ताज़ा खबर
 

विशेष: महिलाओं पर दोहरी मार

कोरोना के संकट से महिलाएं एक नहीं कई मोर्चों पर लड़ रही हैं। घर के अंदर वे हिंसा और उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं तो घर के बाहर उनके हाथ से छोटे-बड़े काम निकलते जा रहे हैं। श्राद्ध के बाद त्योहारों का मौसम शुरू हो रहा है। अभाव में त्योहारी भाव का बोझ महिलाओं की रीढ़ की हड्डी पर कैसा असर करेगा? कमतर क्रय शक्ति की दोहरी मार महिलाओं को और कितना पीछे धकेलेगी।

कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन से अधिकतर पुरुष घरों में ही बैठे हैं। काम नहीं होने और आय ठप होने से घरेलू हिंसा बढ़ गई है। इससे महिलाओं पर दोहरा संकट आ गया है।

बैठे-बैठे क्या करोगे करना है कुछ काम…। कोरोना के समय में जब लोग घरों में बंद हो गए थे तो लूडो के खेल को नई प्रतिष्ठा मिली। बाहर की दुनिया घर में बंद हुई तो घर की दुनिया पर क्या असर पड़ा? अखबार में खबर आई कि पति ने पत्नी की रीढ़ की हड्डी इसलिए तोड़ दी क्योंकि उसने उसे लूडो के खेल में हरा दिया। घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ और पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा नौकरी से हाथ धोना पड़ा।

सामाजिक और ऐतिहासिक तौर पर भारत से लेकर विदेशों तक में महिलाओं ने इस दौरान उत्पीड़न का वह दौर देखा है, जिसके बारे में आगे भी मुकम्मल तौर पर कोई बात कहनी मुश्किल होगी क्योंकि यह सब घर के भीतर हुआ है। घरेलू हिंसा का ऐसा दारुण्य रूप इससे पहले शायद ही कभी देखने को मिला हो। सेहत और रोटी का संकट लैंगिक दुर्भावना और हिंसा को भी जन्म दे सकता है, आधुनिक से उत्तर आधुनिक हो चुके विश्व समाज के बीच अपना रकबा रचता यह अनुभव हमारे सामने ऐसे कई सवाल रखता है, जिसका जवाब लैंगिक न्याय के कठघरे में खड़े होकर आगे लंबे समय तक देना होगा।

कोरोना के संकट से महिलाएं एक नहीं कई मोर्चों पर लड़ रही हैं। घर के अंदर वे हिंसा और उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं तो घर के बाहर उनके हाथ से छोटे-बड़े काम निकलते जा रहे हैं। श्राद्ध के बाद त्योहारों का मौसम शुरू हो रहा है। अभाव में त्योहारी भाव का बोझ महिलाओं की रीढ़ की हड्डी पर कैसा असर करेगा? कमतर क्रय शक्ति की दोहरी मार महिलाओं को और कितना पीछे धकेलेगी।
संयुक्त राष्ट्र महिला एवं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के हाल में जारी आकलन में कहा गया है कि कोरोना महामारी 2021 तक 4.7 करोड़ और महिलाओं एवं लड़कियों को अत्यधिक गरीबी की ओर धकेल देगा।

इसके पहले महिलाओं के लिए गरीबी दर 2019 से 2021 के बीच 2.7 फीसद तक घटने की उम्मीद थी। लेकिन वैश्विक महामारी और उसके दुष्परिणामों के कारण अब इसके 9.1 फीसद तक घटने की आशंका है। अब बेहद गरीबी में रहने वाली कुल महिलाओं की संख्या 43.5 करोड़ कर देगा। अंतरराष्ट्रीय संस्था के आकलन के अनुसार 2030 तक ये हालात महामारी के पहले के स्तर तक नहीं लौट पाएंगे।

इस वैश्विक आंकड़े को भारतीय अर्थव्यवस्था की जमीन पर देखेंगे तो हालात का अंदाजा अंकों से नहीं उन अनुभवों से होगा, जो कोराना काल के दौरान महिलाओं ने देखा-भुगता है। आम भारतीय घरों में स्त्री तब तक नहीं खाती है जब तक घर के सारे पुरुषों के पेट न भर जाएं। बेटा पहले अच्छा स्कूल जाएगा और संसाधन बचने के बाद बेटी। बेटे को शिक्षा देने का मकसद अच्छी नौकरी तक पहुंच बनाना और बेटी को शिक्षा देने का मकसद शादी तक।

ऐसे माहौल में असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के कई दरवाजे बंद हो चुके हैं। अभी भी लोग घरेलू सहायिकाओं को घर नहीं बुला रहे हैं। घरों में खाना बनाने से लेकर अनेक काम देश में बड़ी संख्या में महिलाओं के जीवनयापन का साधन रहा है। अब वे सारी महिलाएं अपने घर में बेरोजगार पतियों की हताशा और घरेलू हिंसा झेल रही हैं। अभी स्कूल पूरी तरह बंद हैं। निजी स्कूलों में जहां शिक्षकों के वेतन में निराशाजनक कटौती हुई है वहीं स्कूलों से जुड़े सफाई और गैर शिक्षकीय कामों से जुड़े कर्मचारियों के लिए आय के पूरे साधन बंद हैं। स्कूलों में शिक्षण और अन्य गैर शिक्षकीय कार्य से महिलाएं ज्यादा संख्या में जुड़ी हैं। स्कूलों के बंद होने का असर सीधे उनकी क्रयशक्ति पर पड़ रहा है।

ग्रामीण और छोटे शहरों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रूप में महिलाओं को रोजगार का सहारा मिला है। गर्भधारण से लेकर प्रसव और आरंभिक शिशु देखभाल व मां-बच्चे को कुपोषण से बचाने तक में इनकी अहम भूमिका है। पर विकास दर गिरने का सीधा असर इन सरकारी योजनाओं के निवेश पर पड़ेगा। कमजोर अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी का सबसे बुरा असर महिला सशक्तीकरण पर पड़ेगा। आमदनी खत्म होने का सबसे पहला प्रभाव घरों पर ही पड़ता है।

मार-पिटाई, गाली-गलौज समेत घरेलू हिंसा के कई रूप उभर कर सामने आते हैं। संसाधन के अभाव का असर घर के प्रेमभाव पर पड़ता है। बंगाल के अकाल के समय में पुरुषों के पास सब खत्म हो गया था तो उन्होंने घर की स्त्रियों को बेचना शुरू कर दिया था। आज जब संसाधनों का अकाल पड़ चुका है तो महिलाओं की स्थिति पर अलग से गौर करने की जरूरत है। ल्ल

Next Stories
1 विशेष: खाली हाथ भी हर्षोल्लास
2 विशेष: अभाव भारी त्योहार जारी
3 चीन की PLA को भेज दिया गया है ‘हॉटलाइन संदेश’- अरुणाचली युवकों के ‘अपहरण’ की खबरों पर बोले केंद्रीय मंत्री
ये पढ़ा क्या?
X