां दीं। सभी ने अपने घर से ही लोगों के लिए गाने गाए, वाद्ययंत्र बजाए और इनका वीडियो भी बनाया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर आज खूब देखे-सराहे जा रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ इटली का संगीत
पूर्णबंदी के दौरान इस तरह की पहल करने में जो देश सबसे आगे रहा, वह है इटली। ताज्जुब है कि एक ऐसा देश जहां कोरोना के कारण मौत का आंकड़ा हिला कर रख देने वाला है, वहां के लोग खौफ और गम में डूबने के बजाय एक दूसरे का सहारा बनने, आपसी उत्साह बढ़ाने के लिए गाने गा रहे रहे हैं, तरह-तरह के वाद्ययंत्र बजा रहे हैं। इटली में जब लोग अपनी बालकनी पर देशभक्ति के गीत गाने के लिए निकले तो इस वीडियो को दुनियाभर में खूब देखा और शेयर किया गया। यह एक अपूर्व दृश्य था जब लोग अपनी-अपनी बालकनी पर आकर न सिर्फ गा रहे थे बल्कि नए-पुराने कई वाद्ययंत्रों को बजाकर कोरोना के खिलाफ जीत का सांगीतिक जज्बा पूरी दुनिया में फैला रहे थे।

सूफियाना लय में भारत
बात करें भारत की तो यह देश कोरोना योद्धाओं के लिए थाली बजाकर, मोमबत्ती जलाकर या फूल बरसा कर ही नहीं रुक गया बल्कि खुद के और कोरोना से जूझ रहे हर शख्स के उत्साह के लिए कई तरह की वैकल्पिक कोशिशों का भी हिस्सा बना। अच्छी बात यह है कि यह सिलसिला अब भी चल रहा है। एक तरफ जहां कोरोना के कारण प्रवासियों की पीड़ा लोकगीतों के रूप में छलक रही है तो वहीं लोग कबीर के पदों के साथ कई सूफी संतों के गीत इस दौरान खूब सुन रहे हैं। टीवी पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ देखकर कर्म और जीवन के मर्म को समझने वाले परिवारों में यह एक तरह से पुराने संगीत की वापसी का दौर है। वह दौर जिसके गीत जीवन को आगे जीने की लय देने वाले रहे।

साफ है कि कोरोना संकट के बीच जहां एक तरफ सब कुछ पटरी से उतरता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ संगीत की अपनी पटरी अब भी पहले की तरह लय में है। एक ऐसी लय जो हताशा के खिलाफ और हर हाल में जिंदगी का साथ देने की जीवट प्रतिबद्धता के साथ है।

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