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कोरोना विषाणु महामारी: अदालत ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के मामले का खुद लिया संज्ञान

कोरोना विषाणु पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जेल महानिदेशकों और मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए

Author नई दिल्ली | March 17, 2020 4:48 AM
Delhi metro, Tis Hazari metro station, cisf personnel, woman with bullet, delhi police, UP news, moradabad news, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiसीआईएसएफ कर्मियों ने जांच के बाद महिला को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना विषाणु महामारी को देखते हुए देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने और उनमें सुविधाओं का सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव के पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जेल महानिदेशकों और मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए। अदालत ने इन सभी को 20 मार्च तक यह बताने का निर्देश दिया है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्थिति से निबटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

सर्वोच्च अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे इस मामले में शीर्ष अदालत की मदद के लिए 23 मार्च को एक अधिकारी तैनात करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने और इनमें उपलब्ध सुविधाओं के मामले का स्वत: संज्ञान लेने के कारणों को भी बताया जाएगा।

अदालत ने देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह होना बड़ी समस्या है और यह कोरोना विषाणु फैलने का बड़ा कारण हो सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए हमें कुछ दिशा निर्देश तैयार करने होंगे। यहीं नहीं, कोरोना विषाणु के मद्देनजर जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के मामले में भी दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि कुछ राज्यों ने महामारी कोविड-19 के मद्देनजर कदम उठाए हैं लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी ही हैं जिन्होंने उचित उपाय नहीं किए हैं।

उधर. सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के सिलसिले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बडे की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी।न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह के पीठ ने दोनों कार्यकर्ताओं को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। पीठ ने इन दोनों को अपने पासपोर्ट तत्काल जमा कराने का भी निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने छह मार्च को इन दोनों को गिरफ्तारी से प्राप्त अंतरिम संरक्षण की अवधि 16 मार्च तक के लिए बढ़ा दी थी। पुणे की सत्र अदालत से राहत नहीं मिलने पर गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बडे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले साल नवंबर में बंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ इन दोनों कार्यकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी।

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