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कोरोनाः दूजों की मदद को आगे आए बार-बार, पर खुद की मां का बिगड़ा हाल तो बेड को भटकते रहे दर-दर; पूछा- जब मुझे चाहिए थी मदद, तब कहां थे सभी?

रविवार की सुबह, यूसुफ की मां 69 वर्षीय सिफाली बेगम का पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में उनके घर में निधन हो गया। आशना बुटानी की रिपोर्ट।

plasma donation, plasma donation certificate, covid-19प्लाज्मा डोनर सर्टिफिकेट के साथ यूसुफ (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस/आशना बुटानी)

कोरोना से हर दिन 2 हजार से अधिक लोगों की मौत हो रही है। इस बीच प्लाज्मा से मरीजों की जान बचायी जा रही है। कोरोना से उबरने के बाद लोगों ने प्लाज्मा दान कर कई मरीजों को बचाया है। सैयद यूसुफ ने भी प्लाज्मा दान किया था जिससे मरीजों की जान बचायी गयी।
लेकिन जब उन्हें अस्पताल में अपनी मां के लिए एक बेड की जरूरत हुई तो नहीं मिल पाया।

एक हाथ में अपनी मां की कोविड-पॉजिटिव रिपोर्ट और दूसरे हाथ में प्लाज्मा डोनर सर्टिफिकेट लेकर यूसुफ दिल्ली में अस्पतालों में भटकते रहे लेकिन उन्हें अपनी मां के लिए बेड नहीं मिला। रविवार की सुबह, यूसुफ की मां 69 वर्षीय सिफाली बेगम का पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में उनके घर में निधन हो गया। इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब दूसरों को मेरी ज़रूरत थी, तो मैंने किया … मैंने दो बार प्लाज्मा दान किया, केवल इसलिए कि मुझे लगा कि मैं किसी के जीवन को बचाऊंगा। लेकिन जब मुझे मदद की ज़रूरत थी, तो कोई नहीं था।

42 साल के यूसुफ ग्रेटर नोएडा में कार पार्ट्स बनाने वाली कंपनी में काम करते थे। पिछले साल नवंबर में वो बंद हो गया जिसके बाद से वो बेरोजगार हैं। इसी बीच वो कोरोना संक्रमित हो गए। जिसके बाद उन्होंने दो बार प्लाज्मा दान किया था।

शुक्रवार सुबह से ही यूसुफ अपनी मां के लिए अस्पतालों में बेड लेने के लिए लगतार भटकते रहे। पहले जीटीबी अस्पताल और फिर यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में गए लेकिन उन्हें कोई बेड नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मैंने सरकारी एम्बुलेंस के लिए पूछने के लिए नंबर पर कॉल करने की कोशिश की थी, लेकिन वो नहीं मिला।

यूसुफ ने कहा कि निजी एम्बुलेंस के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। इसलिए हमने एक ऑटो किराए पर लिया और सबसे पहले दिलशाद गार्डन में स्वामी दयानंद अस्पताल गए, जहां उन्होंने कहा कि वहाँ बिस्तर हैं, लेकिन वेंटिलेटर वाले बेड नहीं है। अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि मेरी मां को वेंटिलेटर की जरूरत है लेकिन मैंने उनसे कम से कम हमें ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने की गुहार लगाई। लेकिन वो संभव नहीं हो पाया। इस दौरान उन्होंने ऑक्सीजन की व्यवस्था करने का भी प्रयास किया लेकिन वो भी नहीं हो पाया।

शुक्रवार को यूसुफ़ अपनी मां को ऑटो से जीवन ज्योति अस्पताल और बाद में राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले गए। यहां भी, वह अपनी मां को भर्ती करवाने में असफल रहे। ईएसआईसी अस्पताल, राजीव गांधी अस्पताल, जीवन ज्योति अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। लेकिन उन लोगों ने इस बात को माना कि पिछले सप्ताह उन्हें कई मरीजों को वापस भेजना पड़ा है।

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