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इटली के रास्ते पर भारत? कोरोना से मौत का आंकड़ा और संक्रमण की रफ्तार एक जैसी, ये आंकड़े बता रहे आगे भयानक मंजर!

Corona Virus in India Italy: वर्ल्ड मीटर की बात करें तो भारत में जिस रफ्तार से मामले सामने आए हैं इससे लगता है कि भारत में भी हालात इटली की राह पर हैं बस समय के मामले में भारत एक महीने पीछे है।

कोरोना वायरस के संकट दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है। यूरोप के देशों में हालात और खौफनाक हैं। इटली में अबतक इससे हजारों लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं, भारत की बात करें तो स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में अबतक मौत का आंकड़ा 150 में एक कम हैं और संक्रमितों की संख्या बुधवार को बढ़कर 5274 हो गई है।

वर्ल्ड मीटर की बात करें तो भारत में जिस रफ्तार से मामले सामने आए हैं इससे लगता है कि भारत में भी हालात इटली की राह पर हैं बस समय के मामले में भारत एक महीने पीछे है। वर्ल्ड मीटर के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में इटली के आंकड़े देखें तो एक मार्च को यहां कोरोना के 1577 मामले थे और 41 लोगों की इससे मौत हो चुकी थी।

Corona Virus in India Live Update

मृत्यु दर भी एक जैसी: छह अप्रैल को भारत में कोरोना वायरस के मामले देखें तो भारत में कोरोना वायरस के 4778 सामने आ चुके हैं और 136 लोगों की मौत हो चुकी है। इटली में 6 मार्च के आंकड़े देखें तो इस वक्त तक इटली में 4636 मामले सामने आए थे और 197 लोगों की मौत हुई थी। भारत में कोरोना वायरस के संक्रमितों की रोज की संख्या और इससे मरने वालों की संख्या इटली से मिलती जुलती है। इटली में एक मार्च को 573 केस आए थे और 12 लोगों की मौत हुई थी। जबकि भारत में एक अप्रैल को 601 मामले सामने आए थे और 23 लोगों की मौत हो गई थी। दोनों देशों की मृत्यु दर भी लगभग एक जैसी ही है। 1 मार्च को इटली में कोरोना से मृत्युदर 33.01 फीसदी थी। वहीं एक 1 अप्रैल को भारत में कोरोना से मृत्यदर 28.16 फीसदी थी।

भारत में क्यों कम हैं मामले:  भारत में कोरोना वायरस के मामले कम होने के कई कारण माने जा रहे हैं। भारत में मामले कम होने का एक कारण यह भी है कि यहां लोगों की स्क्रीनिंग और संपैल टेस्ट पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाए हैं। भारत की एक लाख की आबादी  पर महज 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो पाया है। अन्य देशों में ऐसा नहीं है। चीन में मार्च के अंत तक कुल 3.20 लाख लोगों ने टेस्ट किया है। वहीं जापान ने एक लाख लोगों में  257 लोगों का टेस्ट किया है और अमेरिका में यह आंकड़ा 447 है।

बीसीजी का टीका:  बेसिलस कामेट गुएरिन यानी बीसीजी टीके को भी एक खास वजह बताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि कोरोना से लड़ने में  बीसीजी के टीके लड़ने में  मददगार साबित हो रहे हैं। भारत में यह टीका पिछले 72 साल से लगाया जा रहा है। न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक अमेरिका और इटली जैसे देशों में इस टीके को लगाए जाने की पॉलिसी नहीं है लेकिन भारत में नवजातों को यह टीका लगाया जाता है। ऐसा बताया जा रहा है कि जिन देशों में बीसीजी के टीके लगाए जाते हैं वहां कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या कम है।

सही समय पर लॉकडाउन का फैसला: सही समय पर लॉकडाउन का फैसला भी कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के सबसे मारक कदमों में से एक है। WHO  के मुताबिक भारत सरकार ने सही समय पर फैसला लिया जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से नहीं फैल सका।

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