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कोरोना का कहर अब छोटे राज्यों पर, रोजाना बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

मरने वालों की दैनिक संख्या अभी भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है, चिंता की बात छोटे राज्यों में तेजी से बढ़ रही मृतक संख्या है। मार्च के अंत में देश में हो रही कुल मौतों की एक तिहाई महाराष्ट्र में हो रही थीं।

उत्तराखंड में अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक मृतक संख्या एक अंक में आ रही थी। लेकिन पिछले रविवार को यह 180 जा पहुंची।

कोरोना की दूसरी लहर में  अब चिंताजनक खबरें छोटे राज्यों से आ रही हैं। छोटे राज्यों में कोविड से मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। पूरे देश के आंकड़ों की बात की जाए तो अप्रैल से अब तक दैनिक संक्रमण पांच गुना बढ़ चुका है। पहले 80 हजार केस प्रतिदिन हो रहे थे। लेकिन अब यह आंकड़ा चार लाख तक जा पहुंचा है। मृतकों के आंकड़े में दस गुने की वृद्धि हुई है। प्रतिदिन चार सौ से हर दिन चार हजार तक यह आंकड़ा पहुंच गया है।

हालांकि मरने वालों की दैनिक संख्या अभी भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है, चिंता की बात छोटे राज्यों में तेजी से बढ़ रही मृतक संख्या है। मार्च के अंत में देश में हो रही कुल मौतों की एक तिहाई महाराष्ट्र में हो रही थीं। अब महाराष्ट्र का हिस्सा पांचवां रह गया है। जिन छोटे राज्यों में मरने वालों की गिनती बढ़ रही है, उनमें झारखंड, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड शामिल हैं।

पिछले चालीस दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और पंजाब ने बड़ी संख्या में मौतें देखी हैं। कर्नाटक इस वक्त हर दिन 400 मौतों की सूचना दे रहा है। दिल्ली और यूपी में दैनिक मृतक संख्या 300 है। लेकिन, इस बीच दर्जन भर ऐसे राज्य भी सामने आए हैं जहां रोजाना सौ मौतें हो रही हैं। इन राज्यो में उत्तराखंड, हरियाणा, झारखंड और पश्चिम बंगाल भी हैं।

उत्तराखंड में अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक मृतक संख्या एक अंक में आ रही थी। लेकिन पिछले रविवार को यह 180 जा पहुंची। उत्तराखंड की कुल मृतक संख्या 3700 है। इनमें से आधी मौतें पिछले महीने हुई हैं। उत्तराखंड से भी खराब आंकड़े झारखंड के हैं। वहां कुल मौतें 3853 हैं। इनमें 2678 की मौत एक माह यानी अप्रैल में हुई हैं।

यह बताना जरूरी है कि उपर्युक्त तमाम आंकड़े सरकारी हैं। अंत्येष्टि स्थलों व अन्य सूत्रों से मिली जानकारियां मृतक संख्या बहुत ज्यादा बता रही हैं। इस बीच ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि दैनिक संक्रमण संख्या घट सकती है। लेकिन मृतक संख्या में अभी कमी के आसार नहीं हैं।

इस वक्त भारत में रोज 4000 जान जा रही हैं। यह संख्या दुनिया में हो रही मौतों का पांचवां हिस्सा है। वैश्विक मृतक संख्या अब भी 11 और 15 हजार के बीच झूलती रहती है।

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