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उम्मीद: चिकित्सकीय शोध में है बेहतर भविष्य के अवसर

देश में क्लीनिकल शोध का क्षेत्र तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहा है। नई दवाओं की खोज और उनके अनुसंधान कार्य पर भारतीय फार्मा कंपनियां खुलकर खर्च कर रही हैं। इस कारण दवाओं के परीक्षण के लिए क्लीनिकल शोध के विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।

Author Published on: May 21, 2020 3:53 AM
कोरोना महामारी के दौरान क्लिनिकल रिसर्च की मांग बढ़ी है।

कोरोना विषाणु संक्रमण के इस दौर में पूरी दुनिया की नजर उस दवा पर लगी हैं, जो उन्हें इस संक्रमण से निजात दिला पाए। इसके लिए कई देशों में दवाओं पर काम जारी है। इन दवाओं के लोगों के इस्तेमाल के चरण तक पहुंचने में क्लीनिकल शोध महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देश में क्लीनिकल शोध का क्षेत्र तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहा है। नई दवाओं की खोज और उनके अनुसंधान कार्य पर भारतीय फार्मा कंपनियां खुलकर खर्च कर रही हैं। इस कारण दवाओं के परीक्षण के लिए क्लीनिकल शोध के विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है। इसकी एक वजह विदेशी फार्मा कंपनियां भी हैं, जो अपने भारतीय साझेदारों के जरिए देश में बड़े पैमाने पर दवाओं की परीक्षण गतिविधियां संचालित कर रही हैं। कुछ विदेशी कंपनियां देश में परीक्षण का काम आउटसोर्स कर रही हैं। अनुबंध अनुसंधान संगठन (सीआरओ) के तहत होने वाला यह काम भारत में कम खर्च की वजह से फैल रहा है।

युवाओं के बीच करिअर के रूप में यह क्षेत्र अभी इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट के पाठ्यक्रमों की तरह लोकप्रिय नहीं हो पाया है। इसकी वजह है उनके बीच क्लीनिकल शोध और उसकी संभावनाओं के बारे में अनभिज्ञता। अभी भारत में आधे से ज्यादा लोगों को पता ही नहीं है कि क्लीनिकल शोध क्या है और इसके क्या-क्या फायदे होते हैं।

क्लीनिकल शोध की देश में बढ़त का एक कारण प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति भी है। आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध आदि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से निर्मित दवाओं को वैश्विक पहचान मिलने से इनके निर्माण में लगी कंपनियों का कारोबार बढ़ा है, तो शोध कार्यों में उनका खर्च भी। कुछ दशक पहले तक एलोपैथी और होम्योपैथी दवाओं तक सीमित रहे क्लीनिकल शोध के क्षेत्र को इससे नया फलक मिला है।

चिकित्सकीय शोध एसोसिएट का कार्य
प्रायोजक (दवा कंपनी या आउटसोर्सिंग कंपनी) की ओर सीआरए क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया पर निगरानी रखते हुए डाटा संग्रहित करते हैं। विभिन्न जर्नल और साइंटिफिक मीटिंग के लिए वह परीक्षण की प्रस्तुति तैयार करते हैं। इन्हें क्लीनिकल रिसर्च मॉनिटर/ एग्जीक्यूटिव/ साइंटिस्ट/ कॉर्डिनेट के नाम से भी जाना जाता है।

क्या है चिकित्सकीय शोध
किसी दवा (औषधीय उत्पाद) के प्रभाव, जोखिम, लाभ और उसकी उपयोगिता का वैज्ञानिक अध्ययन क्लीनिकल शाध्ो कहलाता है। दवा का व्यावसायिक (बाजार में उतारने के लिए) उत्पादन शुरू करने से पहले क्लीनिकल शोध किया जाता है। इस शोध के द्वारा दवाओं के अलावा नए चिकित्सकीय उपकरणों और बीमारियों का पता लगाने के लिए विकसित किए गए तकनीकी उत्पादों के प्रभाव और उनके सुरक्षा मानकों को परखा जाता है।

जब किसी दवा को प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है, तो उसका पहला प्रयोग (परीक्षण) जानवरों पर किया जाता है। क्लीनिकल शोध के इस शुरुआती चरण को प्री-क्लीनिकल स्टडीज या जनवार अध्ययन कहा जाता है। दवा के अपेक्षित नतीजे मिलने के बाद इंसानों पर दवा का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया चार चरणों में संपन्न होती है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सरकारी प्राधिकरणों से दवा का व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की अनुमति मिलती है।

चिकित्सकीय शोध के लिए योग्यता
स्नातकोत्तर/ डिप्लोमा पाठ्यक्रम : क्लीनिकल शोध से संबंधित पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए स्नातक डिग्री का होना जरूरी है। यह डिग्री फार्मेसी, मेडिसिन, बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंस और बायोसाइंस में होनी चाहिए। विदेशी फार्मा कंपनियों के अलावा देश की कई बड़ी कंपनियां क्लीनिकल शोध के लिए पेशेवरों की नियुक्ति करती हैं। क्लीनिकल शोध में अच्छा काम करने वाले युवा पेशवरों की विभिन्न देशों में खूब मांग है।

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