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Corona Virus: ‘कोरोना किट’ पर बाबा रामदेव के दावे में क्‍यों नहीं लगताा दम, जानिए

पतंजलि और दिव्‍य फार्मेसी की दवा कोरोनिल लॉन्‍च करते हुए बाबा रामदेव ने इसे ट्रायल में सौ फीसदी सफल बताया। उनका यह बयान ही दवा की विश्‍वसनीयता को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

बाबा रामदेव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जिस दवा का इंतजार सारी दुनिया कर रही है, उसे हमने तैयार कर लिया है।(@PypAyurved/Twitter Photo)

बाबा रामदेव की दिव्‍य फार्मेसी की ओर से लॉन्‍च की गई ‘कोरोना किट’ पर विवाद जारी है। उन्‍होंने जिस दवा को कोरोना के इलाज की दुनिया की पहली दवा कह कर लॉन्‍च किया, उस पर सरकार का निर्णय आना अभी बाकी है। लेकिन, रामदेव का दावा जितना बड़ा है, वह अपने आप में संदेह को जन्‍म देता है।

सौ फीसदी सफल: बाबा रामदेव ने किट लॉन्‍च करते हुए कहा कि ट्रायल में उनकी दवा सौ फीसदी सफल रही है। सात दिन में ही कोरोना के सभी मरीज इससे ठीक हो गए। सौ फीसदी सफलता अपने आप में संदेहास्‍पद है। जितने मरीजों पर दवा का परीक्षण कर सौ फीसदी सफलता का दावा किया जा रहा है, वह संख्‍या भी दावे को शक के घेरे में लाता है। मात्र सौ के करीब मरीजों पर परीक्षण कर सौ फीसदी सफलता घोषित कर दवा लॉन्‍च भी कर दी गई। इतनी बड़ी वैश्‍विक महामारी की दवा के परीक्षण के लिए केवल सौ मरीजों का चुना जाना पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।

पोलियो की वैक्‍सीन, गर्भनिरोधक गोलियां तक 99 फीसदी ही कारगर बताई जाती हैं। नेशनल हेल्‍थ सर्विस (एनएचएस) यूके की वेबसाइट पर बताया गया है कि अगर गर्भनिरोधक गोलियों का इस्‍तेमाल एकदम सही तरीके से किया जाए तब भी ये 99 फीसदी ही कारगर होती हैं।अगर इस्‍तेमाल की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाए तो सफलता की संभावना 91 प्रतिशत रह जाती है। यह साफ लिखा गया है कि गर्भनिरोध का कोई भी तरीका सौ फीसदी कारगर नहीं कहा जा सकता।

अब तक जो जानकारी सामने आई हैं, उनके मुताबिक दिव्‍य फार्मेसी न न केवल परीक्षण के लिए मरीजों की संख्‍या कम रखी, बल्‍कि गंभीर मरीजों को परीक्षण में शामिल ही नहीं किया। यही नहीं, परीक्षण में शामिल मरीजों को ऐलोपैथी दवाएं दिए जाने की भी खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में बाबा रामदेव का यह दावा कि दवाई बेचने का शौक नहीं है, देश को बचाना लक्ष्‍य है भी बड़बोलापन ही लगता है।

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