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देश में 20 से 30 हजार वेंटिलेटर पड़े हैं बेकार, डॉक्टर्स मांग रहे 50 हजार पीपीई किट्स, ट्विटर पर छेड़ी मुहिम

एक दिन पहले ही 11 सशक्त अधिकारियों के समूह की बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि देशभर में करीब 20 हजार से लेकर 30 हजार तक वेंटिलेटर रखरखाव या कलृपुर्जों की कमी की वजह से बेकार पड़े हुए हैं। इस आंकड़े में सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पताल शामिल हैं।

कोरोना पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टर जान की बाजी लगाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं।

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। दु:खद स्थिति यह है कि कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर भी उचित मेडिकल उपकरण के अभाव में कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। पिछले दिनों नागपुर के एक डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप सुरक्षात्मक प्राथमिक मेडिकल उपकरण और उचित बीमा की मांग की थी। हालांकि, पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि कोरोना का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को 50 लाख रुपये का इंश्योरेंस सरकार देगी। लेकिन सुरक्षा उपकरणों की कमी अभी तक नहीं सुलझ सकी है।

एक दिन पहले ही 11 सशक्त अधिकारियों के समूह की बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि देशभर में करीब 20 हजार से लेकर 30 हजार तक वेंटिलेटर रखरखाव या कलृपुर्जों की कमी की वजह से बेकार पड़े हुए हैं। इस आंकड़े में सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पताल शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में बुधवार को अधिकारियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक के दौरान यह मुद्दा निकलकर आया। बैठक में शामिल होने वालों में उद्योग चेंबर कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक दर्जन वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की आपूर्ति बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई है, जो कोरोनावायरस के प्रसार की जांच करने के लिए आवश्यक हैं।

सूत्रों ने बताया, सीआईआई वेंटिलेटर निर्माताओं और सेवा कंपनियों के साथ समन्वय करेगा और उन्हें फिर से परिचालन प्रक्रिया में लाने की कोशिश करेगा। बैठक में शामिल एक सूत्र ने कहा, “हम रक्षा, ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और बड़ी कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं जो कॉन्ट्रैक्ट पर ऐसे उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग कर सकती हैं और उत्पादन स्तर को बढ़ा सकती हैं।”

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इस बीच कई राज्‍यों से ऐसी खबरें आईं कि डॉक्‍टर्स को मानकों के अनुरूप तैयार की गई किट नहीं दी जा रही हैं। इस वजह से डॉक्‍टर्स, नर्स और अस्‍पताल में काम करने वाले दूसरे कर्मचारियों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। इस बीच शुक्रवार को जब सुबह में पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से पांच अप्रैल की रात नौ बजे नौ मिनट तक बत्ती बंद कर मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की रोशनी जलाने को कहा तो लोगों ने ट्विटर पर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की मांग पर एक मुहिम छेड़ दी। देखते ही देखते ट्विटर पर #DocsNeedGear ट्रेंड करने लगा। इस दौरान कई लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी खबरें और रिपोर्ट साझा किए।

प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट्स फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरजीत भट्टी ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया कि यह अभियान भारत भर के स्वास्थ्य कर्मचारियों के पत्रों और वीडियो की प्रतिक्रिया है, जिसमें मरीजों का इलाज करते हुए वायरस से संक्रमित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि 50 से ज्यादा डॉक्टरों के संक्रमित होने की खबर है। इनमें ऐसे डॉक्टर भी शामिल हैं, जो कोरोना मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं लेकिन सुरक्षा उपकरणों के अभाव में वो भी संक्रमित हो गए। उन्होंने कहा कि प्रभावित 100 स्वास्थ्यकर्मियों में से 15 भयंकर रूप से पीड़ित हैं।


दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफदरजंग हॉस्पिटल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स ने भी अपील की है कि उन्हें 50 हजार पीपीई किट्स, 50,000 एन95 मास्क, तीन लाख ट्रिपल लेयर मास्क और आधे लीटर वाले 10,000 बोतल सैनेटाइजर उपलब्ध कराए जाएं। बता दें कि कोरोना का इलाज करने के लिए राजधानी दिल्ली का यह नोडल हॉस्पिटल है, जहां 500 फैकल्टी मेंबर्स, 1700 रिजिडेंट डॉक्टर्स और 2000 से ज्यादा नर्सें काम करती हैं।

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