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दिवाली पर निकला कारोबारियों का दिवाला, इस बार का पटाखा बाजार हुआ फुस्स

कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ रुपए तक होता है। उन्होंने कहा- ग्रीन पटाखे की है तो कारोबारियों के पास भारी मात्रा में स्टॉक है। ऐसे में इन्हें रद्दी की टोकरी में डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता।

पटाखा कारोबारियों के लिए इस बार की दीपावली अच्छी नहीं है। उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली में दिवाली पर पटाखों की पूर्णतया बंदी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पटाखा व्यापारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछा है कि अगर पटाखों पर पाबंदी ही लगानी थी तो फिर बिक्री-लाइंसेंस क्यों जारी किए गए। शुल्क क्यों जमा कराया गया। उन्होंने सरकार पर अदूरदर्शी और प्रशासनिक रूप से कमजोर होने आरोप लगाते हुए कहा कि वे फैसले के खिलाफ नहीं बल्कि गलत समय पर लिए गए फैसले के खिलाफ हैं। यही फैसला अगर 15-20 दिन पहले ले लिया होता तो करोड़ों के नुकसान से बचा जा सकता था।

सदर बाजार के कुतुबरोड स्थित ग्रीन पटाखा के कारोबारी मुकेश भाई पटाखे वाले ने कहा- यहां 11 लोगों को इस कारोबार के लाईसेंस मिले। अदालत के आदेश पर केवल हरित पटाखे पर करोड़ों रुपए लगा दिए। दो महीने से प्रदूषण-पराली की बहस चल रही है। सरकार को समय पर मना करना चाहिए था। लाईसेंस ही नहीं देती तो लोग पैसा ही नहीं लगाते। लोग तनाव में हैं। पटाखा व्यापारी नरेंद्र गुप्ता को अस्पताल ले जाना पड़ा। फेडरेशन आफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा-सरकार में समय पर निर्णय लेने की क्षमता की कमी है। सही निर्णय के साथ सही समय भी जरूरी है। सरकार खुद गुमराह है। उसे लाइंसेंस ही नहीं देना था।

दिल्ली में 400 करोड़ रुपए से ज्यादा का है कारोबार : दिल्ली पटाखों का एक बहुत बड़ा बाजार है। दिल्ली में पटाखों का कारोबार 350 से 400 करोड़ से ज्यादा का है। जिसका बड़ा हिस्सा हरित पटाखे ही है। हरित पटाखे में बेरियम नाइट्रेट की जगह पोटेशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल पर ज्यादा होता है जिससे पर्यावरण पर कम बुरा असर पड़ता है। कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक दिल्ली में पटाखों का कारोबार 500 करोड़ रुपए तक होता है। उन्होंने कहा- ग्रीन पटाखे की है तो कारोबारियों के पास भारी मात्रा में स्टॉक है। ऐसे में इन्हें रद्दी की टोकरी में डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता।

जामा मस्जिद के पीछे पाईवालान में कई दुकानें हैं जहां पर पटाखे मिलते हैं। पटाखा कारोबारियों के एसोसिएशन की माने तो पटाखा कंपनियों से 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। थोक व्यापारी और पटाखा निर्माता दिल्ली सरकार के फैसले के बाद नुकसान को कम करने में जुट गए हैं। दिल्ली के बाहर पटाखों को खपाने का सिलसिला जारी है। उन्होंने पटाखा पैकेज बना दिया है जो 4000 से लेकर 10000 रुपए तक की रेंज में हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा के कारोबारियों से संपर्क कर माल खपाने की होड़ देखी जा सकती है।

पुलिस ने पटाखों के सभी लाइसेंस रद्द किए : दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि एनजीटी के आदेश के बाद दिल्ली में पटाखों की खरीद-फरोख्त के लिए दिए गए सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस प्रवक्ता इस सिंह ने बताया कि आगे के कार्य एनजीटी के निर्देशों के आधार पर किया जाएगा। पुलिस ने अभी तक सात मामले दर्ज किए गए हैं और पुलिस ने अभी तक 593 किलोग्राम से अधिक पटाखे जब्त किया है।

पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार भी किया है। रविवार को भी जैतपुर थाना पुलिस ने छापामारी कर संतोष केजरीवाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसकी निशानदेही पर 16 किलो से अधिक पटाखे जब्त किए हैं। पूछताछ में पता चला कि आरोपी संतोष फरीदाबाद से रेहड़ी पर पटाखे रखकर दिल्ली में बेचने के लिए लेकर आया था। 600 किलो पटाखे बरामद, सात गिरफ्तार : दिल्ली पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर बिना लाइसेंस के बेचे जा रहे 600 किलोग्राम से अधिक पटाखें जब्त किये। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। दिवाली से पहले दिल्ली सरकार ने कोविड-19 की स्थिति और चिकित्सीय कारणों से सभी पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है।

पटाखा कारोबारियों के साथ भाजपा का प्रदर्शन
रविवार को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता विजय गोयल ने कहा कि वे पटाखों के प्रतिबंध के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह फैसला दो दिन पहले की जगह छह महीने पहले ही लेना चाहिए। दिल्ली सरकार ने केवल प्रदूषण के नाम पर वाहवाही लूटने के लिए यह कदम उठाया और प्रदूषण नियंत्रित करने में नाकामयाब दिल्ली सरकार ने व्यापारियों के सिर प्रदूषण का ठीकरा फोड़ा।

विजय गोयल ने दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ जामा मस्जिद के नजदीक प्रदर्शन किया और मांग की कि पटाखा व्यापारियों को मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार पहले 23 अक्तूबर को पटाखा विक्रेताओं को हरित पटाखों का लाईसेंस दिया और अचानक पांच नवंबर को अरविंद केजरीवाल घोषणा कर देते हैं कि दिल्ली में पटाखे बंद हैं। उनके साथ विधायक अनिल वाजपेयी एवं दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा व अन्य प्रमुख नेता थे। वहीं, आदेश गुप्ता ने हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति देने की मांग केजरीवाल सरकार से की।

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