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संवाद: कहर ढा रहे कोरोना को कैसे देंगे मात

केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया है। भारत सरकार की पहल पर सार्क स्तर पर तैयारियों की कवायद शुरू की गई और इसी बहाने सही पाकिस्तान से संवाद शुरू हुआ। तीनों स्तर पर हुई कवायद में कई ऐसे प्रावधान और कानूनी इंतजाम लागू हो गए हैं, जो महामारी से निपटने में मददगार हो सकते हैं।

दुनिया भर में कोरोना को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

दीपक रस्तोगी
कोरोना विषाणु का कहर पूरी दुनिया में पसर चुका है। यह वायरस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने अब इसे महामारी घोषित कर दिया है। भारत में भी कई राज्यों की सरकारें इसे महामारी घोषित कर चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया है। भारत सरकार की पहल पर सार्क स्तर पर तैयारियों की कवायद शुरू की गई और इसी बहाने सही पाकिस्तान से संवाद शुरू हुआ। तीनों स्तर पर हुई कवायद में कई ऐसे प्रावधान और कानूनी इंतजाम लागू हो गए हैं, जो महामारी से निपटने में मददगार हो सकते हैं। अर्थव्यवस्था की लगाम साधी जा सकती है। हालांकि, यह बहस भी तेज हो गई है कि विषाणु का जिस गति से प्रसार हो रहा है, उसके मद्देनजर कानूनी प्रावधान नाकामी साबित हो रहे हैं।

सभी महाद्वीपों में दस्तक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कोरोना संक्रमण को महामारी घोषित करते हुए चेतावनी दी कि कोरोना विषाणु अगर सभी देशों में नहीं तो ज्यादातर देशों में फैल सकता है। यह चेतावनी सही साबित हुई है। अंटार्कटिका को छोड़ दिया जाए तो कोरोना का संक्रमण सभी महाद्वीपों में फैल चुका है। यह विषाणु अब ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलिपींस, थाईलैंड, ईरान, भारत, नेपाल और पाकिस्तान समेत दुनिया के 114 देशों में फैल चुका है और इसके सबसे अधिक मामले केवल चीन में पाए गए हैं। डब्लूएचओ के द्वारा इसे वैश्विक महामारी घोषित किए जाने के बाद बीमारी की रोकथाम और इलाज के लिए संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल किया जा सकता है। कोरोना वायरस महामारी का रूप ले लेगा इसका सही अंदाजा डब्लूएचओ को भी शायद नहीं था इसलिए इसे पहले महामारी माना गया था।

महामारी अधिनियम 1897
महामारी से निपटने के लिए हर देश के पास अपने अलग-अलग कानून हैं। भारत के महामारी अधिनियम, 1897 (एपीडेमिक डिजीजेज एक्ट, 1897) के तहत कैबिनेट सचिव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। इस कानून के खंड-दो को लागू करने का निर्देश दिया है ताकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्यों के परामर्शों को लागू किया जा सके। इस अधिनियम की खास बातों में शामिल है- 1. सार्वजनिक सूचना के जरिये महामारी के प्रसार की रोकथाम के उपाय होंगे।
2. सरकार को पता लगे कि कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह महामारी से ग्रस्त है तो उन्हें किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रखने का अधिकार होगा। 3. धारा तीन में कहा गया है कि सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा और आइसी की धारा 188 के तहत सजा भी मिल सकती है। जुर्माने का भी प्रावधान है। 4. अगर कानून का पालन कराते समय कोई अनहोनी होती है तो सरकारी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय आपदा
कोरोना का संक्रमण देश के 13 राज्यों में फैल चुका है। केंद्र सरकार ने शनिवार को दोपहर 3:13 बजे कोरोनावायरस को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया।
केंद्र सरकार से पहले ओडीशा ने कोरोना संक्रमण को आपदा घोषित कर दिया था। वहीं, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड ने इसे महामारी घोषित किया।
राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए कोई तय मानक नहीं हैं। लेकिन उन हालात को राष्ट्रीय आपदा माना जाता है, जिनमें जनहानि या संपत्ति का इतना नुकसान हो कि स्थानीय समुदाय के लिए उससे निपटना असंभव हो। बाढ़, तूफान, चक्रवात, भूकंप, सुनामी को प्राकृतिक आपदा और एटमी, जैविक या रासायनिक आपदाओं को मानव जनित आपदा कहा जाता है।

राष्ट्रीय आपदा से क्या होगा
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के मुताबिक, राष्ट्रीय आपदा घोषित होने पर राष्ट्रीय आपदा राहत प्रबंधन बलों (एनडीआरएफ) को मदद के लिए भेजा जाता है।
आपदा राहत कोष के जरिए 75 फीसद मदद केंद्र और 25 फीसद राज्य सरकार करती हैं। जरूरत होने पर केंद्र के 100 फीसद फंडिंग वाले राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक फंड से अतिरिक्त सहायता दी जाती है। प्रभावित लोगों को कर्ज में रियायत दी जाती है। इसके बाद विभिन्न राज्यों ने अपने स्तर पर सतकर्ता का ऐलान किया है।

सार्क की पहल
कोरोना संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। कुछ समय पहले तक भारत की सरकार सार्क से अधिक बिमस्टेक, शंघाई सहयोग संगठन, जी-20 आदि को लेकर बातें कर रही थी, लेकिन वक्त की नजाकत ने सार्क को दोबारा जीवंत बनाने में मदद की। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में पाकिस्तान को भी न्योता दिया, जहां आयोजित सार्क सम्मेलन में कुछ साल पहले भारत समेत बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने हिस्सा लेने से मना कर दिया था। ताजा कवायद को जरूरी माना जा रहा था, क्योंकि भारत की सीमाएं पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका से जुड़ती हैं। अफगानिस्तान और मालदीव से भी भारत का सीधा आना जाना है। सार्क के बाद प्रधानमंत्री ने जी20 देशों के बीच संयुक्त रणनीति बनाने का प्रस्ताव दिया है।

क्या कहते हैं जानकार
भारत में किसी तरह की महामारी रोकने के लिए एकीकृत, व्यापक और प्रासंगिक कानून की जरूरत है, जिसमें लोगों के अधिकारों का ध्यान रखा जाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर व्यवस्था हो। मौजूदा कानून की अपनी सीमाएं हैं -डॉ. राकेश पीएस, केरल में नीपाह और कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए काम कर चुके विशेषज्ञ रहे हैं।

भारत को कोरोना संक्रमण से बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है। एचवनएनवन परिवार वाले विषाणु ज्यादा तापमान में जीवित नहीं रह पाते और भारत का मौसम अपेक्षाकृत गर्म है- डॉ. सुरेश राठी, एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ हैं।

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