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जनसत्ता संवाद: कोरोना की दवा और टीका, दावे और हकीकत

भारत में एक कंपनी ने कोरोना का टीका विकसित करने का दावा किया है। इस टीके का नाम कोरो-वैक रखा गया है। वायरस से बचाने के लिए इस नाक में डाला जाएगा। इस टीके के परीक्षण में तीन से छह माह का वक्त लग सकता है। दूसरी ओर, आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में एक परजीवी रोधी दवा (एंटी-पैरासाइट) इवरमेक्टिन से कोरोना के विषाणु को खत्म करने में कामयाबी हासिल की है। इसे ‘एंटी वायरल रिसर्च जर्नल’ में प्रकाशित किया गया है।

Author Published on: April 6, 2020 11:54 PM
देश में कोरोना वायरस के दस्तक देने के साथ ही दवाओं की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है।

कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दुनिया भर में दस लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। वैज्ञानिक इसका इलाज और इसकी सटीक दवा बनाने में जुटे हैं। जहां से संक्रमण शुरू हुआ, वह चीन इसकी दवा बनाने में जुटा है, वहीं उसका प्रतिद्वंदी अमेरिका भी पूरी ताकत से जुटा है। इन दोनों के अलावा, ब्रिटेन, स्वीडन, स्पेन, इटली और भारत में अपने-अपने स्तर पर प्रयास चल ही रहे हैं।

अमेरिका और चीन दोनों ने दावा किया है कि 17 मार्च को उनलोगों ने दवा का परीक्षण शुरू कर दिया है। अमेरिका ने दवा का इंसान पर परीक्षण शुरू करने का दावा किया है। दूसरी ओर, चीन ने 17 मार्च को ही इसके टीके का प्रयोगशाला में परीक्षण शुरू करने की घोषणा की। चीन में बनाई गई दवा के सभी परीक्षण वुहान में किए जा रहे हैं। वहां की मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों पर ये परीक्षण किए गए थे उन लोगों को 14 दिनों के बाद घर भेज दिया गया था। वे सभी लोग सेहतमंद और रोगाणुमुक्त हैं।

चीन के अखबार चाइना डेली ने अकादमी आफ मिलिट्री सांइस के सदस्य और शोधकर्ता चेन वी के हवाले से लिखा है कि चीन में प्रयोगशाला में परीक्षण सही रहता है तो उन देशों में भी इसका परीक्षण किया जाएगा जो इसकी ज्यादा चपेट में हैं। चीन ने जो दवा तैयार की है उसको सैन्य अकादमी और चाइनीज अकादमी आॅफ इंजीनियर ने मिलकर बनाया है। इसे एड5-एनकोवी नाम दिया गया है। वुहान के तोंग्जी अस्पताल में 108 लोगों पर इसका प्रयोगशाला परीक्षण किया गया है। ये सभी लोग 18 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र के थे। इन सभी लोगों को तीन समूहों में बांटा गया था और दवा की अलग-अलग मात्रा दी गई थी। डॉक्टरों को उम्मीद है कि यह दवा शरीर में इस वायरस से लड़ने की क्षमता को विकसित करेगी और उनके शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण करेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इसके बाद इसे बाजार में उतार दिया जाएगा।

भारत में एक कंपनी भारत बॉयोटेक ने कोरोना का टीका विकसित करने का दावा किया है। कंपनी के चेयरमैन डॉ. कृष्णा ऐल्ला के मुताबिक, ये देश का पहला टीका है जो कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने में पूरी तरह से सफल है। इस टीके का नाम कोरो-वैक रखा गया है। वायरस से बचाने के लिए इस नाक में डाला जाएगा। सामान्य फ्लू होने पर भी इसका इस्तेमाल हो सकता है। इस टीके के परीक्षण में तीन से छह माह का वक्त लग सकता है।

इस बीच, आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में एक परजीवी रोधी दवा (एंटी-पैरासाइट) से कोरोना के विषाणु को खत्म करने में कामयाबी हासिल की है। इवरमेक्टिन नाम की दवा की सिर्फ एक खुराक कोरोना समेत सभी विषाणु आरएनए (राइबोज न्यूक्लियक एसिड) को 48 घंटे में खत्म कर सकता है। इसे ‘एंटी वायरल रिसर्च जर्नल’ में प्रकाशित किया गया है।

इवरमेक्टिन नाम की दवा की सिर्फ एक डोज कोरोना समेत सभी विषाणु आरएनए को 48 घंटे में खत्म कर सकता है। अगर संक्रमण ने कम प्रभावित किया है तो विषाणु 24 घंटे में ही खत्म हो सकता है। यह शोध आस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी की काइली वैगस्टाफ ने अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किया है।
इवरनेक्टिन एक ऐसी दवा है, जो एचआइवी, डेंगू, इंफ्लुएंजा और जीका वायरस जैसे तमाम वायरसों के खिलाफ कारगर है। हालांकि, वैगस्टाफ ने साथ में यह चेतावनी भी दी है कि यह स्टडी लैब में की गई है और इसका लोगों पर परीक्षण करने की जरूरत होगी। वैगस्टाफ के मुताबिक, इवरमेक्टिन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है और यह सुरक्षित दवा मानी जाती है।

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