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Covid-19: अपने दम पर मई, 2022 तक भी टीकाकरण पूरा नहीं कर सकेगा भारत

रूसी वैक्सीन स्पुतनिक की नौबत अचानक नहीं आई। हर्ड इम्यूनिटी पाने के लिए देश को बढ़ानी पड़ेगी वैक्सीन की उपलब्धता

corona virus, corona caseदिल्ली के एक आइसोलेशन सेंटर में परिजनों को देखता बुजुर्ग। फोटो- पीटीआई

फरवरी तक सबने, शायद सरकार ने भी मान लिया था कि देश ने कोविड-19 को हरा दिया है। इसीलिए तो जब कोरोना वायरस ने पलट कर हमला बोला तो हम कतई तैयार न थे। ऑक्सीजन तक की तैयारी न थी। मुंबई और भोपाल से सूचना है कि वहां क्रमशः आठ और पांच मरीज ऑक्सीजन के अभाव में मर गए।

और, वैक्सीन की तैयारी? यहां भी हम शायद चाक-चौबंद न थे। रूसी वैक्सीन स्पुतनिक को इमरजेंसी के तौर पर अनुमति देने की नौबत अचानक नहीं आई। न्यूज़ पोर्टल द वायर के मुताबिक टीकाकरण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए वैक्सीन स्टॉक एक हफ्ते से ज्यादा नहीं चलने वाला। इस बीच मंगलवार को सरकार ने कहा कि वह अमेरिका, यूरोप, जापान और ब्रिटेन में क्लीयरेंस पा चुकी वैक्सीन को इमरजेंसी उपयोग के लिए अनुमोदित कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि कुछ विपक्ष शासित प्रदेशों ने कुछ दिन पहले वैक्‍सीन की कमी का मुद्दा उठाया तो केंद्र सरकार ने उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। और, जब राहुल गांधी ने नई वैक्सीनों को शीघ्र अनुमति देने की मांग की तो एक केंद्रीय मंत्री ने चुहल करते हुए कहा था कि लगता है राहुल राजनीति छोड़कर विदेशी कंपनियों के लिए लॉबीइंग करने लगे हैं।

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक आठ अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि देश में इस वक्त 2.4 करोड़ वैक्सीन का स्टॉक है और 1.9 करोड़ पाइपलाइन में हैं। भारत में अब तक रोज़ाना औसतन 35 लाख टीके लगते आए हैं। इस रफ्तार के मद्देनजर वैक्सीन स्टॉक आठ अप्रैल से आगे एक हफ्ते तक टिकेगा। और, अगर भारत में वैक्सीनों की वेस्टेज की दर (6.5 प्रतिशत) को देखा जाए तो स्टॉक और पहले भी चुक सकता है।

यही रफ्तार रही तो भारत अपनी 40 फीसदी आबादी को दिसंबर 2021 तक वैक्सीनेट कर पाएगा और 60 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण होते-होते मई 2022 आ जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक सामूहिक प्रतिरक्षण यानी हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए जरूरी है कि पांच में तीन आदमियों का टीकाकरण हो। पांच में तीन वाली स्थिति को पाने के लिए मई 2022 तक वैकसीन के 1.45 अरब डोज़ चाहिए। लेकिन, राज्य सभा की एक कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक देश की क्षमता साल भर में एक से 1.3 अरब डोज़ के उत्पादन की ही है।

हर सुबह बदतर होती स्थितियों के बीच एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कोविड के बढ़ते मामलों के लिए दो बातों को जिम्मेदार ठहराया है। पहला तो अत्यंत तेजी से संक्रमण फैलाने वाला कोरोना वाइरस का नया स्ट्रेन। और, दूसरा देश में आई कोविड को लेकर आई ढिलाई। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति पर अंकुश नहीं लगाया जा सका तो देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी असर पड़ेगा। उन्होंने मर्ज की रोकथाम के लिए और कड़े अंकुश लगाए जाने चाहिए।

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